22 जुलाई 2026
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आईपीएल सट्टेबाजी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: आलोक कुमार जैन गिरफ्तार, फर्जी खातों से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

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आईपीएल सट्टेबाजी मामले में ईडी की बड़ी कार्रवाई: आलोक कुमार जैन गिरफ्तार, फर्जी खातों से मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप

सारांश

आईपीएल सट्टेबाजी से कमाए अवैध धन को सोने, विलासिता की वस्तुओं और संपत्तियों में बदलने का आरोप — ईडी ने गुवाहाटी में आलोक कुमार जैन को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया। विदेशी पोर्टल, फर्जी केवाईसी और घरेलू कर्मचारियों के नाम पर खाते — यह मामला ऑनलाइन सट्टे के संगठित नेटवर्क की परतें उघाड़ता है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आलोक कुमार जैन को 20 जुलाई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया।
आरोपी पर 'स्काई एक्सचेंज' , 'वाईफाई एक्सचेंज' और 'बुल इंट्राकनेक्ट' जैसे विदेशी पोर्टलों के जरिए आईपीएल सट्टेबाजी संचालित करने का आरोप है।
घरेलू कर्मचारियों के केवाईसी दस्तावेजों का धोखे से उपयोग कर फर्जी बैंक खातों का नेटवर्क बनाया गया।
अवैध धन को सोने , विलासिता की वस्तुओं और अचल संपत्तियों में परिवर्तित किया गया।
गुवाहाटी विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने आरोपी को 4 दिनों की ईडी हिरासत में सौंपा; जांच जारी है।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने आलोक कुमार जैन को 20 जुलाई 2026 को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी आईपीएल सत्र के दौरान संचालित कथित अवैध सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी को 4 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा गया है और जांच अभी जारी है।

मामले का मुख्य घटनाक्रम

ईडी की जांच में सामने आया कि आलोक कुमार जैन कथित तौर पर एक संगठित अवैध सट्टेबाजी गिरोह का प्रमुख संचालक था। जांच एजेंसी के अनुसार, वह 'स्काई एक्सचेंज', 'वाईफाई एक्सचेंज' और 'बुल इंट्राकनेक्ट' जैसे विदेशी ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी का प्रबंधन और निपटान करता था। ये पोर्टल भारत में प्रतिबंधित हैं।

फर्जी खातों का जटिल नेटवर्क

ईडी के अनुसार, सट्टेबाजी से अर्जित अवैध धन को छिपाने के लिए आलोक जैन ने अपने घरेलू कर्मचारियों के केवाईसी दस्तावेज धोखे से एकत्र किए और उनके नाम पर कई बैंक खाते खोले। इन खातों को उसके व्यक्तिगत मोबाइल नंबर से जोड़ा गया था। जांचकर्ताओं के अनुसार, वास्तविक खाताधारकों की सहमति के बिना इन खातों के माध्यम से अवैध राशि व्यवस्थित रूप से स्थानांतरित की गई।

संपत्तियों में धन का रूपांतरण

जब्त किए गए वित्तीय बहीखातों से पता चलता है कि सट्टेबाजी से प्राप्त अवैध धन को सोने की खरीद, विलासितापूर्ण वस्तुओं और अचल संपत्ति अधिग्रहण के माध्यम से औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी की कर विवरण में घोषित आय उसकी वास्तविक संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की तुलना में बहुत कम थी — जो अस्पष्ट ऋणों, अग्रिमों, परिवार के सदस्यों को हस्तांतरण और कई अचल संपत्तियों पर नियंत्रण को दर्शाती है।

न्यायालय की कार्रवाई

चूंकि आलोक जैन मूल अपराध के सिलसिले में पहले से न्यायिक हिरासत में थे, इसलिए ईडी ने गुवाहाटी स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) के समक्ष पेशी आवेदन दायर किया। न्यायालय द्वारा जारी पेशी वारंट के आधार पर गिरफ्तारी की गई और अदालत ने आरोपी को आगे की जांच के लिए 4 दिनों की ईडी हिरासत में सौंप दिया। अर्जित और लॉन्ड्र की गई कुल धनराशि की जांच अभी जारी है।

आगे की दिशा

यह मामला ऑनलाइन सट्टेबाजी और मनी लॉन्ड्रिंग के बढ़ते गठजोड़ को उजागर करता है, जहाँ विदेशी पोर्टलों का उपयोग कर घरेलू वित्तीय प्रणाली में अवैध धन प्रवेश कराया जाता है। ईडी की यह कार्रवाई आईपीएल से जुड़े सट्टेबाजी नेटवर्क के खिलाफ चल रहे अभियान का हिस्सा है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

घरेलू हवाला नेटवर्क और डिजिटल भुगतान प्रणालियाँ मिलकर काम करती हैं। गौरतलब है कि 'स्काई एक्सचेंज' जैसे प्लेटफॉर्म वर्षों से भारतीय नियामकों की नज़र में हैं, फिर भी इनका संचालन जारी रहता है — जो प्रवर्तन और तकनीकी अवरोध दोनों मोर्चों पर नीतिगत विफलता को दर्शाता है। ईडी की हिरासत जांच यह तय करेगी कि यह नेटवर्क कितना बड़ा है और इसके तार किन राज्यों तक फैले हैं।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आलोक कुमार जैन को ईडी ने किस मामले में गिरफ्तार किया?
ईडी ने आलोक कुमार जैन को आईपीएल सट्टेबाजी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत 20 जुलाई 2026 को पीएमएलए, 2002 की धारा 19(1) के तहत गिरफ्तार किया। आरोप है कि वह विदेशी ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी संचालित कर उससे अर्जित धन को लॉन्ड्र करता था।
इस मामले में किन विदेशी सट्टेबाजी पोर्टलों का उपयोग हुआ?
जांच एजेंसी के अनुसार, 'स्काई एक्सचेंज', 'वाईफाई एक्सचेंज' और 'बुल इंट्राकनेक्ट' जैसे विदेशी ऑनलाइन पोर्टलों के माध्यम से आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी का प्रबंधन किया गया। ये सभी पोर्टल भारत में प्रतिबंधित हैं।
आरोपी ने अवैध धन छिपाने के लिए क्या तरीका अपनाया?
ईडी के अनुसार, आलोक जैन ने अपने घरेलू कर्मचारियों के केवाईसी दस्तावेज धोखे से एकत्र कर उनके नाम पर फर्जी बैंक खाते खोले और उनसे अपना मोबाइल नंबर जोड़ा। इन खातों के माध्यम से अवैध सट्टेबाजी की रकम को स्थानांतरित कर सोने, विलासिता की वस्तुओं और अचल संपत्तियों में बदला गया।
न्यायालय ने आलोक जैन को कितने दिनों की हिरासत में भेजा?
गुवाहाटी स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने आलोक जैन को आगे की जांच के लिए 4 दिनों की ईडी हिरासत में सौंपा है। अर्जित और लॉन्ड्र की गई कुल धनराशि की जांच अभी जारी है।
क्या इस मामले में और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं?
ईडी की जांच अभी जारी है और आरोपी की हिरासत में पूछताछ से नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान हो सकती है। यह मामला एक संगठित गिरोह से जुड़ा बताया जा रहा है, इसलिए आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
राष्ट्र प्रेस
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