असम बाढ़ पुनर्वास: मुख्य सचिव रवि कोटा ने 4 जिलों की समीक्षा की, 14 अगस्त तक नुकसान आकलन का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
असम में बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास को गति देने के लिए मुख्य सचिव रवि कोटा ने शुक्रवार, 7 अगस्त को राज्य के चार सर्वाधिक प्रभावित जिलों — जोरहाट, शिवसागर, चराईदेव और गोलाघाट — के अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नुकसान का प्रमाणित आकलन 14 अगस्त तक और सेक्टर-वार रिपोर्ट 18 अगस्त से पहले संबंधित समितियों के समक्ष प्रस्तुत की जाए।
बैठक का स्वरूप और प्रतिभागी
जिला परामर्श समिति की यह बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से आयोजित हुई, जिसकी अध्यक्षता स्वयं मुख्य सचिव ने की। बैठक में जिला आयुक्तों, बैंकों और बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। चर्चा का केंद्र नुकसान के आकलन, वित्तीय सहायता के वितरण और बीमा क्लेम के त्वरित निपटान में अंतर-एजेंसी समन्वय को मज़बूत करना रहा।
आकलन और रिपोर्टिंग की समय-सीमा
रवि कोटा ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि फील्ड-स्तरीय सत्यापन के साथ तकनीक-आधारित प्रमाणित नुकसान का आकलन 14 अगस्त तक अनिवार्य रूप से पूरा किया जाए। कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, आवास, एमएसएमई और अन्य आजीविका क्षेत्रों में हुए नुकसान की विस्तृत सेक्टर-वार रिपोर्ट 18 अगस्त से पहले प्रस्तुत की जाए, ताकि राहत सहायता में अनावश्यक विलंब न हो।
बीमा और बैंकिंग राहत के उपाय
चारों प्रभावित जिलों में जिला-वार बीमा नोडल अधिकारी पहले ही नियुक्त किए जा चुके हैं। बीमा कंपनियों को हेल्पलाइन शुरू करने और क्लेम का निपटान शीघ्र करने के निर्देश दिए गए हैं। बैंकों को अगले दो सप्ताह में प्रभावित कर्जदारों से स्वयं संपर्क करने को कहा गया है। उन्हें लोन मोरेटोरियम, मौजूदा ऋण का पुनर्गठन, नया ऋण और उपभोग ऋण जैसे विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
दस्तावेज़ीकरण में छूट और संस्थागत समन्वय
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से कहा कि जिन बाढ़ पीड़ितों के आवश्यक दस्तावेज़ नष्ट या खो गए हैं, उनके लिए दस्तावेज़ीकरण प्रक्रिया सरल बनाई जाए और मूल रिकॉर्ड उपलब्ध न होने की स्थिति में वैकल्पिक सत्यापन की अनुमति दी जाए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि रोज़ाना निगरानी और संस्थागत समन्वय के बिना पुनर्वास प्रक्रिया में अड़चनें बनी रहेंगी।
आगे की राह
राज्य सरकार के अनुसार इस समन्वित प्रयास का उद्देश्य पारदर्शी, संवेदनशील और त्वरित पुनर्वास सुनिश्चित करना है। यह ऐसे समय में आया है जब असम में बाढ़ से प्रतिवर्ष लाखों परिवार प्रभावित होते हैं और पुनर्वास में देरी एक पुरानी चुनौती रही है। अधिकारियों के अनुसार निर्धारित समय-सीमा के भीतर आकलन पूरा होने पर राहत सहायता का वितरण अगस्त के अंत तक शुरू होने की संभावना है।