30 जुलाई 2026
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असम बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे केंद्र — CPI(ML) की मांग, 75 मौतें, 7 जिले बुरी तरह प्रभावित

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असम बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करे केंद्र — CPI(ML) की मांग, 75 मौतें, 7 जिले बुरी तरह प्रभावित

सारांश

असम में बाढ़ ने 7 जिलों को तबाह किया, लगभग 75 जानें गईं। CPI(ML) ने केंद्र से राष्ट्रीय आपदा घोषित करने, पूरा मुआवज़ा देने और खनन-वनकटाई जैसे मानवजनित कारणों की जाँच के लिए उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक आयोग बनाने की माँग की है।

मुख्य बातें

CPI(ML) लिबरेशन ने 29 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार से असम बाढ़ को राष्ट्रीय आपदा घोषित करने की माँग की।
ताज़ा बाढ़ में लगभग 75 लोगों की मौत; शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप — 7 जिले सर्वाधिक प्रभावित।
पार्टी का आरोप — असम-नागालैंड सीमा पर बड़े पैमाने पर खनन, वनों की कटाई और जर्जर तटबंधों ने तबाही बढ़ाई।
माँग: मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता , घरों का पुनर्निर्माण, आजीविका बहाली और दीर्घकालिक पुनर्वास।
बाढ़ के कारणों की जाँच और टिकाऊ समाधान के लिए उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक आयोग गठित करने की माँग।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन — CPI(ML) — ने 29 जुलाई 2026 को केंद्र सरकार से असम में आई विनाशकारी बाढ़ को तत्काल 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने की माँग की। पार्टी की केंद्रीय समिति ने आरोप लगाया कि यह तबाही केवल प्राकृतिक नहीं, बल्कि बेरोकटोक खनन, वनों की कटाई और जर्जर बाढ़-प्रबंधन ढाँचे ने इसे और घातक बना दिया। पार्टी के अनुसार, ताज़ा बाढ़ की लहर में अब तक लगभग 75 लोगों की मौत हो चुकी है और हज़ारों परिवार विस्थापित हैं।

मुख्य घटनाक्रम

CPI(ML) के केंद्रीय समिति के बयान के अनुसार, बाढ़ की ताज़ा लहर ने शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप — सात जिलों को सबसे अधिक नुकसान पहुँचाया है। इनमें शिवसागर जिला सर्वाधिक प्रभावित बताया जा रहा है, जहाँ घर, कृषि भूमि और सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है। पार्टी ने इसे हाल के वर्षों की सबसे गंभीर बाढ़ों में से एक करार दिया है।

बाढ़ के कारण — प्राकृतिक और मानवजनित

पार्टी ने स्वीकार किया कि पड़ोसी नागालैंड और आसपास के क्षेत्रों में हुई भारी वर्षा बाढ़ का एक प्रमुख कारण रही। हालाँकि, साथ ही यह भी आरोप लगाया कि असम-नागालैंड सीमा पर बड़े पैमाने पर हो रहे खनन ने विनाश को कई गुना बढ़ा दिया। बयान में यह भी कहा गया कि नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, पुराने और कमज़ोर तटबंध तथा जलवायु परिवर्तन के कारण असामान्य रूप से अधिक वर्षा ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया। पार्टी का तर्क है कि इन मानवजनित कारणों ने बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदा को एक बड़े मानवीय संकट में तब्दील कर दिया है।

CPI(ML) की प्रमुख माँगें

पार्टी ने केंद्र सरकार के समक्ष कई ठोस माँगें रखी हैं। पहली और सबसे प्राथमिक माँग है कि बाढ़ को तत्काल राष्ट्रीय आपदा घोषित किया जाए और राहत, बचाव तथा पुनर्वास के लिए सभी संसाधन जुटाए जाएँ। इसके अतिरिक्त, पार्टी ने माँग की है कि मृतकों के परिवारों को आर्थिक सहायता, घायलों का उपचार, क्षतिग्रस्त मकानों का पुनर्निर्माण और आजीविका की बहाली सुनिश्चित की जाए।

पार्टी ने एक उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक आयोग गठित करने की भी माँग की है, जो इस आपदा के वास्तविक कारणों की जाँच करे और असम में बाढ़ के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के लिए टिकाऊ रणनीतियाँ सुझाए।

असम में बाढ़ की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि असम में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के कारण हर मानसून सत्र में बाढ़ आती रही है। यह राज्य के लिए कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन विशेषज्ञ और विपक्षी दल लगातार यह तर्क देते आए हैं कि पर्यावरणीय क्षरण और अपर्याप्त बुनियादी ढाँचे ने स्थिति को वर्ष-दर-वर्ष बदतर किया है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य के कई हिस्सों में जलस्तर अभी भी ऊँचा बना हुआ है और अधिकारी राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हैं।

आगे क्या

केंद्र सरकार की ओर से CPI(ML) की माँगों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राष्ट्रीय आपदा घोषणा से प्रभावित राज्य को अतिरिक्त केंद्रीय निधि और सैन्य-नागरिक संसाधनों की तैनाती का रास्ता खुल सकता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दबाव और बाढ़ की स्थिति दोनों पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और राज्य व केंद्र दोनों सरकारें कार्रवाई में पिछड़ती रही हैं। राष्ट्रीय आपदा की माँग राजनीतिक दबाव की रणनीति भी है — लेकिन इसके पीछे एक वैध प्रश्न है: बार-बार की इस तबाही के बाद भी तटबंध क्यों जर्जर हैं और खनन पर लगाम क्यों नहीं? जब तक संरचनात्मक कारणों की जाँच और जवाबदेही तय नहीं होती, राहत-राशि केवल अगली बाढ़ तक की मरहमपट्टी बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CPI(ML) ने असम बाढ़ को लेकर केंद्र से क्या माँग की है?
CPI(ML) लिबरेशन ने केंद्र सरकार से असम की बाढ़ को तत्काल 'राष्ट्रीय आपदा' घोषित करने और राहत, बचाव एवं पुनर्वास के लिए सभी संसाधन जुटाने की माँग की है। साथ ही मृतकों के परिजनों को मुआवज़ा, घरों का पुनर्निर्माण और आजीविका बहाली की भी माँग रखी गई है।
असम की ताज़ा बाढ़ में कितनी मौतें हुई हैं और कौन-से जिले प्रभावित हैं?
पार्टी के बयान के अनुसार, ताज़ा बाढ़ की लहर में लगभग 75 लोगों की मौत हुई है। शिवसागर, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, नागांव, सोनितपुर और कामरूप — ये सात जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं, जिनमें शिवसागर की स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है।
CPI(ML) के अनुसार असम बाढ़ के मानवजनित कारण क्या हैं?
पार्टी ने आरोप लगाया है कि असम-नागालैंड सीमा पर बड़े पैमाने पर खनन, नदी के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में वनों की कटाई, पुराने और जर्जर तटबंध तथा जलवायु परिवर्तन के कारण अत्यधिक वर्षा ने इस आपदा को और गंभीर बना दिया। पार्टी का कहना है कि ये कारण बार-बार आने वाली बाढ़ को मानवीय संकट में बदल रहे हैं।
उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक आयोग की माँग क्यों की गई है?
CPI(ML) चाहती है कि एक स्वतंत्र वैज्ञानिक आयोग बाढ़ के वास्तविक कारणों की जाँच करे और असम में बाढ़ के दीर्घकालिक प्रभाव को कम करने के लिए टिकाऊ रणनीतियाँ सुझाए। पार्टी का मानना है कि बिना इस जाँच के केवल राहत-राशि से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
असम में बाढ़ की समस्या इतनी गंभीर क्यों है?
असम में ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियाँ हर मानसून सत्र में बाढ़ लाती हैं। हालाँकि, विशेषज्ञों और विपक्षी दलों का लंबे समय से तर्क रहा है कि पर्यावरणीय क्षरण, अपर्याप्त बुनियादी ढाँचा और खराब बाढ़-प्रबंधन नीतियों ने स्थिति को वर्ष-दर-वर्ष बदतर किया है।
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