असम बाढ़: सामान्य से 400–500% अधिक बारिश रही कारण, भाजपा विधायक मानव डेका का बयान
सारांश
मुख्य बातें
असम भाजपा विधायक मानव डेका ने 27 जुलाई 2026 को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत में स्पष्ट किया कि राज्य के कई हिस्सों में आई विनाशकारी बाढ़ नदियों के सामान्य जलस्तर वृद्धि की वजह से नहीं, बल्कि असाधारण रूप से भारी वर्षा के कारण आई। उनके अनुसार, कुछ क्षेत्रों में सामान्य औसत से 400 से 500 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जिसने ऐतिहासिक रूप से बाढ़-सुरक्षित माने जाने वाले ऊंचे इलाकों को भी जलमग्न कर दिया।
बाढ़ की असामान्य प्रकृति
डेका ने बताया कि इस बार की बाढ़ पिछली मानसूनी आपदाओं से गुणात्मक रूप से भिन्न रही। उन्होंने कहा, 'प्रभावित इलाकों को पारंपरिक रूप से बाढ़-सुरक्षित माना जाता है क्योंकि वे ऊंचे स्थानों पर स्थित हैं। हालांकि, इस बार बारिश अभूतपूर्व थी, जो सामान्य स्तर से लगभग 400 से 500 प्रतिशत अधिक थी, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर बाढ़ आई।' यह ऐसे समय में आया है जब पूरे पूर्वोत्तर भारत में मानसून की तीव्रता पर जलवायु विशेषज्ञ गहरी चिंता जता रहे हैं।
विधायक ने यह भी स्वीकार किया कि 'इस आपदा में कई लोगों की जान गई और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।' हालांकि उन्होंने मृतकों की सटीक संख्या नहीं बताई।
सामाजिक एकजुटता की सराहना
डेका ने संकट के दौरान असम के नागरिकों द्वारा प्रदर्शित एकजुटता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के लोग राहत कार्यों और मानवीय सहायता के ज़रिए बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए स्वतःस्फूर्त रूप से आगे आए। गौरतलब है कि असम हर वर्ष मानसून में बाढ़ की चपेट में आता है, लेकिन इस बार की व्यापकता और भौगोलिक विस्तार असामान्य रहा।
लोकतांत्रिक विरोध और शालीनता की सीमा
नई दिल्ली में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन में असम के कृषि मंत्री केशव महंता की बेटी की भागीदारी पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणी से उपजे राजनीतिक विवाद पर डेका ने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को शांतिपूर्वक असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है। साथ ही, उन्होंने यह भी जोड़ा कि सार्वजनिक प्रदर्शन जिम्मेदारी और शालीनता की सीमा में रहकर किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर लगाए गए नारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक चर्चा में अपमानजनक भाषा के लिए कोई स्थान नहीं है।
परीक्षा सुधार और नंदन नीलेकणि का नेतृत्व
भाजपा विधायक ने इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में परीक्षा सुधारों पर केंद्र सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय कार्य बल का स्वागत किया। उन्होंने नीलेकणि को एक दूरदर्शी प्रशासक बताया और कहा कि आधार तथा डिजिटल भुगतान प्रणालियों जैसी पहलों में उनके योगदान ने बड़े पैमाने पर सुधार लागू करने की उनकी क्षमता सिद्ध की है। डेका के अनुसार, यह पैनल परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, कुशल और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए उपयुक्त स्थिति में है।
उन्होंने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों का भी समर्थन किया। उनका तर्क था कि परीक्षा में कदाचार के विरुद्ध सख्त कानूनी प्रावधान एक प्रभावी निवारक बनेंगे और देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता एवं अखंडता की रक्षा करेंगे। आगे की राह में राज्य सरकार से राहत और पुनर्वास कार्यों को प्राथमिकता देने की अपेक्षा बनी हुई है।