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असम बाढ़ 2026: विधायकों ने कहा — '52 साल में ऐसी तबाही नहीं देखी', 1,000 से अधिक बेघर

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असम बाढ़ 2026: विधायकों ने कहा — '52 साल में ऐसी तबाही नहीं देखी', 1,000 से अधिक बेघर

सारांश

असम में इस बार बाढ़ ने उन इलाकों को भी डुबोया जो दशकों से सुरक्षित माने जाते थे। नागालैंड सीमा पर 400-500% अधिक वर्षा, 1,000 से अधिक बेघर और राहत न पहुँचने के आरोप — 52 साल के अनुभवी विधायक भी इसे अभूतपूर्व बता रहे हैं।

मुख्य बातें

असम में 27 जुलाई 2026 को भीषण बाढ़ पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के विधायकों ने चिंता जताई।
नागालैंड और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान्य से 400-500% अधिक वर्षा को बाढ़ का कारण बताया गया।
एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान ने कहा — 52 वर्षों में ऐसी बाढ़ नहीं देखी; करीब 1,000 लोग बेघर।
मंत्री बिस्वजीत डाइमरी ने बताया कि हालोडी में अधिक जलस्तर के कारण राहत कार्य बाधित है।
विपक्ष नेता वाज़ेद अली चौधरी ने आरोप लगाया — बाढ़ में फँसे लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुँची।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार राहत कार्यों की समीक्षा कर रहे हैं।

असम में आई भीषण बाढ़ ने ऊपरी असम सहित कई जिलों में अभूतपूर्व तबाही मचाई है, जिसे लेकर 27 जुलाई को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के जनप्रतिनिधियों ने गहरी चिंता जताई। नागालैंड और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान्य से 400-500 प्रतिशत अधिक वर्षा को इस असाधारण बाढ़ का प्रमुख कारण बताया जा रहा है। कम से कम 1,000 लोग बेघर हो चुके हैं और राहत वितरण की पर्याप्तता पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

बाढ़ का स्वरूप — 'पहले कभी नहीं देखा'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक मानव डेका ने कहा, 'बाढ़ बिल्कुल अप्रत्याशित थी। जिन इलाकों में बाढ़ आई, वहाँ पहले कभी बाढ़ नहीं आई थी क्योंकि वे ऊँचे इलाकों में बसे हैं। इस बार नागालैंड और सीमावर्ती इलाकों में सामान्य से 400-500 फीसदी ज़्यादा बारिश होने की वजह से जबरदस्त बाढ़ आई।' उन्होंने यह भी कहा कि इस संकट की घड़ी में असम का हर नागरिक एकजुट है।

एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान ने स्थिति की गंभीरता को और स्पष्ट करते हुए कहा, 'मैंने अपनी ज़िंदगी के पिछले 52 सालों में ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी। यह बहुत खतरनाक है। इसकी वजह से करीब 1,000 लोग बेघर हो गए हैं।'

सरकार की प्रतिक्रिया और राहत कार्य

मंत्री बिस्वजीत डाइमरी ने बताया कि सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा, 'बाढ़ से प्रभावित लोगों का जीवन पटरी पर लाने के लिए लगातार कोशिश जारी है। मुख्यमंत्री हर समय बाढ़ और राहत कार्यों पर निगरानी रखने के साथ प्रभावित लोगों से बात कर रहे हैं। हालोडी में अभी पानी अधिक है, इसलिए वहाँ राहत कार्य करना थोड़ा मुश्किल है।'

BJP विधायक टंकेश्वर राभा ने ऊपरी असम की स्थिति पर कहा, 'भारत सरकार ने जिस तरह से कदम उठाए हैं, उससे लगता है कि 2-3 दिनों में हालात सामान्य हो जाएंगे। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा और निगरानी कर रहे हैं।'

विपक्ष के आरोप — राहत नहीं पहुँची

विपक्ष के नेता वाज़ेद अली चौधरी ने स्थिति को 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' करार देते हुए कहा, 'वहाँ जो हो रहा है, वैसा हमने पहले कभी नहीं देखा। राहत सामग्री भी सभी तक नहीं पहुँच रही है। जो लोग बाढ़ के पानी में फँसे हुए हैं, उन्हें राहत सहायता नहीं मिल रही है।' उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधायक दल (CLP) की ओर से भी कुछ सहायता उपलब्ध कराई गई है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब असम पहले से ही मानसून की मार झेल रहा है। गौरतलब है कि ऊपरी असम के वे इलाके जो परंपरागत रूप से बाढ़-मुक्त माने जाते थे, इस बार जलमग्न हो गए — जो इस आपदा की असाधारण प्रकृति को दर्शाता है। सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक संस्थाएँ राहत एवं पुनर्वास कार्यों में जुटी हैं।

आगे क्या

राहत और पुनर्वास कार्य जारी हैं, परंतु हालोडी जैसे क्षेत्रों में जलस्तर अभी भी अधिक होने के कारण पहुँच बाधित है। विपक्ष की माँग है कि राहत वितरण की स्वतंत्र निगरानी हो। आने वाले दिनों में वर्षा की स्थिति और जल-निकासी की गति ही तय करेगी कि कितनी जल्दी सामान्य जनजीवन बहाल हो सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पूर्व-चेतावनी तंत्र और अंतर-राज्यीय आपदा समन्वय पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऊपरी असम के परंपरागत रूप से बाढ़-मुक्त क्षेत्रों का जलमग्न होना यह संकेत देता है कि जलवायु परिवर्तन के चलते पुराने आपदा-मानचित्र अप्रासंगिक हो रहे हैं। सरकार राहत की बात कर रही है, लेकिन विपक्ष का 'राहत नहीं पहुँची' का आरोप और हालोडी जैसे क्षेत्रों में स्वीकृत बाधाएँ यह दर्शाती हैं कि अंतिम छोर तक वितरण की व्यवस्था अभी भी कमज़ोर कड़ी है। असली जवाबदेही तब होगी जब राहत वितरण के स्वतंत्र आँकड़े सार्वजनिक हों।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

असम में 2026 की बाढ़ इतनी भीषण क्यों है?
नागालैंड और सीमावर्ती क्षेत्रों में सामान्य से 400-500% अधिक वर्षा के कारण ऊपरी असम के वे इलाके भी जलमग्न हो गए जो परंपरागत रूप से बाढ़-मुक्त माने जाते थे। BJP विधायक मानव डेका के अनुसार, इन ऊँचे इलाकों में पहले कभी बाढ़ नहीं आई थी।
असम बाढ़ 2026 में कितने लोग बेघर हुए हैं?
एआईयूडीएफ विधायक मजीबुर रहमान के अनुसार, बाढ़ के कारण करीब 1,000 लोग बेघर हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अपने 52 वर्षों के जीवन में उन्होंने ऐसी बाढ़ कभी नहीं देखी।
असम बाढ़ राहत कार्य की स्थिति क्या है?
मंत्री बिस्वजीत डाइमरी ने बताया कि सरकारी एजेंसियाँ, गैर-सरकारी संगठन और सामाजिक संस्थाएँ राहत कार्यों में लगी हैं। हालाँकि हालोडी में अधिक जलस्तर के कारण राहत पहुँचाना मुश्किल बना हुआ है।
विपक्ष ने असम बाढ़ राहत पर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष के नेता वाज़ेद अली चौधरी ने आरोप लगाया कि बाढ़ के पानी में फँसे लोगों तक राहत सामग्री नहीं पहुँच रही है। कांग्रेस विधायक दल (CLP) ने अपने स्तर पर कुछ सहायता उपलब्ध कराई है।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा बाढ़ राहत में क्या भूमिका निभा रहे हैं?
BJP विधायक टंकेश्वर राभा और मंत्री बिस्वजीत डाइमरी दोनों ने बताया कि मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा लगातार बाढ़ राहत कार्यों की समीक्षा और निगरानी कर रहे हैं और प्रभावित लोगों से सीधे संवाद बनाए हुए हैं।
राष्ट्र प्रेस
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