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असम के छात्र कृष्णज्योति ने स्कूली ट्रेनिंग से शुरू की मशरूम खेती, सीएम हिमंता सरमा ने की तारीफ

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असम के छात्र कृष्णज्योति ने स्कूली ट्रेनिंग से शुरू की मशरूम खेती, सीएम हिमंता सरमा ने की तारीफ

सारांश

असम के एक स्कूली छात्र कृष्णज्योति ने विद्यालय के एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम से प्रेरणा लेकर मशरूम की खेती शुरू की — और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इसे असम के स्टार्टअप इकोसिस्टम की नींव बताते हुए सराहा। यह कहानी राज्य की स्कूल-स्तरीय उद्यमिता नीति का जीवंत उदाहरण है।

मुख्य बातें

असम के छात्र कृष्णज्योति ने स्कूल में आयोजित एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम के बाद मशरूम की खेती शुरू की।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर यह सफलता की कहानी साझा कर छात्र की प्रशंसा की।
असम सरकार कृषि, फूड प्रोसेसिंग और मशरूम उत्पादन जैसे क्षेत्रों में स्कूलों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को बढ़ावा दे रही है।
सरमा के अनुसार, यह पहल असम के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूत बनाने और ग्रामीण आजीविका को सुधारने में योगदान देगी।
राज्य सरकार का लक्ष्य स्कूली छात्रों को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़कर भविष्य के रोज़गार-दाता तैयार करना है।

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने 4 जुलाई 2025 को सोशल मीडिया पर एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी साझा की — कृष्णज्योति नामक एक स्कूली छात्र ने अपने विद्यालय में आयोजित एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के बाद मशरूम की खेती शुरू की और तब से वह इसे सफलतापूर्वक जारी रखे हुए है। मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के ज़रिए असम सरकार की स्कूल-स्तरीय उद्यमिता पहल की सार्थकता को रेखांकित किया।

मुख्य घटनाक्रम

सरमा ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'उनके स्कूल में एक ट्रेनिंग प्रोग्राम ने कृष्णज्योति को मशरूम की खेती शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया और तब से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।' मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार चाहती है कि युवा पीढ़ी उद्यमिता और इनोवेशन की ताकत का उपयोग करने के लिए पूरी तरह तैयार रहे।

यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब असम सरकार कृषि, फूड प्रोसेसिंग और संबद्ध क्षेत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को शैक्षणिक संस्थानों में व्यापक रूप से बढ़ावा दे रही है।

उद्यमिता प्रशिक्षण का उद्देश्य

मुख्यमंत्री के अनुसार, एंटरप्रेन्योरशिप से जल्दी जुड़ने से छात्र व्यावसायिक अवसरों को पहचानने, प्रैक्टिकल जानकारी अर्जित करने और पढ़ाई के साथ-साथ खुद का उद्यम शुरू करने का आत्मविश्वास विकसित कर सकेंगे। सरमा ने कहा, 'शुरुआत में मिली यह बढ़त बच्चों को कम उम्र से ही उद्यमों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद करेगी और आखिरकार असम के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।'

गौरतलब है कि मशरूम की खेती जैसे क्षेत्र कम लागत और कम जगह में भी शुरू किए जा सकते हैं, जिससे ग्रामीण और अर्ध-शहरी पृष्ठभूमि के छात्रों के लिए यह एक व्यावहारिक विकल्प बनता है।

असम सरकार की व्यापक रणनीति

अधिकारियों के अनुसार, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम उत्पादन और संबद्ध क्षेत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को शैक्षणिक संस्थानों में एकीकृत किया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्रों को स्वरोजगार के अवसरों से परिचित कराना और उन्हें आय-सृजन गतिविधियों के लिए तैयार करना है।

राज्य सरकार का मानना है कि स्कूली स्तर पर उद्यमिता की सोच विकसित करने से न केवल भविष्य के रोज़गार-दाता तैयार होंगे, बल्कि ग्रामीण आजीविका, टिकाऊ खेती और समग्र आर्थिक विकास में भी योगदान मिलेगा।

आम जनता और छात्रों पर असर

यह पहल विशेष रूप से असम के उन छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो पारंपरिक नौकरी के बाज़ार पर निर्भर रहने की बजाय स्वरोजगार की ओर रुख करना चाहते हैं। कृष्णज्योति जैसे उदाहरण दूसरे छात्रों को भी प्रेरित कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूली पाठ्यक्रम में उद्यमिता को शामिल करना एक दीर्घकालिक निवेश है जो राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को जमीनी स्तर से मज़बूत बना सकता है।

आगे की राह

असम सरकार की योजना है कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का दायरा और अधिक विद्यालयों तक बढ़ाया जाए। कृष्णज्योति की सफलता की कहानी इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है कि सही मार्गदर्शन और व्यावहारिक प्रशिक्षण से छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान ही उद्यमी बन सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि असम के कितने स्कूलों में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम नियमित रूप से चल रहे हैं और उनके परिणाम क्या हैं। एक छात्र की सफलता को नीति की सफलता मानना जल्दबाज़ी होगी — ज़रूरत है व्यापक डेटा की, जो बताए कि इन प्रोग्रामों से कितने छात्र वास्तव में स्वरोजगार की ओर बढ़े। मशरूम की खेती जैसे क्षेत्र में संभावनाएँ हैं, पर बाज़ार से जुड़ाव और आय की निरंतरता सुनिश्चित किए बिना यह उत्साह अल्पकालिक साबित हो सकता है।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृष्णज्योति ने मशरूम की खेती कैसे शुरू की?
कृष्णज्योति ने अपने स्कूल में आयोजित एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग प्रोग्राम में हिस्सा लेने के बाद मशरूम की खेती शुरू की। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के अनुसार, तब से वह इसे सफलतापूर्वक जारी रखे हुए हैं।
असम सरकार स्कूलों में उद्यमिता प्रशिक्षण क्यों दे रही है?
असम सरकार का उद्देश्य युवाओं को कम उम्र से ही स्वरोजगार के अवसरों से परिचित कराना और राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मज़बूत बनाना है। इससे छात्र व्यावसायिक सोच, प्रैक्टिकल कौशल और आत्मविश्वास विकसित कर सकते हैं।
सीएम हिमंता सरमा ने इस पहल पर क्या कहा?
सरमा ने कहा कि 'शुरुआत में मिली यह बढ़त बच्चों को कम उम्र से ही उद्यमों को समझने और आगे बढ़ाने में मदद करेगी और आखिरकार असम के स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत बनाएगी।' उन्होंने कृष्णज्योति की कहानी को सोशल मीडिया पर साझा कर इसे प्रेरणा का उदाहरण बताया।
असम के स्कूलों में किन क्षेत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग दी जा रही है?
अधिकारियों के अनुसार, कृषि, फूड प्रोसेसिंग, मशरूम की खेती और संबद्ध क्षेत्रों में प्रैक्टिकल ट्रेनिंग को शैक्षणिक संस्थानों में बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका लक्ष्य छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और स्वरोजगार की जानकारी देना है।
इस पहल से असम के ग्रामीण क्षेत्रों को क्या फायदा होगा?
राज्य सरकार का मानना है कि स्कूली स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा देने से ग्रामीण आजीविका, टिकाऊ खेती और समग्र आर्थिक विकास में योगदान मिलेगा। इससे स्थानीय प्रतिभा और इनोवेशन पर आधारित एक मज़बूत स्टार्टअप इकोसिस्टम भी तैयार होगा।
राष्ट्र प्रेस
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