एक्सिस बैंक कस्टमर केयर फ्रॉड: दिल्ली पुलिस ने 4 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया, ₹1.19 लाख की ठगी
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की साइबर नॉर्थ टीम ने एक्सिस बैंक का कस्टमर केयर अधिकारी बनकर लोगों को ठगने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो वर्चुअल नंबर और थर्ड पार्टी पेमेंट ऐप 'चेक' के जरिए पीड़ितों के क्रेडिट कार्ड से पैसे उड़ाते थे। मामले में शिकायतकर्ता से तीन ट्रांजेक्शन में कुल ₹1,19,837 की ठगी की गई।
कैसे हुई ठगी
16 जुलाई 2026 को यश शर्मा नामक पीड़ित को एक अनजान कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को एक्सिस बैंक का क्रेडिट कार्ड अधिकारी बताया। उसने कहा कि पीड़ित के कार्ड पर ₹2,499 का एएमसी प्लान सक्रिय है। जब यश शर्मा ने इसे रद्द करने को कहा, तो ठग ने बताया कि कस्टमर केयर से जल्द ही कॉल आएगी।
थोड़ी देर बाद एक और कॉल आई जो बैंक के असली कस्टमर केयर नंबर जैसी दिखती थी — दरअसल, यह वर्चुअल नंबर की चाल थी। आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए नकली सर्विस रिक्वेस्ट नंबर 102462421 दिया और कहा कि 4 घंटे में नया कार्ड एक्टिवेट हो जाएगा। इसके बाद पीड़ित को 'चेक' ऐप डाउनलोड करवाकर यूपीआई आईडी पर भुगतान के लिए प्रेरित किया गया, जिससे तीन बार में ₹1,19,837 खाते से निकल गए।
जब नया कार्ड नहीं आया, तब पीड़ित ने असली कस्टमर केयर से संपर्क किया और ठगी का खुलासा हुआ। उन्होंने तुरंत कार्ड ब्लॉक करवाया और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत संख्या 30807260059157 दर्ज कराई, जिसके बाद पीएस साइबर नॉर्थ में ई-एफआईआर 00193/26 दर्ज हुई।
जाँच और गिरफ्तारी
डीसीपी नॉर्थ निहारिका भट्ट की देखरेख और एडिशनल डीसीपी पुखराज कमल गुप्ता व राम दुलेश मीणा के मार्गदर्शन में एसीपी विशेष धत्तरवाल और एसएचओ रोहित गहलोत की टीम ने जाँच शुरू की। इंस्पेक्टर मनोज और कांस्टेबल सतपाल भी टीम का हिस्सा थे।
जाँच में पता चला कि ठगों ने एक एप्लिकेशन से वर्चुअल नंबर बनाए थे जो बैंक के असली नंबर जैसे दिखते थे। चेक ऐप को नोटिस भेजने पर प्रिंस कुमार के पैन कार्ड से जुड़ा कोटक महिंद्रा बैंक खाता सामने आया, जिसमें 5-7 दिनों में ₹12 लाख से अधिक के संदिग्ध लेन-देन मिले।
15 सितंबर 2026 को पहले आरोपी प्रिंस कुमार (20 वर्ष) को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर विशाल तोमर (21 वर्ष) और विशाल राघव (27 वर्ष) को अलीगढ़ से दबोचा गया। चौथा आरोपी संजय वर्मा (40 वर्ष, उत्तम नगर, मूलतः संभल) को भी गिरफ्तार किया गया।
गैंग का तौर-तरीका
पुलिस के अनुसार, संजय वर्मा ने बताया कि 2024-25 में नोएडा के एक कॉल सेंटर में काम करते हुए उसकी मुलाकात विशाल राघव से हुई और वहीं से उसने ठगी का तरीका सीखा। बाद में उसने नोएडा में खुद का कॉल सेंटर खोला, लेकिन पुलिस कार्रवाई के डर से बंद कर दिया। इसके बाद खिलौने की दुकान चलाते हुए उसने बॉबी और अवतार नामक साथियों के साथ मिलकर नया गैंग बनाया।
इस नेटवर्क में भूमिकाएँ स्पष्ट रूप से बँटी थीं: विशाल राघव बैंक खाते जुटाता था, बॉबी और अवतार फर्जी सिम कार्ड दिलाते थे, और संजय वर्मा कस्टमर केयर अधिकारी बनकर पीड़ितों को फंसाता था। ठगी की रकम को चेक ऐप के जरिए लेयर किया जाता था और एटीएम से निकालकर 30 प्रतिशत कमीशन पर बाँटा जाता था।
बड़े नेटवर्क के संकेत
पुलिस ने बरामदगी में 8 मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इनमें से एक फोन के IMEI नंबर से 32 अन्य साइबर शिकायतें जुड़ी मिली हैं, जो इस गिरोह के और भी बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करती हैं। फरार आरोपी बॉबी और अवतार की तलाश अभी जारी है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में बैंक अधिकारी बनकर की जाने वाली साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जाँच एजेंसियों की नजर अब उन बाकी लोगों पर है जो इस नेटवर्क को चला रहे थे।