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अयोध्या सावन मेला 2025: कांवड़ियों के लिए नगर निगम ने की स्वच्छता, पेयजल और 4 शेड की व्यवस्था

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अयोध्या सावन मेला 2025: कांवड़ियों के लिए नगर निगम ने की स्वच्छता, पेयजल और 4 शेड की व्यवस्था

सारांश

अयोध्या नगर निगम ने सावन मेले और कांवड़ यात्रा के लिए पूरी तैयारी कर ली है। मेयर गिरीश पति त्रिपाठी के अनुसार स्वच्छता, पेयजल और 4 वाटरप्रूफ शेड की व्यवस्था की गई है। सावन के पहले 15 दिन कांवड़ सेवा और बाद में मणि पर्वत पर झूला उत्सव होगा।

मुख्य बातें

अयोध्या नगर निगम ने सावन मेले और कांवड़ यात्रा की तैयारियां पूरी कर लीं।
मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने स्वच्छता, पेयजल और चार वाटरप्रूफ शेड स्थापित करने की जानकारी दी।
सावन के पहले 15 दिन ( कृष्ण पक्ष ) कांवड़ यात्रा का आयोजन; श्रद्धालु माँ सरयू से जल भरकर शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।
नागेश्वर धाम मंदिर में भी भगवान शिव का जलाभिषेक होता है, जिसे भगवान राम के पुत्रों द्वारा स्थापित माना जाता है।
शुक्ल पक्ष की तृतीया से मणि पर्वत पर झूला उत्सव शुरू होगा; अयोध्या के लगभग हर मंदिर में विशेष सजावट होगी।

अयोध्या नगर निगम ने सावन मेले और कांवड़ यात्रा को लेकर अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। नगर निगम के मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि पूरे एक महीने तक चलने वाले इन धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वच्छता, पेयजल, आश्रय और अन्य आवश्यक सेवाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। नगर निगम की टीमें लगातार मैदान में सक्रिय हैं ताकि बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सावन मेले का पहला चरण: कांवड़ यात्रा

मेयर गिरीश पति त्रिपाठी ने बताया कि सावन मेले का पहला चरण कृष्ण पक्ष के दौरान होता है, जो महीने के शुरुआती 15 दिनों तक चलता है। इस अवधि में कांवड़ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व होता है। आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु अयोध्या पहुँचकर माँ सरयू से पवित्र जल भरते हैं और कांवड़ के माध्यम से पैदल यात्रा करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा आस्था, तपस्या और भक्ति का प्रतीक मानी जाती है।

मेयर ने यह भी बताया कि श्रद्धालु भगवान राम के पुत्रों द्वारा स्थापित माने जाने वाले नागेश्वर धाम मंदिर में भगवान शिव का जलाभिषेक भी करते हैं। सावन के पहले 15 दिनों तक अयोध्या पूरी तरह कांवड़ सेवा में समर्पित रहती है।

झूला उत्सव: सावन का दूसरा चरण

सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया से मणि पर्वत पर झूला उत्सव का शुभारंभ होता है, जो अयोध्या की प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इस उत्सव के दौरान अयोध्या के लगभग हर मंदिर में भगवान के झूले की विशेष व्यवस्था की जाती है। मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है और भगवान के विग्रह को झूले पर विराजमान किया जाता है, जिससे पूरे शहर का धार्मिक वातावरण और अधिक भक्तिमय हो जाता है।

इस अवसर पर श्रद्धालुओं को भगवान के विग्रह को झुलाने का सौभाग्य प्राप्त होता है। गौरतलब है कि यह परंपरा सदियों पुरानी है और हर वर्ष लाखों भक्तों को अयोध्या की ओर आकर्षित करती है।

नगर निगम की व्यवस्थाएं

मेयर त्रिपाठी ने बताया कि स्वच्छता बनाए रखने के लिए विशेष टीमें चौबीसों घंटे कार्यरत हैं और पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा नगर निगम चार स्थानों पर वाटरप्रूफ शेड स्थापित कर रहा है, ताकि बारिश के दौरान श्रद्धालु सुरक्षित आश्रय ले सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे माह चलने वाले इन आयोजनों में श्रद्धालुओं की सुविधाएं नगर निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

आम जनता और श्रद्धालुओं पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब अयोध्या राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से धार्मिक पर्यटन के मामले में देश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। सावन मेले के दौरान न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि आसपास के अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। नगर निगम की यह तैयारी सुनिश्चित करती है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान शहर की बुनियादी सेवाएं बाधित न हों और श्रद्धालुओं का अनुभव सुखद रहे।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सावन मेला इस परीक्षा की सबसे बड़ी कड़ी है। चार शेड और विशेष सफाई दल की घोषणा स्वागतयोग्य है, लेकिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ के सापेक्ष यह पर्याप्त है या नहीं, यह ज़मीनी क्रियान्वयन से तय होगा। गौरतलब है कि पिछले वर्षों में कांवड़ यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन और स्वच्छता को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। नगर निगम की तैयारी की असली कसौटी मेले के दौरान की व्यवस्था होगी, न कि पूर्व-घोषणाएं।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या सावन मेला 2025 में कांवड़ियों के लिए क्या व्यवस्था की गई है?
अयोध्या नगर निगम ने कांवड़ियों के लिए स्वच्छता टीमें, पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था और चार स्थानों पर वाटरप्रूफ शेड स्थापित किए हैं। मेयर गिरीश पति त्रिपाठी के अनुसार नगर निगम की टीमें पूरे माह मैदान में सक्रिय रहेंगी।
अयोध्या में कांवड़ यात्रा कब और कैसे होती है?
सावन के कृष्ण पक्ष के दौरान पहले 15 दिनों में कांवड़ यात्रा होती है। श्रद्धालु माँ सरयू से पवित्र जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने क्षेत्रों के शिवालयों में जलाभिषेक करते हैं।
नागेश्वर धाम मंदिर का सावन मेले में क्या महत्व है?
नागेश्वर धाम मंदिर को भगवान राम के पुत्रों द्वारा स्थापित माना जाता है। सावन के दौरान कांवड़िए यहाँ भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं, जिससे यह मंदिर कांवड़ यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव बन जाता है।
अयोध्या में झूला उत्सव क्या है और कब शुरू होता है?
झूला उत्सव सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया से मणि पर्वत पर शुरू होता है। इस दौरान अयोध्या के लगभग हर मंदिर में भगवान के विग्रह को झूले पर विराजमान किया जाता है और श्रद्धालुओं को झुलाने का अवसर मिलता है।
सावन मेले के दौरान अयोध्या नगर निगम की मुख्य प्राथमिकताएं क्या हैं?
नगर निगम ने श्रद्धालुओं की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसमें निरंतर स्वच्छता, पेयजल आपूर्ति और बारिश के दौरान आश्रय के लिए चार वाटरप्रूफ शेड शामिल हैं।
राष्ट्र प्रेस
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