उज्जैन: आषाढ़ चतुर्दशी पर महाकालेश्वर मंदिर में भव्य भस्म आरती, भांग-चंदन से सजे राजाधिराज महाकाल
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 28 जुलाई 2026 को आषाढ़ शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती संपन्न हुई। भांग और चंदन से सुसज्जित राजाधिराज स्वरूप में विराजे बाबा के दर्शन पाने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु रात से ही मंदिर के बाहर कतारबद्ध खड़े रहे।
मुख्य घटनाक्रम
मंगलवार की तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के साथ बाबा महाकाल के कपाट खोले गए। मंत्रोच्चार के मध्य जलाभिषेक किया गया और इसके उपरांत दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को भांग और चंदन से श्रृंगारित कर राजाधिराज स्वरूप में भक्तों के समक्ष प्रस्तुत किया गया।
जैसे ही दर्शन का क्षण आया, पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के उद्घोष, घंटियों की झंकार और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा। मंदिर के पुजारी ने महाआरती संपन्न कराई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु साक्षी बने।
भस्म आरती की विशेषता
गौरतलब है कि महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती देश-विदेश में अपनी अलौकिकता के लिए प्रसिद्ध है। परंपरागत रूप से पहले श्मशान की राख से यह आरती संपन्न होती थी, किंतु अब विशेष रूप से कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है। यह बदलाव धार्मिक शुद्धता और आधुनिक स्वास्थ्य मानकों के बीच संतुलन का प्रयास माना जाता है।
भस्म आरती में सम्मिलित होने के लिए पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह नियम मंदिर की धार्मिक गरिमा बनाए रखने हेतु लागू है।
श्रद्धालुओं की उपस्थिति और व्यवस्था
आषाढ़ चतुर्दशी के इस पावन अवसर पर मंदिर परिसर में असाधारण भीड़ उमड़ी। अपने आराध्य के दर्शन की लालसा में श्रद्धालु बीती रात से ही कतार में खड़े थे। मंदिर के आसपास व्यवस्था बनाए रखने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
यह ऐसे समय में आया है जब सावन माह की निकटता के कारण महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। बाबा महाकाल की आरती को देखने के लिए जनसामान्य के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन आती रही हैं।
आगे क्या
आषाढ़ माह की समाप्ति और सावन के आगमन के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर में भक्तों का तांता और बढ़ने की संभावना है। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध जारी रहेंगे।