6 नवंबर 2026
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बगहा अदालत का बड़ा फैसला: दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या में पति प्रमोद यादव दोषी, सास बरी

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बगहा अदालत का बड़ा फैसला: दहेज के लिए गर्भवती पत्नी की हत्या में पति प्रमोद यादव दोषी, सास बरी

सारांश

बगहा की अदालत ने दहेज के लिए गर्भवती पत्नी संध्या यादव की हत्या में पति प्रमोद यादव को BNS धारा 103(1) के तहत दोषी ठहराया — हत्या में अजन्मे बच्चे की जान भी गई थी। सास साक्ष्य अभाव में बरी; सज़ा 20 नवंबर को तय होगी।

मुख्य बातें

बगहा अदालत ने 6 नवंबर 2026 को प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को गर्भवती पत्नी संध्या यादव की दहेज हत्या का दोषी करार दिया।
दोषी को BNS धारा 103(1) और धारा 91 के तहत दोषी पाया गया; शेष आरोपों से बरी।
हत्या के समय संध्या गर्भवती थी — घटना में उसके अजन्मे बच्चे की भी मृत्यु हुई।
सास लीलावती देवी को पर्याप्त साक्ष्य न मिलने के कारण सभी आरोपों से बरी किया गया।
शादी 5 जून 2025 को हुई थी; हत्या 11 सितंबर 2025 को कथित तौर पर की गई।
सज़ा की अवधि पर दलीलें 20 नवंबर 2026 को सुनी जाएंगी; प्रमोद फिलहाल न्यायिक हिरासत में।

बिहार के बगहा स्थित अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को दहेज हत्या के एक मामले में प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को उसकी गर्भवती पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में उसकी सास लीलावती देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया। सजा की अवधि निर्धारित करने के लिए अगली सुनवाई 20 नवंबर 2026 को होगी।

मामले की पृष्ठभूमि

23 वर्षीय संध्या यादव की शादी 5 जून 2025 को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के पडरौना थाना क्षेत्र के अनरहवा नौका टोला से बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के पिपरासी थाना क्षेत्र के चनकुहवा गाँव निवासी प्रमोद यादव से हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई थी। आरोप है कि विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से दहेज की माँग को लेकर संध्या पर दबाव बनाया जाने लगा।

आरोपों के अनुसार, प्रमोद यादव स्वयं संध्या के मायके पहुँचा और अतिरिक्त ₹2 लाख दहेज की माँग की। संध्या के पिता गर्भन यादव ने बताया कि ससुराल से प्रताड़ना की शिकायतें लगातार मिल रही थीं।

मुख्य घटनाक्रम

11 सितंबर 2025 को सुबह लगभग चार बजे संध्या के मायके वालों को सूचना मिली कि उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई है। जब परिजन ससुराल पहुँचे तो आरोप है कि संध्या की हत्या की जा चुकी थी। उस समय संध्या गर्भवती थी और इस घटना में उसके अजन्मे बच्चे की भी मृत्यु हो गई।

घटना के पश्चात पुलिस ने प्रमोद यादव, उसकी माँ लीलावती देवी, देवर और ननद के विरुद्ध मामला दर्ज किया।

अदालत का फैसला

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (चतुर्थ) मानवेंद्र मिश्रा की अदालत ने सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयान और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद प्रमोद यादव को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और धारा 91 के अंतर्गत दोषी ठहराया। शेष आरोपों से उसे बरी कर दिया गया।

सहायक लोक अभियोजक मनु राव ने बताया, 'हत्या के समय पीड़िता गर्भवती थी। इस घटना में संध्या के साथ उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की भी जान चली गई। अदालत ने इस मामले में उसके पति प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को दोषी पाया है।' वहीं, पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण सास लीलावती देवी को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।

आगे की कार्यवाही

फिलहाल प्रमोद यादव न्यायिक हिरासत में है। अदालत ने 20 नवंबर 2026 को सजा की अवधि पर दलीलें सुनने की तारीख मुकर्रर की है, जिसके बाद सज़ा का निर्धारण किया जाएगा। BNS धारा 103(1) के तहत हत्या के लिए अधिकतम मृत्युदंड या आजीवन कारावास का प्रावधान है।

व्यापक परिप्रेक्ष्य

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आँकड़ों के अनुसार बिहार में दहेज हत्या के मामलों की संख्या लगातार चिंताजनक बनी हुई है। गौरतलब है कि नई भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दहेज-संबंधी अपराधों की सुनवाई अब पहले की तुलना में अधिक संरचित ढाँचे में हो रही है। 20 नवंबर को सुनाई जाने वाली सज़ा यह तय करेगी कि न्याय की यह प्रक्रिया पीड़ित परिवार को कितनी राहत दे पाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उतनी ही बड़ी कमज़ोरी भी उजागर करता है — देवर और ननद जैसे अन्य आरोपी अभी भी दायरे से बाहर हैं। ससुराल के अन्य सदस्यों पर मामला दर्ज होने के बावजूद केवल पति को दोषी ठहराया जाना यह सवाल उठाता है कि क्या साक्ष्य संग्रह की प्रक्रिया पर्याप्त थी। बिहार में दहेज हत्या के मामलों में दोषसिद्धि की दर राष्ट्रीय औसत से कम रही है, और ऐसे में यह निर्णय एक सकारात्मक संकेत है — परन्तु 20 नवंबर को सुनाई जाने वाली सज़ा की कठोरता ही तय करेगी कि यह फैसला वास्तव में निवारक बनता है या नहीं।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बगहा दहेज हत्या मामले में अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
बगहा की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने 6 नवंबर 2026 को प्रमोद यादव उर्फ भुट्टी यादव को उसकी गर्भवती पत्नी संध्या यादव की हत्या का दोषी करार दिया। सास लीलावती देवी को पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण बरी कर दिया गया।
प्रमोद यादव पर किन धाराओं के तहत मामला चला?
अदालत ने प्रमोद यादव को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) और धारा 91 के तहत दोषी ठहराया। शेष आरोपों से उसे बरी कर दिया गया।
संध्या यादव की हत्या कब और कैसे हुई?
11 सितंबर 2025 को सुबह लगभग चार बजे संध्या के मायके वालों को सूचना मिली कि उसकी तबीयत बिगड़ गई है। जब परिजन ससुराल पहुँचे तो आरोप है कि संध्या की हत्या हो चुकी थी। उस समय वह गर्भवती थी और इस घटना में उसके अजन्मे बच्चे की भी मृत्यु हो गई।
प्रमोद यादव को सज़ा कब मिलेगी?
अदालत ने सजा की अवधि पर दलीलें सुनने के लिए 20 नवंबर 2026 की तारीख तय की है। उसके बाद ही सज़ा का निर्धारण किया जाएगा। फिलहाल प्रमोद यादव न्यायिक हिरासत में है।
इस मामले में अन्य आरोपियों का क्या हुआ?
घटना के बाद प्रमोद यादव के अलावा उसकी माँ लीलावती देवी, देवर और ननद के खिलाफ भी मामला दर्ज कराया गया था। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में केवल सास लीलावती देवी को बरी किया; देवर और ननद के संबंध में स्रोत में अलग से जानकारी उपलब्ध नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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