मोहन गौड़ा पर बेंगलुरु में एफआईआर: हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने केस वापसी की मांग, कानूनी लड़ाई का ऐलान
सारांश
मुख्य बातें
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति के कर्नाटक राज्य संयोजक मोहन गौड़ा के खिलाफ बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को लेकर विवाद 7 अगस्त 2026 को और गहरा गया। संगठन ने पुलिस की इस कार्रवाई को लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार बताते हुए एफआईआर की तत्काल वापसी की माँग की है और न्यायालय में कानूनी लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया है।
एफआईआर की पृष्ठभूमि
व्हाइटफील्ड पुलिस स्टेशन में तैनात पुलिसकर्मी श्रीधर रेलेकर की रिपोर्ट के आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग के दौरान 1 अगस्त 2026 को मोहन गौड़ा द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो और संबंधित पोस्ट का संज्ञान लिया गया।
पुलिस का आरोप है कि उक्त वीडियो में कॉमेडियन कुणाल कामरा के प्रस्तावित कॉमेडी शो को लेकर पुलिस की कार्रवाई के संबंध में ऐसे दावे किए गए, जिनसे जनता में भ्रम उत्पन्न हो सकता था। पोस्ट में यह भी दावा किया गया था कि विरोध के बाद कार्यक्रम को व्हाइटफील्ड से कोरमंगला स्थानांतरित कर दिया गया। पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से भ्रामक जानकारी प्रसारित कर अफवाह फैलाने तथा किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से गलत सूचना देने का प्रयास किया गया — इसी आधार पर गैरजमानती धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
संगठन की दलीलें और माँगें
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति का कहना है कि किसी विवादास्पद कार्यक्रम को रद्द कराने के लिए पुलिस को शांतिपूर्वक ज्ञापन सौंपना और आपत्ति दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। संगठन के अनुसार, जनहित में पुलिस को याचिका देना या किसी कार्यक्रम के विरुद्ध लोकतांत्रिक ढंग से विरोध दर्ज कराना अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
समिति ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया पर व्यक्त राय को 'अफवाह' और 'गलत सूचना' बताकर गैरजमानती धाराओं में मामला दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अनावश्यक अंकुश है। संगठन ने यह भी कहा कि हिंदू देवी-देवताओं और हिंदू धर्म की धार्मिक भावनाओं का अपमान करने वाले कार्यक्रमों पर आपत्ति जताना पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया है।
समिति की प्रमुख माँगें इस प्रकार हैं: मोहन गौड़ा के विरुद्ध दर्ज एफआईआर तत्काल वापस ली जाए; अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए; शांतिपूर्वक अपनी बात रखने वाले नागरिकों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार बंद हो; तथा राज्य सरकार और पुलिस कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएँ।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर धार्मिक-सामाजिक समूहों और प्रशासन के बीच तनाव की घटनाएँ बढ़ी हैं। गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियों के आधार पर गैरजमानती धाराओं में एफआईआर दर्ज करने के मामले राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बने हुए हैं, और सर्वोच्च न्यायालय भी ऐसे मामलों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाओं पर विचार कर चुका है।
आगे क्या होगा
हिंदू राष्ट्र समन्वय समिति ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले में न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाएगी। मोहन गौड़ा के समर्थन में संगठन के सदस्यों ने एकजुटता प्रदर्शित करते हुए कहा है कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की है। पुलिस की ओर से अभी तक इस मामले में कोई अतिरिक्त बयान सामने नहीं आया है।