'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' से जन्म लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हुआ: मंत्री सावित्री ठाकुर
सारांश
मुख्य बातें
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने 31 जुलाई 2026 को लोकसभा में जानकारी दी कि केंद्र सरकार की 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' (BBBP) स्कीम देशभर में बच्चों के लिंगानुपात (Child Sex Ratio — CSR) को सुधारने में ठोस भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के हालिया आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth — SRB) 2014-15 में 918 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 929 हो गया है।
मुख्य घटनाक्रम
ठाकुर ने सदन को बताया कि BBBP स्कीम विभिन्न हितधारकों — सरकारी एजेंसियों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और आम जनता — को जानकारी देकर, प्रेरित करके और सशक्त बनाकर लड़कियों के प्रति सामाजिक सोच एवं व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। मंत्री के अनुसार, यह पहल अब महज एक सरकारी नीति नहीं रही, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है।
15वें वित्त आयोग की अवधि में 'मिशन शक्ति' के 'संबल' वर्टिकल के तहत BBBP का विस्तार देश के सभी जिलों में किया गया है। इसके अंतर्गत जमीनी स्तर पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियों पर खर्च बढ़ाने को प्राथमिकता दी जा रही है।
दिल्ली में सुधार के संकेत
मंत्री ने दिल्ली के विशेष आँकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश में जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 में 901 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 915 हो गया है — हालाँकि यह आँकड़ा अभी भी राष्ट्रीय औसत से नीचे है, जो इस क्षेत्र में और काम की आवश्यकता दर्शाता है।
लड़कियों के स्कूल नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि
शिक्षा के मोर्चे पर भी उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय के UDISE आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2025-26 में 83.4% हो गया है।
दिल्ली में यह आँकड़ा और भी प्रभावशाली है — माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का GER 2014-15 में 99.13% से बढ़कर 2025-26 में 108.3% पर पहुँच गया है। 100% से अधिक GER यह दर्शाता है कि तय आयु वर्ग से बाहर की लड़कियाँ भी माध्यमिक शिक्षा में दाखिला ले रही हैं।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में लड़कियों के प्रति भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या की समस्या दशकों से चिंता का विषय रही है। गौरतलब है कि 2011 की जनगणना में 0-6 आयु वर्ग का लिंगानुपात गिरकर 918 पर आ गया था, जिसने नीति-निर्माताओं को इस दिशा में ठोस कदम उठाने पर मजबूर किया। BBBP जैसी योजनाओं के दीर्घकालिक प्रभाव से महिला श्रम बल भागीदारी और सामाजिक समानता पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।
क्या होगा आगे
सरकार का इरादा BBBP को 'मिशन शक्ति' के तहत और मज़बूत करने का है, जिसमें जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाएगा। आँकड़ों में सुधार की यह प्रवृत्ति बनाए रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता अभियानों को निरंतर जारी रखना आवश्यक होगा।