1 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' से जन्म लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हुआ: मंत्री सावित्री ठाकुर

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' से जन्म लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 हुआ: मंत्री सावित्री ठाकुर

सारांश

'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' अब सिर्फ सरकारी योजना नहीं — आँकड़े बोलते हैं। जन्म लिंगानुपात 918 से 929 और लड़कियों का स्कूल नामांकन 75.51% से 83.4% पर पहुँचा। दिल्ली में GER 108.3% — यानी तय उम्र से बाहर की बच्चियाँ भी पढ़ रही हैं।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय जन्म लिंगानुपात (SRB) 2014-15 के 918 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 929 हुआ — HMIS आँकड़ों के अनुसार।
दिल्ली में SRB 901 से बढ़कर 915 हुआ, हालाँकि राष्ट्रीय औसत से अभी भी नीचे।
माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का राष्ट्रीय GER 75.51% (2014-15) से बढ़कर 83.4% (2025-26) हुआ — UDISE डेटा।
दिल्ली में लड़कियों का माध्यमिक GER 99.13% से बढ़कर 108.3% पर पहुँचा।
BBBP को 15वें वित्त आयोग की अवधि में 'मिशन शक्ति' के ' संबल ' वर्टिकल के तहत देश के सभी जिलों में विस्तारित किया गया।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने 31 जुलाई 2026 को लोकसभा में जानकारी दी कि केंद्र सरकार की 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' (BBBP) स्कीम देशभर में बच्चों के लिंगानुपात (Child Sex Ratio — CSR) को सुधारने में ठोस भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के हेल्थ मैनेजमेंट इंफॉर्मेशन सिस्टम (HMIS) के हालिया आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात (Sex Ratio at Birth — SRB) 2014-15 में 918 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 929 हो गया है।

मुख्य घटनाक्रम

ठाकुर ने सदन को बताया कि BBBP स्कीम विभिन्न हितधारकों — सरकारी एजेंसियों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और आम जनता — को जानकारी देकर, प्रेरित करके और सशक्त बनाकर लड़कियों के प्रति सामाजिक सोच एवं व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। मंत्री के अनुसार, यह पहल अब महज एक सरकारी नीति नहीं रही, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुकी है।

15वें वित्त आयोग की अवधि में 'मिशन शक्ति' के 'संबल' वर्टिकल के तहत BBBP का विस्तार देश के सभी जिलों में किया गया है। इसके अंतर्गत जमीनी स्तर पर प्रभाव डालने वाली गतिविधियों पर खर्च बढ़ाने को प्राथमिकता दी जा रही है।

दिल्ली में सुधार के संकेत

मंत्री ने दिल्ली के विशेष आँकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश में जन्म के समय लिंगानुपात 2014-15 में 901 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 915 हो गया है — हालाँकि यह आँकड़ा अभी भी राष्ट्रीय औसत से नीचे है, जो इस क्षेत्र में और काम की आवश्यकता दर्शाता है।

लड़कियों के स्कूल नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि

शिक्षा के मोर्चे पर भी उत्साहजनक तस्वीर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय के UDISE आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2025-26 में 83.4% हो गया है।

दिल्ली में यह आँकड़ा और भी प्रभावशाली है — माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का GER 2014-15 में 99.13% से बढ़कर 2025-26 में 108.3% पर पहुँच गया है। 100% से अधिक GER यह दर्शाता है कि तय आयु वर्ग से बाहर की लड़कियाँ भी माध्यमिक शिक्षा में दाखिला ले रही हैं।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारत में लड़कियों के प्रति भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या की समस्या दशकों से चिंता का विषय रही है। गौरतलब है कि 2011 की जनगणना में 0-6 आयु वर्ग का लिंगानुपात गिरकर 918 पर आ गया था, जिसने नीति-निर्माताओं को इस दिशा में ठोस कदम उठाने पर मजबूर किया। BBBP जैसी योजनाओं के दीर्घकालिक प्रभाव से महिला श्रम बल भागीदारी और सामाजिक समानता पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है।

क्या होगा आगे

सरकार का इरादा BBBP को 'मिशन शक्ति' के तहत और मज़बूत करने का है, जिसमें जिला स्तर पर निगरानी तंत्र को और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया जाएगा। आँकड़ों में सुधार की यह प्रवृत्ति बनाए रखने के लिए सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता अभियानों को निरंतर जारी रखना आवश्यक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 929 का आँकड़ा अभी भी प्रति 1,000 लड़कों पर 1,000 लड़कियों के आदर्श से काफी दूर है। दिल्ली जैसे शहरी और शिक्षित केंद्र शासित प्रदेश में SRB का 915 पर रहना यह सवाल उठाता है कि क्या यह सुधार केवल जागरूकता से आया है या कानूनी प्रवर्तन की भी भूमिका है — और क्या ग्रामीण-शहरी अंतर पाटा जा रहा है। GER का 108.3% होना प्रभावशाली दिखता है, पर यह ड्रॉपआउट और ओवर-एज नामांकन की जटिलता भी छुपाता है। असली कसौटी यह है कि क्या ये लड़कियाँ माध्यमिक के बाद उच्च शिक्षा और रोज़गार तक पहुँच पा रही हैं।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' स्कीम से लिंगानुपात में कितना सुधार हुआ है?
HMIS आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय जन्म लिंगानुपात 2014-15 में 918 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 929 हो गया है। यह 11 अंकों का सुधार दर्शाता है कि स्कीम का सकारात्मक असर हो रहा है।
दिल्ली में 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' का क्या असर हुआ है?
दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश में जन्म लिंगानुपात 2014-15 के 901 से बढ़कर 2025-26 (अनंतिम) में 915 हो गया है। माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का GER भी 99.13% से बढ़कर 108.3% पर पहुँच गया है।
देशभर में लड़कियों के स्कूल नामांकन में क्या बदलाव आया है?
शिक्षा मंत्रालय के UDISE आँकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर माध्यमिक विद्यालयों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात (GER) 2014-15 में 75.51% से बढ़कर 2025-26 में 83.4% हो गया है। यह करीब 8 प्रतिशत अंकों की वृद्धि है।
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' स्कीम अब किन जिलों में लागू है?
15वें वित्त आयोग की अवधि में 'मिशन शक्ति' के 'संबल' वर्टिकल के तहत BBBP का विस्तार देश के सभी जिलों में किया जा चुका है। पहले यह स्कीम केवल चुनिंदा जिलों तक सीमित थी।
BBBP स्कीम किस तरह काम करती है?
यह स्कीम सरकारी एजेंसियों, मीडिया, सिविल सोसाइटी और आम जनता को एकजुट कर लड़कियों के प्रति सामाजिक सोच और व्यवहार में बदलाव लाने का प्रयास करती है। इसमें जागरूकता अभियान, जमीनी गतिविधियाँ और बहु-हितधारक भागीदारी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 4 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 6 महीने पहले
  8. 1 साल पहले