जयशंकर ने पारामारिबो में कहा: भारत-सूरीनाम राजनयिक संबंधों के 50 साल, रिश्तों को नई ऊंचाई देने का वक्त

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जयशंकर ने पारामारिबो में कहा: भारत-सूरीनाम राजनयिक संबंधों के 50 साल, रिश्तों को नई ऊंचाई देने का वक्त

सारांश

50 साल के राजनयिक रिश्तों की सालगिरह पर जयशंकर का पारामारिबो दौरा महज एक औपचारिकता नहीं था — यह भारत की कैरेबियन नीति में एक ठोस कदम था। नई क्रेडिट लाइन, रक्षा प्रशिक्षण और एआई सहयोग के प्रस्ताव के साथ, भारत ने ग्लोबल साउथ में अपनी उपस्थिति को और गहरा करने का संकेत दिया।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 7 मई 2025 को पारामारिबो में 9वीं भारत-सूरीनाम संयुक्त आयोग बैठक में भाग लिया।
इस वर्ष भारत और सूरीनाम के बीच राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं।
भारत ने सूरीनाम की प्राथमिकता वाली परियोजनाओं के लिए नई क्रेडिट लाइन देने की तत्परता जताई।
रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में सूरीनाम की सेना व पुलिस को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में सहयोग का प्रस्ताव।
भारत का लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र से वार्षिक व्यापार 40 से 45 अरब डॉलर के करीब।
एआई इम्पैक्ट समिट में सूरीनाम की मंत्री स्तरीय भागीदारी के बाद डिजिटल और AI सहयोग बढ़ाने पर सहमति।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 7 मई 2025 को पारामारिबो में 9वीं भारत-सूरीनाम संयुक्त आयोग बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच इस वर्ष राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं और यह सही समय है कि द्विपक्षीय सहयोग को और गहरा एवं व्यापक बनाया जाए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह सूरीनाम की उनकी पहली यात्रा है और इस दौरे का मुख्य उद्देश्य केवल मौजूदा अच्छे माहौल को बनाए रखना नहीं, बल्कि सहयोग के हर क्षेत्र में नई ऊर्जा भरना है।

संयुक्त आयोग बैठक में क्या हुआ

जयशंकर ने सूरीनाम के मंत्री मेल्विन बौवा के साथ हुई बातचीत को उत्पादक बताया। उन्होंने कहा कि जॉइंट कमीशन की चर्चाओं ने दोनों देशों के रिश्तों की व्यापक समीक्षा का अवसर दिया। बैठक में उच्च स्तरीय दौरों, व्यापार एवं निवेश, विकास साझेदारी, रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक एवं जन-संपर्क जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसके अलावा कुछ वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे।

विकास साझेदारी और नई क्रेडिट लाइन

जयशंकर ने बताया कि भारत पहले ही सूरीनाम में ट्रांसमिशन लाइनें लगाने, पानी पंपिंग स्टेशनों के नवीनीकरण, स्टील रोलिंग मिल स्थापित करने और हाइड्रोलिक एक्सकेवेटर उपलब्ध कराने जैसे कार्यों में सहयोग कर चुका है। उन्होंने घोषणा की कि सूरीनाम सरकार जिन परियोजनाओं को आवश्यक समझेगी, उनके लिए भारत नई क्रेडिट लाइन देने को तैयार है। इसके साथ ही भारत-कैरिकॉम ग्रांट पहल के तहत निर्मित पेंशन फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट अब हस्तांतरण के लिए तैयार है।

रक्षा और सुरक्षा सहयोग

विदेश मंत्री ने कहा कि रक्षा एवं सुरक्षा क्षेत्र में भारत पहले हेलीकॉप्टर, फायर टेंडर और यूनिफॉर्म की आपूर्ति कर चुका है। अब भारत सूरीनाम की सेना और पुलिस की भविष्य की जरूरतों, विशेष रूप से प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में, सहयोग देने के लिए तत्पर है।

व्यापार, डिजिटल तकनीक और एआई

जयशंकर ने बताया कि भारत का लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के साथ वार्षिक व्यापार 40 से 45 अरब डॉलर के आसपास है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे उत्पादों का बड़ा उत्पादक है जो तेजी से बढ़ते मध्यम वर्ग वाले बाजारों के लिए उपयुक्त हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में हुए एआई इम्पैक्ट समिट में सूरीनाम ने मंत्री स्तर पर भागीदारी की थी और इस विषय पर आपसी सहयोग बढ़ाने में भारत की गहरी रुचि है। गौरतलब है कि दोनों देश ग्लोबल साउथ के प्रति समान प्रतिबद्धता रखते हैं, जो इस साझेदारी को और सहज बनाता है।

आगे की राह

विदेश मंत्री जयशंकर ने संकेत दिया कि इस दौरे के दौरान वैश्विक और बहुपक्षीय मुद्दों पर भी आगे चर्चा होगी। 'हेरिटेज मंथ' जैसी सांस्कृतिक पहलों में भारत की भागीदारी को लेकर उन्होंने उत्साह व्यक्त किया। दोनों देशों के बीच साझा इतिहास और लोगों के बीच गहरे जुड़ाव को इस साझेदारी की असली नींव बताते हुए जयशंकर ने कहा कि आने वाले वर्षों में यह रिश्ता और अधिक मजबूत होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या ये घोषणाएं समयबद्ध परियोजनाओं में बदलती हैं। भारत-सूरीनाम व्यापार अभी भी उस क्षमता से कहीं नीचे है जो दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को देखते हुए संभव है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर की सूरीनाम यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
जयशंकर 9वीं भारत-सूरीनाम संयुक्त आयोग बैठक में भाग लेने पारामारिबो गए थे, जहाँ द्विपक्षीय सहयोग को व्यापार, रक्षा, विकास और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में गहरा करने पर चर्चा हुई। यह उनकी सूरीनाम की पहली यात्रा भी थी।
भारत और सूरीनाम के राजनयिक संबंध कितने पुराने हैं?
भारत और सूरीनाम के बीच इस वर्ष 2025 में राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे हो रहे हैं। दोनों देशों के बीच लोगों के स्तर पर भी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव रहा है।
भारत सूरीनाम को नई क्रेडिट लाइन क्यों दे रहा है?
जयशंकर के अनुसार, भारत सूरीनाम सरकार द्वारा आवश्यक समझी जाने वाली परियोजनाओं के लिए नई क्रेडिट लाइन देने को तैयार है। इससे पहले भारत ट्रांसमिशन लाइनें, पानी पंपिंग स्टेशन और स्टील रोलिंग मिल जैसी परियोजनाओं में सहयोग कर चुका है।
भारत-सूरीनाम रक्षा सहयोग में क्या शामिल है?
भारत पहले सूरीनाम को हेलीकॉप्टर, फायर टेंडर और यूनिफॉर्म की आपूर्ति कर चुका है। अब भारत सूरीनाम की सेना और पुलिस को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग देने का प्रस्ताव रखा है।
भारत का लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र से व्यापार कितना है?
जयशंकर ने बताया कि भारत का लैटिन अमेरिका और कैरेबियन क्षेत्र के साथ वार्षिक व्यापार 40 से 45 अरब डॉलर के आसपास है। भारत इस क्षेत्र में मध्यम वर्ग के बढ़ते बाजारों के लिए उपयुक्त उत्पादों का बड़ा उत्पादक है।
राष्ट्र प्रेस
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