3 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

तस्लीमा नसरीन के बयान पर दिलीप घोष का तीखा जवाब: 'भारत का बंटवारा नहीं होना चाहिए था'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
तस्लीमा नसरीन के बयान पर दिलीप घोष का तीखा जवाब: 'भारत का बंटवारा नहीं होना चाहिए था'

सारांश

दो दशक बाद कोलकाता लौटीं तस्लीमा नसरीन के भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दिए बयान ने BJP मंत्री दिलीप घोष को मुखर कर दिया। घोष ने कहा कि 1947 का बंटवारा एक ऐतिहासिक भूल थी जिसका खामियाजा आज भी तीनों देश भुगत रहे हैं — और यह टिप्पणी पश्चिम बंगाल की गरमाती राजनीति में एक नई बहस छेड़ती है।

मुख्य बातें

दिलीप घोष ने 3 अगस्त 2026 को कहा कि भारत का बंटवारा नहीं होना चाहिए था और इसका नुकसान तीनों देश आज भी उठा रहे हैं।
बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों बाद कोलकाता लौटी हैं और उन्होंने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को लेकर सकारात्मक बयान दिया।
नसरीन ने 1971 की मुक्ति संग्राम में भारत की भूमिका को ऐतिहासिक बताया और 'पाकिस्तानी जिहादी तत्वों' की आलोचना की।
घोष ने सांसद पप्पू यादव के भगवा वस्त्र पहनने को भगवान राम का अपमान बताया और कानूनी कार्रवाई का उल्लेख किया।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'प्लान बी' बयान पर घोष ने कहा — 'अगर पार्टी ही नहीं रहेगी तो किसी प्लान का क्या फायदा?'

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता और पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने 3 अगस्त 2026 को बांग्लादेशी लेखिका व सामाजिक कार्यकर्ता तस्लीमा नसरीन के भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दिए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत का बंटवारा कभी नहीं होना चाहिए था। घोष ने यह भी जोड़ा कि उस दौर के राजनीतिक फैसलों का खामियाजा आज भी तीनों देशों की जनता भुगत रही है। उल्लेखनीय है कि नसरीन लगभग दो दशकों के बाद कोलकाता लौटी हैं।

तस्लीमा नसरीन ने क्या कहा था

बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने रविवार को भारत-बांग्लादेश के द्विपक्षीय संबंधों पर बोलते हुए उम्मीद जताई कि दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते भविष्य में भी मजबूत बने रहेंगे। उन्होंने 1971 की मुक्ति संग्राम का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने उस संघर्ष में निर्णायक भूमिका निभाई थी — शरणार्थियों को आश्रय दिया, हथियार मुहैया कराए और अंततः सीधे सैन्य हस्तक्षेप कर बांग्लादेश की आजादी सुनिश्चित की। नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश की जनता आज भी इस सहयोग को नहीं भूलती, हालाँकि कुछ 'पाकिस्तानी जिहादी तत्व' भारत के विरुद्ध जहर फैलाते रहते हैं।

दिलीप घोष की प्रतिक्रिया

मंत्री दिलीप घोष ने नसरीन के बयान पर अपनी राय रखते हुए कहा, 'हम भी यही चाहते हैं कि भारत का बंटवारा कभी न हुआ होता, क्योंकि इससे किसी को कोई फायदा नहीं हुआ। आज तीनों देशों की हजारों किलोमीटर लंबी सीमाओं की सुरक्षा पर हजारों करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। क्यों? क्योंकि बार-बार झगड़े होते रहते हैं। इन देशों के आपस में लड़ने से जो नुकसान हुआ है, वैसा दुनिया में कहीं और नहीं देखा गया। इसलिए, हम आज भी उन फैसलों का नतीजा भुगत रहे हैं जो उस समय लोगों ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए लिए थे।'

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और पप्पू यादव पर घोष का बयान

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव द्वारा भगवा वस्त्र पहनने पर मंत्री घोष ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'उन्होंने रामायण और भगवान राम का अपमान किया है। समाज ऐसे कामों को स्वीकार या मंजूर नहीं करेगा। जहाँ तक कानून की बात है, तो कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।'

ममता बनर्जी के 'प्लान बी' पर कटाक्ष

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'प्लान बी' वाले बयान पर मंत्री घोष ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'कौन सा प्लान ए, कौन सा प्लान बी, कौन सा प्लान सी... बस इंतजार कीजिए और देखिए कि प्लान क्या है। अगर पार्टी ही नहीं रहेगी, तो किसी प्लान का क्या फायदा?' यह टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस (TMC) की आंतरिक स्थिति को लेकर BJP की बढ़ती आक्रामकता का संकेत देती है। यह ऐसे समय में आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव अपने चरम पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी राजनीतिक टाइमिंग पर ध्यान देना ज़रूरी है — यह ऐसे वक्त में आई है जब पश्चिम बंगाल में BJP और TMC के बीच तनाव तेज है और बांग्लादेश में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत-बांग्लादेश संबंध संवेदनशील दौर में हैं। '1947 की भूल' वाला आख्यान BJP की व्यापक सांस्कृतिक-राष्ट्रवादी राजनीति से मेल खाता है, लेकिन यह एक ऐसी बहस को हवा देता है जिसके कूटनीतिक निहितार्थ जटिल हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस बयान को महज एक प्रतिक्रिया के रूप में देख रही है — जबकि असली सवाल यह है कि क्या इस तरह की ऐतिहासिक पुनर्व्याख्या पड़ोसी देशों के साथ भारत के व्यावहारिक संबंधों को और जटिल बना सकती है।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिलीप घोष ने 'भारत का बंटवारा नहीं होना चाहिए था' क्यों कहा?
BJP मंत्री दिलीप घोष ने यह बयान तस्लीमा नसरीन के भारत-बांग्लादेश संबंधों पर दिए वक्तव्य के जवाब में दिया। उनका तर्क था कि 1947 के बंटवारे से किसी को फायदा नहीं हुआ और आज तीनों देश सीमा सुरक्षा पर हजारों करोड़ रुपये खर्च कर रहे हैं।
तस्लीमा नसरीन ने भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर क्या कहा?
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है दोनों देशों के रिश्ते आगे भी अच्छे रहेंगे। उन्होंने 1971 की मुक्ति संग्राम में भारत की निर्णायक भूमिका की सराहना की और कहा कि बांग्लादेश की जनता उस सहयोग को आज भी याद करती है।
तस्लीमा नसरीन कोलकाता कब और क्यों लौटीं?
तस्लीमा नसरीन लगभग दो दशकों के बाद कोलकाता लौटी हैं। वे बांग्लादेशी मूल की लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता हैं जो अपने विवादास्पद लेखन के कारण वर्षों से निर्वासन में रही हैं।
पप्पू यादव और राम मंदिर विवाद पर दिलीप घोष ने क्या कहा?
दिलीप घोष ने पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव द्वारा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के विरोध प्रदर्शन में भगवा वस्त्र पहनने को 'भगवान राम और रामायण का अपमान' बताया। उन्होंने कहा कि समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा और कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है।
ममता बनर्जी के 'प्लान बी' बयान पर BJP की क्या प्रतिक्रिया है?
दिलीप घोष ने ममता बनर्जी के 'प्लान बी' बयान पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अगर पार्टी ही नहीं रहेगी तो किसी प्लान का कोई मतलब नहीं। यह टिप्पणी BJP की ओर से TMC की राजनीतिक स्थिति पर सीधा हमला मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 15 घंटे पहले
  2. 16 घंटे पहले
  3. 22 घंटे पहले
  4. कल
  5. कल
  6. 2 दिन पहले
  7. 2 सप्ताह पहले
  8. 10 महीने पहले