भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की 144वीं जयंती पर राजनाथ सिंह, गडकरी समेत दिग्गज नेताओं ने किया नमन
सारांश
मुख्य बातें
भारत रत्न राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन की 144वीं जयंती पर 1 अगस्त 2026 को देशभर के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में 1 अगस्त 1882 को जन्मे टंडन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी, हिंदी के प्रबल पक्षधर और संविधान सभा के सदस्य थे। रक्षा मंत्री से लेकर मुख्यमंत्रियों तक, एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर श्रद्धा-संदेशों की झड़ी लग गई।
रक्षा मंत्री और केंद्रीय मंत्रियों की श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक्स पर लिखा, 'राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न आंदोलनों में अग्रणी भूमिका निभाई। अपने ओजस्वी लेखन से उन्होंने समाज को जागरूक करने और राष्ट्रीय चेतना का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। हिंदी भाषा के प्रति उनकी अटूट निष्ठा तथा उसके संवर्धन में उनका योगदान अविस्मरणीय है।' उन्होंने आगे कहा कि टंडन का सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत बने रहेंगे।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी एक्स पर लिखते हुए उन्हें 'महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक' बताते हुए विनम्र अभिवादन किया।
लोकसभा अध्यक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष के संदेश
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक्स पर कहा कि स्वतंत्रता सेनानी एवं संविधान सभा के सदस्य के रूप में टंडन का योगदान अविस्मरणीय है। उन्होंने लिखा, 'संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया में 'राजर्षि' श्री टंडन की सक्रिय भूमिका, राष्ट्रीय एकता के प्रति उनकी अटूट आस्था और भारतीय मूल्यों के संरक्षण का उनका संकल्प आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है।'
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर लिखा, 'भारत रत्न से सम्मानित, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष एवं प्रखर राष्ट्रनायक राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन जी की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धापूर्वक नमन।' गौरतलब है कि टंडन कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे थे, जो उनकी सर्वदलीय स्वीकार्यता को रेखांकित करता है।
राज्यों के मुख्यमंत्रियों की श्रद्धा
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने एक्स पर लिखा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा के रूप में प्रतिष्ठित कराने के उनके अथक प्रयास और राष्ट्रसेवा के प्रति आजीवन समर्पण सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। उन्होंने टंडन को 'महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, ओजस्वी वक्ता, कर्मठ पत्रकार और संविधान सभा के सदस्य' के रूप में याद किया।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने उन्हें 'हिंदी के अनन्य सेवक' बताते हुए कहा कि उनके आदर्श राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के लिए मार्गदर्शन करते रहेंगे। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें 'हिंदी भाषा के प्रखर संवाहक' कहते हुए किसान हित और सामाजिक समरसता के प्रति उनके समर्पण का उल्लेख किया।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि हिंदी भाषा के संरक्षण, राष्ट्रीय एकता और स्वदेशी मूल्यों के प्रति उनका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा। मध्य प्रदेश के पीडब्ल्यूडी मंत्री राकेश सिंह ने भी एक्स पर उन्हें 'हिंदी के अनन्य सेवक एवं प्रख्यात स्वतंत्रता सेनानी' बताते हुए शत्-शत् नमन किया।
राजर्षि टंडन: एक परिचय
यह ऐसे समय में आया है जब हिंदी भाषा और राष्ट्रीय पहचान को लेकर देश में व्यापक विमर्श जारी है। 1 अगस्त 1882 को प्रयागराज में जन्मे टंडन ने स्वतंत्रता आंदोलन, हिंदी के प्रचार-प्रसार और संविधान निर्माण में अतुलनीय भूमिका निभाई। उन्हें 1961 में देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी विरासत आज भी राजनीतिक दलों की सीमाओं से परे सभी को एकजुट करती है, जैसा कि इस वर्ष की जयंती पर मिली सर्वदलीय श्रद्धांजलि से स्पष्ट होता है।
आगे क्या
टंडन की जयंती पर देशभर में विभिन्न सांस्कृतिक और साहित्यिक कार्यक्रमों के आयोजन की परंपरा रही है। उनके जन्मस्थान प्रयागराज में भी इस अवसर पर श्रद्धांजलि सभाएँ आयोजित की जाती हैं। उनके विचार और आदर्श हिंदी भाषा आंदोलन तथा राष्ट्रीय एकता की चर्चाओं में आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।