भोजशाला में उच्च न्यायालय के फैसले के बाद पहले मंगलवार को हवन-पूजन, अब 365 दिन पूजा का अधिकार
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार की भोजशाला में पहले मंगलवार को हवन-पूजन और महाआरती का भव्य आयोजन हुआ। 19 मई को हुए इस अनुष्ठान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने मां वाग्देवी की विधिवत पूजा-अर्चना की। यह आयोजन उस दीर्घकालिक सत्याग्रह की परिणति के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें भक्तों ने वर्षों तक प्रतिदिन पूजा के अधिकार की माँग की थी।
मुख्य घटनाक्रम
भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि भोजशाला में साप्ताहिक सत्याग्रह और अनुष्ठानों के ज़रिए भक्तों को मां वाग्देवी की साल भर पूजा करने का अधिकार बहाल हुआ है। उन्होंने कहा, 'भोजशाला एक तरह से कैद थी, क्योंकि सिर्फ हर मंगलवार को पूजा का अधिकार था। हमारी मांग थी कि 365 दिन हमें पूजा का अधिकार मिले।'
पांडे ने आगे कहा कि हर मंगलवार को सत्याग्रह के पूर्ण होने की उम्मीद लेकर श्रद्धालु यहाँ आते थे और मां के स्थान पर हवन-पूजन करते थे। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब भोजशाला में 365 दिन पूजा का अधिकार मिल गया है।
लंदन से प्रतिमा वापसी की तैयारी
विश्वास पांडे ने यह भी बताया कि दिल्ली से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं — मां वाग्देवी की प्रतिमा को लंदन से वापस लाने की सारी तैयारियाँ की जा रही हैं। उन्होंने कहा, 'जल्द ही मां के उसी स्थान पर विराजित होने को लेकर हमें खुशी हो रही है। हमारा सत्याग्रह उसी दिन पूर्ण होगा।'
गौरतलब है कि मां वाग्देवी की मूर्ति वर्तमान में लंदन के एक संग्रहालय में है और उसकी वापसी लंबे समय से भक्तों की प्रमुख माँगों में शामिल रही है।
भक्तों की प्रतिक्रिया
मां वाग्देवी की भक्त गायत्री पुरोहित ने उच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि 'यह उत्सव हर एक सनातनी का है। इस उत्सव को लेकर सभी काफी खुश हैं।' उन्होंने मां वाग्देवी से प्रार्थना की कि वे शीघ्र कृपा करें और भोजशाला में विराजमान हों।
पुरोहित ने यह भी कहा कि वे देश के सभी युवाओं की आस्था का प्रतिनिधित्व करने के लिए इस सत्याग्रह में उपस्थित थीं। उन्होंने विश्वास जताया कि लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा अवश्य वापस आएगी और जल्द ही वे इस मंदिर में विराजमान होंगी।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भोजशाला को लेकर दशकों पुराना विवाद न्यायिक प्रक्रिया से गुज़रा है। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद अब भक्तों को प्रतिदिन पूजा का कानूनी अधिकार मिल गया है। समिति के अनुसार, सत्याग्रह का अंतिम लक्ष्य — लंदन से मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी — अभी भी प्रतीक्षित है, और उस दिशा में प्रयास जारी हैं।