भोजशाला फैसला: भाजपा ने बताया ऐतिहासिक, मुस्लिम संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

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भोजशाला फैसला: भाजपा ने बताया ऐतिहासिक, मुस्लिम संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट जाने का किया ऐलान

सारांश

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का भोजशाला फैसला देश को दो हिस्सों में बाँट गया — भाजपा इसे सनातन संस्कृति की जीत बता रही है, तो AIMPLB और मुस्लिम जमात इसे तथ्यों के विरुद्ध करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाने को तैयार हैं।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किया।
भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने फैसले को 'ऐतिहासिक' बताया और सभी पक्षों से इसे स्वीकार करने की अपील की।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने फैसले को ऐतिहासिक तथ्यों और ASI के पूर्व रुख के विरुद्ध बताते हुए खारिज किया।
कमाल मौला मस्जिद कमेटी इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी; AIMPLB ने पूर्ण कानूनी सहयोग का वादा किया।
यह विवाद 2003 से चला आ रहा है; 2024 में ASI सर्वेक्षण के आधार पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया था।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किए जाने के फैसले ने देशभर में राजनीतिक और धार्मिक बहस छेड़ दी है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस निर्णय का खुलकर स्वागत किया है, जबकि प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने इसे सिरे से नकारते हुए सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की है।

भाजपा की प्रतिक्रिया

भाजपा सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इस फैसले को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, 'यह एक ऐतिहासिक फैसला है। लंबे समय से चला आ रहा विवादित मुद्दा अब न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से सामने आ गया है। न्याय की निरंतरता और प्रगति का पूरे देश पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।' पार्टी का कहना है कि यह निर्णय वर्षों की ऐतिहासिक और पुरातात्विक जाँच पर आधारित है और सभी पक्षों को इसे स्वीकार करना चाहिए। भाजपा इस फैसले को सनातन संस्कृति की जीत बता रही है।

मुस्लिम संगठनों का विरोध

बरेली स्थित ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उनके अनुसार, 'मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का यह फैसला मुस्लिम पक्ष के लिए बड़ा झटका है। मुस्लिम समुदाय इस निर्णय से बेहद असंतुष्ट है।'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने भी हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया। बोर्ड का कहना है कि यह निर्णय ऐतिहासिक तथ्यों, सरकारी अभिलेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पूर्व रुख के विपरीत है। AIMPLB ने स्पष्ट किया कि कमाल मौला मस्जिद कमेटी इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी और बोर्ड हर संभव कानूनी सहयोग प्रदान करेगा।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद 2003 से लगातार चला आ रहा है। 2024 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने ASI सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर यह फैसला सुनाया था, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच कानूनी और सामाजिक बहस तेज हो गई। गौरतलब है कि भोजशाला परिसर धार जिले में स्थित है और दशकों से हिंदू व मुस्लिम दोनों समुदायों के लिए धार्मिक महत्व का केंद्र रहा है। मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि यह परिसर लंबे समय से मस्जिद के रूप में उपयोग होता रहा है और अदालत का फैसला तथ्यों के अनुरूप नहीं है।

देशभर में राजनीतिक चर्चा

फैसले के बाद उत्तर प्रदेश समेत देश के अनेक हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई है। जहाँ सत्तारूढ़ भाजपा इसे न्यायिक प्रक्रिया की सफलता बता रही है, वहीं मुस्लिम संगठन इसे धार्मिक स्थलों पर अनुचित हस्तक्षेप करार दे रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में धार्मिक स्थलों से जुड़े कई मामले अदालतों में विचाराधीन हैं।

आगे क्या होगा

कमाल मौला मस्जिद कमेटी के सर्वोच्च न्यायालय जाने की घोषणा के बाद यह मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुँचने की ओर अग्रसर है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय में इस याचिका की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी राजनीतिक प्रतिध्वनि यह बताती है कि धार्मिक स्थलों के विवाद अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि चुनावी आख्यान के औज़ार भी बन चुके हैं। ASI सर्वेक्षण पर आधारित यह फैसला तथ्य-आधारित न्याय का दावा करता है, पर AIMPLB का यह आरोप कि निर्णय पुरातात्विक साक्ष्यों के विपरीत है — इस दावे को सर्वोच्च न्यायालय में कठिन परीक्षा से गुज़रना होगा। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि इस तरह के फैसलों के बाद सामाजिक सौहार्द पर दीर्घकालिक असर का कोई आकलन सामने नहीं आता।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद क्या है?
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक परिसर है, जिसे हिंदू पक्ष सरस्वती मंदिर और मुस्लिम पक्ष कमाल मौला मस्जिद के रूप में दावा करता है। यह विवाद 2003 से अदालतों में चल रहा है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला पर क्या फैसला सुनाया?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 2024 में ASI सर्वेक्षण के निष्कर्षों के आधार पर भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर को सरस्वती मंदिर घोषित किया। इस फैसले ने दोनों पक्षों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की।
AIMPLB ने भोजशाला फैसले को क्यों खारिज किया?
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि यह फैसला ऐतिहासिक तथ्यों, सरकारी अभिलेखों, पुरातात्विक साक्ष्यों और ASI के पूर्व रुख के विपरीत है। बोर्ड ने कमाल मौला मस्जिद कमेटी को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने में पूरी कानूनी मदद देने का वादा किया है।
भोजशाला मामला अब सुप्रीम कोर्ट में कब जाएगा?
AIMPLB और कमाल मौला मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट के फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देने का ऐलान किया है। याचिका दाखिल होने की सटीक तारीख अभी सामने नहीं आई है।
भाजपा ने भोजशाला फैसले पर क्या कहा?
भाजपा सांसद और पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने इसे 'ऐतिहासिक फैसला' बताया और कहा कि यह वर्षों की न्यायिक प्रक्रिया का परिणाम है। पार्टी ने सभी पक्षों से फैसले को स्वीकार करने की अपील की और इसे सनातन संस्कृति की जीत करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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