भोपाल गैस पीड़ितों का आरोप: बीएमएचआरसी ने सभी 8 मिनी यूनिटों में पैथोलॉजी सेवाएं बंद कीं, एक्स-रे पर भी खतरा
सारांश
मुख्य बातें
भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) पर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के साथ काम करने वाले चार संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं — अस्पताल ने कथित तौर पर अपनी सभी आठ मिनी इकाइयों में पैथोलॉजी सेवाएं एकतरफा बंद कर दी हैं और अब एक्स-रे सुविधाओं को भी समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 6 अगस्त को यह आरोप सामने आए, जिससे दशकों पुरानी औद्योगिक आपदा के पीड़ितों की स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच एक बार फिर सवालों के घेरे में है।
मुख्य घटनाक्रम
संगठनों के अनुसार, मिनी इकाइयों की पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं के उपकरण और कर्मचारी दोनों को मुख्य बीएमएचआरसी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप उपवास और भोजन के बाद रक्त शर्करा जैसे परीक्षणों की रिपोर्ट, जो पहले एक ही दिन में मिल जाती थी, अब 48 घंटे तक का समय ले रही है।
इसके अलावा, मिनी यूनिट 1, 3, 5 और 8 ने एक्स-रे फिल्म्स स्वीकार करना बंद कर दिया है, जिससे मरीजों को जांच के लिए मुख्य अस्पताल तक जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। आरोप यह भी है कि मिनी यूनिट में एकमात्र नर्स की अनुपलब्धता पर मरीजों को बिना उपचार के वापस भेज दिया जाता है। गौरतलब है कि इन सेवाओं को बंद करने के लिए अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।
पीड़ित संगठनों की आपत्ति
भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) की रचना ढिंगरा ने कहा, 'गैस त्रासदी से पीड़ितों के इलाकों के करीब स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ये मिनी यूनिट स्थापित की गई थीं। प्रबंधन इन्हें मजबूत करने के बजाय व्यवस्थित रूप से आवश्यक सेवाओं को खत्म कर रहा है।'
ढिंगरा ने यह भी आरोप लगाया कि 'प्रबंधन निर्बाध रोगी देखभाल की बजाय नए उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देता प्रतीत होता है। वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना कार्यात्मक सेवाओं को निलंबित करना उन उद्देश्यों को ही विफल कर देता है, जिनके लिए इन मिनी इकाइयों की स्थापना की गई थी।'
सरकार और संस्थाओं को पत्र
चारों संगठनों ने 5 अगस्त को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, बीएमएचआरसी की निदेशक मनीषा श्रीवास्तव और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को भी पत्र भेजे गए हैं, जिनमें पैथोलॉजी और एक्स-रे सेवाओं की तत्काल बहाली की माँग की गई है।
यह ऐसे समय में आया है जब बीएमएचआरसी की जवाबदेही पहले से ही न्यायिक निगरानी में है। पत्र में मुख्य अस्पताल को मौखिक रूप से भेजे गए मरीजों के लिए लिखित आदेशों और रिकॉर्ड के अभाव पर भी सवाल उठाए गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका
बीजीआईए ने स्पष्ट किया है कि वह 11 अगस्त को निर्धारित अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेगी। संगठन का आरोप है कि सेवाओं में यह कटौती भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुफ्त और उचित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। बीएमएचआरसी की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।