6 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भोपाल गैस पीड़ितों का आरोप: बीएमएचआरसी ने सभी 8 मिनी यूनिटों में पैथोलॉजी सेवाएं बंद कीं, एक्स-रे पर भी खतरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भोपाल गैस पीड़ितों का आरोप: बीएमएचआरसी ने सभी 8 मिनी यूनिटों में पैथोलॉजी सेवाएं बंद कीं, एक्स-रे पर भी खतरा

सारांश

भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों की स्वास्थ्य सेवा एक बार फिर संकट में है। बीएमएचआरसी पर आरोप है कि उसने सभी आठ मिनी यूनिटों में पैथोलॉजी सेवाएं खामोशी से बंद कर दीं — बिना किसी लिखित आदेश के। अब 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका के ज़रिए यह मामला न्यायिक कसौटी पर कसा जाएगा।

मुख्य बातें

बीएमएचआरसी पर आरोप है कि उसने सभी आठ मिनी इकाइयों में पैथोलॉजी सेवाएं एकतरफा बंद कर दी हैं।
मिनी यूनिट 1, 3, 5 और 8 में एक्स-रे फिल्म्स स्वीकार करना भी बंद किया गया; मरीज मुख्य अस्पताल भेजे जा रहे हैं।
रक्त शर्करा जैसी रिपोर्टें जो पहले एक दिन में मिलती थीं, अब 48 घंटे तक का समय ले रही हैं।
चार पीड़ित संगठनों ने 5 अगस्त को आईसीएमआर , स्वास्थ्य मंत्रालय और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी समिति को पत्र लिखा।
बीजीआईए 11 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका की सुनवाई में यह मुद्दा उठाएगी।
सेवा बंद करने के लिए कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।

भोपाल मेमोरियल अस्पताल और अनुसंधान केंद्र (बीएमएचआरसी) पर 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों के साथ काम करने वाले चार संगठनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं — अस्पताल ने कथित तौर पर अपनी सभी आठ मिनी इकाइयों में पैथोलॉजी सेवाएं एकतरफा बंद कर दी हैं और अब एक्स-रे सुविधाओं को भी समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। 6 अगस्त को यह आरोप सामने आए, जिससे दशकों पुरानी औद्योगिक आपदा के पीड़ितों की स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

मुख्य घटनाक्रम

संगठनों के अनुसार, मिनी इकाइयों की पैथोलॉजी प्रयोगशालाओं के उपकरण और कर्मचारी दोनों को मुख्य बीएमएचआरसी अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप उपवास और भोजन के बाद रक्त शर्करा जैसे परीक्षणों की रिपोर्ट, जो पहले एक ही दिन में मिल जाती थी, अब 48 घंटे तक का समय ले रही है।

इसके अलावा, मिनी यूनिट 1, 3, 5 और 8 ने एक्स-रे फिल्म्स स्वीकार करना बंद कर दिया है, जिससे मरीजों को जांच के लिए मुख्य अस्पताल तक जाने पर मजबूर होना पड़ रहा है। आरोप यह भी है कि मिनी यूनिट में एकमात्र नर्स की अनुपलब्धता पर मरीजों को बिना उपचार के वापस भेज दिया जाता है। गौरतलब है कि इन सेवाओं को बंद करने के लिए अब तक कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया है।

पीड़ित संगठनों की आपत्ति

भोपाल ग्रुप फॉर इंफॉर्मेशन एंड एक्शन (बीजीआईए) की रचना ढिंगरा ने कहा, 'गैस त्रासदी से पीड़ितों के इलाकों के करीब स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए ये मिनी यूनिट स्थापित की गई थीं। प्रबंधन इन्हें मजबूत करने के बजाय व्यवस्थित रूप से आवश्यक सेवाओं को खत्म कर रहा है।'

ढिंगरा ने यह भी आरोप लगाया कि 'प्रबंधन निर्बाध रोगी देखभाल की बजाय नए उपकरणों की खरीद को प्राथमिकता देता प्रतीत होता है। वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित किए बिना कार्यात्मक सेवाओं को निलंबित करना उन उद्देश्यों को ही विफल कर देता है, जिनके लिए इन मिनी इकाइयों की स्थापना की गई थी।'

सरकार और संस्थाओं को पत्र

चारों संगठनों ने 5 अगस्त को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। इसके साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, बीएमएचआरसी की निदेशक मनीषा श्रीवास्तव और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को भी पत्र भेजे गए हैं, जिनमें पैथोलॉजी और एक्स-रे सेवाओं की तत्काल बहाली की माँग की गई है।

यह ऐसे समय में आया है जब बीएमएचआरसी की जवाबदेही पहले से ही न्यायिक निगरानी में है। पत्र में मुख्य अस्पताल को मौखिक रूप से भेजे गए मरीजों के लिए लिखित आदेशों और रिकॉर्ड के अभाव पर भी सवाल उठाए गए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना याचिका

बीजीआईए ने स्पष्ट किया है कि वह 11 अगस्त को निर्धारित अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान इस मुद्दे को सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष रखेगी। संगठन का आरोप है कि सेवाओं में यह कटौती भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को मुफ्त और उचित स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। बीएमएचआरसी की ओर से अब तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि न्यायिक निर्देशों की संभावित अवमानना है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह सब बिना किसी लिखित आदेश के हो रहा है, जो जवाबदेही को और धुंधला करता है। चार दशक बाद भी भोपाल के पीड़ितों को अपने अधिकारों के लिए अदालतों का दरवाज़ा खटखटाना पड़ रहा है — यह संस्थागत विफलता की उस लंबी कड़ी का हिस्सा है जो त्रासदी के दिन से ही जारी है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बीएमएचआरसी की मिनी यूनिटों में क्या सेवाएं बंद की गई हैं?
आरोपों के अनुसार, बीएमएचआरसी ने अपनी सभी आठ मिनी इकाइयों में पैथोलॉजी प्रयोगशालाएं बंद कर दी हैं और उपकरण व कर्मचारी मुख्य अस्पताल में स्थानांतरित कर दिए हैं। इसके अलावा मिनी यूनिट 1, 3, 5 और 8 में एक्स-रे फिल्म्स स्वीकार करना भी बंद कर दिया गया है।
इन सेवाओं की कटौती से भोपाल गैस पीड़ितों पर क्या असर पड़ रहा है?
रक्त शर्करा जैसी सामान्य जांच रिपोर्टें जो पहले एक दिन में मिलती थीं, अब 48 घंटे तक का समय ले रही हैं। नर्स की अनुपलब्धता पर मरीजों को बिना उपचार के वापस भेजा जा रहा है और एक्स-रे के लिए मुख्य अस्पताल तक जाना पड़ रहा है, जो पीड़ितों के लिए अतिरिक्त बोझ है।
पीड़ित संगठनों ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
चार संगठनों ने 5 अगस्त को आईसीएमआर को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय, बीएमएचआरसी निदेशक मनीषा श्रीवास्तव और सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी समिति को भी पत्र भेजे गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय में यह मामला कब उठेगा?
बीजीआईए ने घोषणा की है कि वह 11 अगस्त को निर्धारित अवमानना याचिका की सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष यह मुद्दा रखेगी। संगठन का कहना है कि सेवाओं में कटौती भोपाल गैस पीड़ितों को मुफ्त और उचित स्वास्थ्य सेवा देने के न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है।
बीएमएचआरसी की मिनी यूनिटें क्यों बनाई गई थीं?
ये मिनी इकाइयाँ विशेष रूप से इसलिए स्थापित की गई थीं ताकि 1984 की भोपाल गैस त्रासदी के पीड़ितों को उनके निवास क्षेत्रों के नज़दीक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा देना बीएमएचआरसी की ज़िम्मेदारी है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 6 महीने पहले
  7. 8 महीने पहले
  8. 1 साल पहले