27 जुलाई 2026
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बिहार छात्र आंदोलन: सीपीआई(एमएल) का सरकार पर दमन का आरोप, सिवान में 4 RYA नेता गिरफ्तार

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बिहार छात्र आंदोलन: सीपीआई(एमएल) का सरकार पर दमन का आरोप, सिवान में 4 RYA नेता गिरफ्तार

सारांश

बिहार में छात्र-युवा आंदोलन पर कार्रवाई थमने का नाम नहीं ले रही। सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के अनुसार सिवान में 4 RYA नेता गिरफ्तार हुए, विधायक संदीप सौरव समेत कई नेता जेल में हैं, और AISA राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा बिहार पहुँच गई हैं। पार्टी ने जंतर-मंतर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए आंदोलन विस्तार की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने 27 जुलाई को आरोप लगाया कि बिहार सरकार छात्र-युवा आंदोलन के खिलाफ व्यापक गिरफ्तारी अभियान चला रही है।
सिवान में RYA के 4 नेता — विशाल यादव , अरुण कुमार , विश्वकर्मा कुशवाहा और पवन कुशवाहा — गिरफ्तार किए गए।
सीपीआई(एमएल) विधायक संदीप सौरव , JNU छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय , AISA बिहार सचिव दीपांकर मिश्रा और AISA पटना अध्यक्ष सबा आफरीन समेत कई नेता जेल में बंद हैं।
पार्टी ने जंतर-मंतर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया; 22 और 25 जुलाई के प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तारियाँ हुईं।
AISA राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा बिहार पहुँचीं; सभी आरोपों की वापसी और रिहाई तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन [सीपीआई(एमएल)] ने 27 जुलाई को आरोप लगाया कि बिहार सरकार राज्यभर में छात्र-युवा आंदोलन के खिलाफ व्यापक दमनात्मक अभियान चला रही है। पार्टी के अनुसार, 22 और 25 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने वाले छात्रों और कार्यकर्ताओं को बड़े पैमाने पर गिरफ्तार किया जा रहा है।

ताज़ा गिरफ्तारियाँ: सिवान में RYA के 4 नेता हिरासत में

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के बयान के अनुसार, सबसे ताज़ा कार्रवाई सिवान में हुई, जहाँ रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के चार नेताओं को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार नेताओं में सिवान जिला उपाध्यक्ष विशाल यादव, अरुण कुमार, विश्वकर्मा कुशवाहा और पवन कुशवाहा शामिल हैं।

जेल में बंद प्रमुख नेता और कार्यकर्ता

पार्टी का दावा है कि कई वरिष्ठ नेता और छात्र कार्यकर्ता अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं। इनमें सीपीआई(एमएल) के विधायक संदीप सौरव, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष धनंजय, पार्टी नेता दिव्यम, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के बिहार सचिव दीपांकर मिश्रा और पटना विश्वविद्यालय इकाई की AISA अध्यक्ष सबा आफरीन के नाम शामिल हैं।

जंतर-मंतर समझौते के उल्लंघन का आरोप

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने विशेष रूप से आरोप लगाया कि राज्य सरकार जंतर-मंतर समझौते का उल्लंघन कर रही है। पार्टी के मुताबिक, इस समझौते के तहत आंदोलन से जुड़े लोगों के विरुद्ध कार्रवाई न करने की प्रतिबद्धता थी, जिसे सरकार ने नजरअंदाज कर दिया है।

AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष पहुँचीं बिहार

पार्टी ने बताया कि AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा बिहार पहुँच गई हैं। वह कथित तौर पर गिरफ्तार छात्रों और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करेंगी, उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का ब्यौरा लेंगी और राज्य सरकार से युवाओं के विरुद्ध कथित दमन रोकने की माँग करेंगी।

आंदोलन का आगे का रास्ता

सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी गिरफ्तार नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्रों को रिहा नहीं किया जाता और उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने इसे पूरे बिहार में और व्यापक स्तर पर विस्तारित करने की चेतावनी दी है। यह गतिरोध ऐसे समय में उभरा है जब राज्य में छात्र राजनीति पहले से ही उफान पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

यदि सत्यापित हो, तो सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। एक निर्वाचित विधायक की गिरफ्तारी इस मामले को सामान्य प्रदर्शन-नियंत्रण से अलग श्रेणी में रखती है। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर केवल गिरफ्तारियों की संख्या गिनती है — असली सवाल यह है कि इन प्रदर्शनों की मूल माँगें क्या हैं और सरकार उन पर बातचीत के बजाय दमन का रास्ता क्यों चुन रही है।
RashtraPress
27 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में छात्र आंदोलन पर कार्रवाई क्यों हो रही है?
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के अनुसार, 22 और 25 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद राज्य सरकार ने छात्रों और कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी शुरू की। पार्टी का आरोप है कि यह जंतर-मंतर समझौते का उल्लंघन है, हालाँकि सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सिवान में कौन से RYA नेता गिरफ्तार हुए?
सिवान में रिवोल्यूशनरी यूथ एसोसिएशन (RYA) के चार नेताओं को गिरफ्तार किया गया — सिवान जिला उपाध्यक्ष विशाल यादव, अरुण कुमार, विश्वकर्मा कुशवाहा और पवन कुशवाहा। यह जानकारी सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के बयान के आधार पर है।
जंतर-मंतर समझौता क्या है और इसका उल्लंघन कैसे हुआ?
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन के दावे के अनुसार, जंतर-मंतर समझौते के तहत आंदोलन से जुड़े लोगों के विरुद्ध कार्रवाई न करने की प्रतिबद्धता थी। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस समझौते को दरकिनार कर गिरफ्तारियाँ कर रही है, लेकिन सरकार ने इस पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है।
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा बिहार क्यों पहुँचीं?
AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा गिरफ्तार छात्रों और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात करने, उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी लेने और राज्य सरकार से कथित दमनात्मक कार्रवाई बंद करने की माँग रखने बिहार पहुँची हैं।
आंदोलन आगे किस दिशा में जाएगा?
सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी गिरफ्तार नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्रों को रिहा नहीं किया जाता और उनके खिलाफ सभी मामले वापस नहीं लिए जाते, आंदोलन जारी रहेगा। पार्टी ने इसे पूरे बिहार में और व्यापक स्तर पर फैलाने की चेतावनी दी है।
राष्ट्र प्रेस
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