एआईएसए अध्यक्ष नेहा बोरा 7 अगस्त से 'जेनजी राइजिंग' यात्रा का नेतृत्व करेंगी, 14 राज्यों में छात्र आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
अखिल भारतीय छात्र संघ (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा 7 अगस्त 2026 को रांची से एक महीने के 'जेनजी राइजिंग' ग्रामीण यात्रा अभियान का नेतृत्व करेंगी, जो 14 से अधिक राज्यों में छात्र-युवा समुदाय तक शिक्षा सुधार और रोज़गार की माँग पहुँचाएगा। यह अभियान जंतर-मंतर पर हुए हालिया विरोध प्रदर्शनों की कड़ी के रूप में शुरू किया जा रहा है।
अभियान का उद्देश्य और पृष्ठभूमि
एआईएसए ने 6 अगस्त को जारी एक बयान में कहा कि 'जेनजी राइजिंग' अभियान का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) को समाप्त करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को निरस्त करने, और युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व रोज़गार की माँग को तेज़ करना है। संगठन के अनुसार, यह अभियान नीट यूजी 2026 की कथित अनियमितताओं के बाद उठे छात्र आक्रोश को देशव्यापी स्वर देने का प्रयास है।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाए जाने की माँग छात्र संगठनों की ओर से लगातार उठाई जा रही है। एआईएसए इस माँग को अपने अभियान का केंद्रीय मुद्दा बना रही है।
यात्रा का विस्तृत कार्यक्रम
नेहा बोरा के साथ भूख हड़ताल में शामिल रहे नेता दानिश अली, मनीष, आमीन, अमितोज और अन्य भी इस यात्रा में जुड़ेंगे। पहले चरण का कार्यक्रम इस प्रकार है:
11 अगस्त को कोलकाता, 14 अगस्त को जयपुर, 16-17 अगस्त को हैदराबाद, 18 अगस्त को विजयवाड़ा, 20 अगस्त को चेन्नई, 22 अगस्त को कालीकट, 23 अगस्त को बेंगलुरु, 25 अगस्त को मुंबई, 26 अगस्त को पुणे, 27 अगस्त को नागपुर और 29 अगस्त को भुवनेश्वर में कार्यक्रम आयोजित होंगे। बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और हरियाणा का कार्यक्रम बाद में घोषित किया जाएगा।
युवा बेरोज़गारी के आँकड़े — अभियान की बुनियाद
एआईएसए ने सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग के 37.8 करोड़ भारतीयों में से 12.8 करोड़ काम करने के इच्छुक हैं, लेकिन केवल 8.3 करोड़ ही वास्तव में कार्यरत हैं।
आँकड़ों के अनुसार, युवा बेरोज़गारी दर 35 प्रतिशत तक पहुँच गई है। 20 से 24 वर्ष के शहरी युवाओं में यह दर सात वर्ष पहले 45 प्रतिशत थी, जो अब 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है। 25 से 29 वर्ष आयु वर्ग में यह दर 15 प्रतिशत से बढ़कर 20 प्रतिशत से ऊपर पहुँच गई है।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब एआईएसए ने किसी राष्ट्रीय यात्रा का आयोजन किया हो, लेकिन 'जेनजी राइजिंग' का पैमाना और एक साथ कई राज्यों को जोड़ने की रणनीति इसे पिछले अभियानों से अलग बनाती है। अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह संसदीय दबाव में तब्दील हो पाता है या केवल प्रतीकात्मक विरोध बनकर रह जाता है।