27 अगस्त 2026
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झारखंड पेपर लीक पर देवेंद्र नाथ महतो की चेतावनी: शिक्षा माफियाओं पर कसे शिकंजा, आजीवन कारावास हो

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झारखंड पेपर लीक पर देवेंद्र नाथ महतो की चेतावनी: शिक्षा माफियाओं पर कसे शिकंजा, आजीवन कारावास हो

सारांश

झारखंड में पेपर लीक और भर्ती भ्रष्टाचार के खिलाफ छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की '24 जिला संकल्प यात्रा' गिरिडीह पहुँची। सुप्रीम कोर्ट ने JPSC-JSSC अनियमितताओं पर केंद्र, राज्य और आयोग को नोटिस जारी किया है — युवाओं में उम्मीद की नई लहर।

मुख्य बातें

अभ्यर्थी न्याय मंच की 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' 27 अगस्त को गिरिडीह पहुँची; यात्रा 24 जिलों में 24 संकल्पों के साथ जारी है।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने पेपर लीक पर आजीवन कारावास और शिक्षा माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की।
सर्वोच्च न्यायालय ने JPSC व JSSC अनियमितताओं पर दाखिल जनहित याचिका में केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी किया।
आंदोलन में प्रवासी मज़दूर परिवारों की पीड़ा भी शामिल — माँग है कि युवा अपने ही राज्य में योग्यता के आधार पर नौकरी पाएँ।
महतो ने लोकतंत्र के चारों स्तंभों पर भरोसा जताते हुए कहा — इस बार छात्रों को न्याय मिलेगा।

झारखंड के गिरिडीह में 27 अगस्त 2026 को अभ्यर्थी न्याय मंच की 'भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा' पहुँची, जो 24 संकल्पों के साथ राज्य के 24 जिलों को कवर कर रही है। इस यात्रा का नेतृत्व छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो कर रहे हैं, जिनका लक्ष्य जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को उजागर कर राज्य की भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है।

यात्रा का उद्देश्य और मुख्य मांगें

देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन केवल परीक्षार्थियों का नहीं, बल्कि पूरे झारखंड के भविष्य का संघर्ष है। उन्होंने कहा, "झारखंड की भर्ती व्यवस्था भ्रष्टाचार मुक्त होगी। यहाँ पर पेपर लीक बंद होगा, यहाँ पर किसी तरह की पैरवी-पहचान से नौकरी बंद होगी, यहाँ पैसे से नहीं बल्कि मेहनत से नौकरी मिलेगी।"

उन्होंने आगे कहा कि यदि कोई पेपर लीक, भ्रष्टाचार या धांधली का प्रयास करे, तो उसे आजीवन कारावास की सज़ा मिलनी चाहिए। उनकी माँग है कि नौकरी पहचान या पैसे से नहीं, बल्कि योग्यता और पारदर्शिता के आधार पर मिले।

जनसमर्थन और आंदोलन की ताकत

यात्रा को मिल रहे अप्रत्याशित जनसमर्थन पर महतो ने कहा, "हम लोगों को उम्मीद नहीं थी कि इतना समर्थन मिलेगा। जब आंदोलन करने निकल रहे हैं तो हम लोगों को कहीं रोका नहीं जा रहा, लोग बाइक से पहुँच रहे हैं, हाथ दे रहे हैं, मिनटों में भीड़ उमड़ पड़ रही है।"

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर युवाओं में गहरा असंतोष व्याप्त है और कई परीक्षाएँ कथित अनियमितताओं के कारण विवादों में रही हैं।

प्रवासी मज़दूरों और परिवारों की पीड़ा

महतो ने इस संघर्ष को झारखंड के प्रवासी मज़दूरों और उनके परिवारों की व्यथा से जोड़ा। उन्होंने कहा, "जो प्रवासी मज़दूर झारखंड से बाहर जाकर रोज़ी-रोटी कमा रहे हैं, अगर उनके साथ कोई घटना घटती है तो उनका पार्थिव शरीर तक अपने घर नहीं पहुँचता। झारखंड में कई ऐसी घटनाएँ हैं जहाँ पुतला बनाकर अंतिम संस्कार किया गया है।"

उन्होंने यह भी कहा कि यह उन माता-पिता की आवाज़ है जो खेतों में दिन-रात पसीना बहाते हैं और चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने ही राज्य में सम्मानपूर्वक नौकरी करें। "यह उन माताओं की आवाज़ है जो अपनी ज़रूरतों में कटौती कर बच्चों को नौकरी की तैयारी के लिए पैसे भेजती हैं," उन्होंने जोड़ा।

सुप्रीम कोर्ट का नोटिस और छात्रों में उम्मीद

जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा सीबीआई (CBI) जाँच की माँग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी किया है।

इस पर महतो ने कहा, "इससे छात्रों को यह एहसास हुआ है कि सुप्रीम कोर्ट उनके पक्ष में है। जैसे ही मामला कोर्ट में पहुँचा, जेपीएससी, जेएसएससी, झारखंड सरकार और केंद्र सरकार को तुरंत नोटिस जारी होना छात्रों के पक्ष में एक संकेत है।" उन्होंने लोकतंत्र के चारों स्तंभों — न्यायपालिका, कार्यपालिका, विधायिका और मीडिया — पर भरोसा जताते हुए कहा कि इस बार छात्रों को न्याय मिलेगा।

आगे की राह

गौरतलब है कि 24 जिलों में फैली यह संकल्प यात्रा राज्यव्यापी दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई जारी रहने और जनआंदोलन के तेज़ होने के बीच, झारखंड सरकार पर भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने का दबाव बढ़ता जा रहा है। यह देखना अहम होगा कि सरकार इन माँगों पर कितनी तेज़ी से ठोस कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी भर्ती प्रक्रिया में संरचनागत सुधार की गति धीमी रही है। सुप्रीम कोर्ट का नोटिस उम्मीद जगाता है, लेकिन असली कसौटी यह है कि राज्य सरकार केवल जाँच के आश्वासन से आगे बढ़कर स्वतंत्र निगरानी तंत्र स्थापित करती है या नहीं। महतो की यात्रा का व्यापक जनसमर्थन यह भी दर्शाता है कि झारखंड के युवाओं का धैर्य चुक रहा है — और यदि सरकार ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह आंदोलन चुनावी राजनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
RashtraPress
27 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भर्ती व्यवस्था सुधार यात्रा क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
यह अभ्यर्थी न्याय मंच द्वारा निकाली जा रही एक राज्यव्यापी यात्रा है, जो 24 संकल्पों के साथ झारखंड के 24 जिलों को कवर कर रही है। इसका उद्देश्य JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को उजागर करना और भर्ती प्रक्रिया को भ्रष्टाचारमुक्त बनाना है।
देवेंद्र नाथ महतो पेपर लीक पर क्या सज़ा चाहते हैं?
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो की माँग है कि पेपर लीक, भ्रष्टाचार या किसी भी प्रकार की धांधली में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति को आजीवन कारावास की सज़ा दी जाए। वे शिक्षा माफियाओं के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड भर्ती मामले में क्या कदम उठाया है?
सर्वोच्च न्यायालय ने JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तथा CBI जाँच की माँग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, झारखंड सरकार और जेपीएससी को नोटिस जारी किया है। इससे छात्रों में न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
यह आंदोलन केवल छात्रों तक सीमित है या इसका दायरा व्यापक है?
महतो के अनुसार यह संघर्ष छात्रों से कहीं आगे जाता है — इसमें झारखंड के प्रवासी मज़दूर परिवार भी शामिल हैं, जो चाहते हैं कि उनके बच्चे अपने ही राज्य में सम्मानपूर्वक नौकरी पाएँ। वे किसान और मज़दूर माता-पिता की आवाज़ भी उठा रहे हैं जो बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी ज़रूरतों में कटौती करते हैं।
झारखंड में JPSC और JSSC विवाद की पृष्ठभूमि क्या है?
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाएँ वर्षों से कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के आरोपों से घिरी रही हैं। इन विवादों के चलते अनेक परीक्षाएँ रद्द हुई हैं और छात्रों में व्यापक असंतोष है।
राष्ट्र प्रेस
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