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झारखंड में भर्ती सुधार यात्रा शुरू: नेमरा से 24 जिलों तक जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों की पारदर्शी व्यवस्था की मांग

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झारखंड में भर्ती सुधार यात्रा शुरू: नेमरा से 24 जिलों तक जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों की पारदर्शी व्यवस्था की मांग

सारांश

नेमरा से उठी एक आवाज़ अब 24 जिलों तक गूंजेगी। जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच की भर्ती सुधार यात्रा झारखंड में 26 साल पुरानी परीक्षा-व्यवस्था की खामियों के खिलाफ एक संगठित संकल्प है — सरकार के 17 अगस्त के फैसले को अदालत में टिकाए रखने और भविष्य की परीक्षाओं में धांधली रोकने की गारंटी की मांग के साथ।

मुख्य बातें

जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच की भर्ती सुधार यात्रा 24 अगस्त को रामगढ़ के नेमरा गांव से शुरू हुई।
छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने शिबू सोरेन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर यात्रा का शुभारंभ किया।
यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों में भ्रमण करेगी और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग उठाएगी।
सरकार ने 17 अगस्त को 45 परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की, जिसे मंच ने स्वागत योग्य बताया।
मामला हाई कोर्ट में लंबित है; मंच ने सीआईडी से निष्पक्ष जाँच और सरकार से अपने निर्णय पर कायम रहने की माँग की।
अभ्यर्थियों की मांग — भविष्य की किसी भी परीक्षा में धांधली न हो, इसकी गारंटी सुनिश्चित की जाए।

झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच की भर्ती सुधार यात्रा रविवार, 24 अगस्त को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव से आरंभ हुई। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने झारखंड आंदोलन के प्रतीक शिबू सोरेन की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर इस अभियान का विधिवत शुभारंभ किया। यह यात्रा झारखंड के सभी 24 जिलों में भ्रमण करते हुए भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग बुलंद करेगी।

यात्रा का उद्देश्य और संकल्प

छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने यात्रा के आगाज़ पर कहा कि परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ दिशोम गुरु शिबू सोरेन, झारखंड पितामह विनोद बाबू, निर्मल महतो, भगवान बिरसा मुंडा, शहीद सिदो-कान्हू, चांद-भैरव, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी समेत सभी वीर महापुरुषों का आशीर्वाद लेकर वे इस यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने नारा दिया — '24 जिला, 24 संकल्प, एक आवाज — भर्ती व्यवस्था में सुधार'।

महतो ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा महज एक प्रतीकात्मक कदम नहीं, बल्कि एक दृढ़ संकल्प है — 26 वर्षों से झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त गड़बड़ी, पेपर लीक, सिफारिश और भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करने का संकल्प।

17 अगस्त के सरकारी फैसले पर अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

महतो ने बताया कि मंच के भूख हड़ताल और सत्याग्रह आंदोलन के बाद 17 अगस्त को सरकार ने 45 परीक्षाओं को लेकर ऐतिहासिक कार्रवाई की, जिसे उन्होंने स्वागत योग्य बताया। उन्होंने माँग की कि सरकार अपने इस निर्णय पर कायम रहे, सीआईडी को सौंपे गए मामले की निष्पक्ष जाँच हो और जाँच रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष मजबूती से प्रस्तुत की जाए। साथ ही उन्होंने यह गारंटी माँगी कि आगामी किसी भी परीक्षा में धांधली न हो।

अभ्यर्थियों की पीड़ा: हाई कोर्ट में रोक से निराशा

यात्रा में शामिल एक छात्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री की घोषणा से उम्मीदवारों में खुशी थी, लेकिन जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी, उनके मामले हाई कोर्ट में जाने और रोक लगने के बाद अन्य उम्मीदवार गहरी निराशा में हैं। उन्होंने कहा कि उनकी एकमात्र माँग है — 'सबको न्याय मिले'।

एक अन्य छात्र ने बताया कि यात्रा नेमरा गांव से शुरू होकर रामगढ़ और हजारीबाग होते हुए सभी 24 जिलों में जाएगी। इस दौरान छात्रों को एकजुट किया जाएगा और उन्हें अपने अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।

पृष्ठभूमि: झारखंड में भर्ती विवादों का लंबा इतिहास

यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाएँ वर्षों से विवादों में रही हैं। पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप नए नहीं हैं — गौरतलब है कि जेएसएससी-सीजीएल और अन्य परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर अभ्यर्थी लंबे समय से सड़कों पर हैं। जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच की यह यात्रा उसी संघर्ष की अगली कड़ी है।

आगे क्या होगा

यात्रा के दौरान मंच का लक्ष्य है कि प्रत्येक जिले में छात्रों को संगठित किया जाए और राज्य सरकार पर दबाव बनाया जाए कि भर्ती प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार लागू हों। सीआईडी जाँच के नतीजे और हाई कोर्ट की सुनवाई इस आंदोलन की दिशा तय करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या यह निर्णय हाई कोर्ट की चुनौती के बावजूद टिकेगा और सीआईडी जाँच वास्तव में निष्पक्ष होगी। यह यात्रा एक राजनीतिक संकेत भी है — अभ्यर्थी अब सड़क से संसद तक अपनी आवाज़ पहुँचाने की रणनीति अपना रहे हैं, और सरकार की जवाबदेही तय करने का यह दबाव अनदेखा नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच की भर्ती सुधार यात्रा क्या है?
यह झारखंड में जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच द्वारा आयोजित एक जागरूकता यात्रा है, जो 24 अगस्त को रामगढ़ के नेमरा गांव से शुरू हुई और सभी 24 जिलों में भ्रमण करेगी। इसका उद्देश्य भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी भर्ती प्रणाली की मांग को जन-जन तक पहुँचाना है।
17 अगस्त को झारखंड सरकार ने क्या फैसला लिया था?
17 अगस्त को झारखंड सरकार ने 45 परीक्षाओं को लेकर कार्रवाई की, जिसे अभ्यर्थी न्याय मंच ने ऐतिहासिक और स्वागत योग्य बताया। मंच ने माँग की है कि सरकार इस निर्णय पर कायम रहे और मामले को न्यायालय में मजबूती से रखे।
हाई कोर्ट में रोक से अभ्यर्थी क्यों निराश हैं?
जिन अभ्यर्थियों की नियुक्ति हो चुकी थी, उनके मामले हाई कोर्ट में जाने और रोक लगने के बाद अन्य उम्मीदवार गहरी निराशा में हैं। अभ्यर्थियों की माँग है कि न्यायालय में मामले का शीघ्र निपटारा हो और सभी योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिले।
यात्रा में सीआईडी जाँच को लेकर क्या माँग रखी गई है?
अभ्यर्थी न्याय मंच ने माँग की है कि सीआईडी को सौंपे गए भर्ती अनियमितताओं के मामले की जाँच पूरी तरह निष्पक्ष हो। साथ ही सरकार से यह सुनिश्चित करने की अपील की गई है कि जाँच रिपोर्ट न्यायालय के सामने मजबूती से प्रस्तुत की जाए।
यह यात्रा किन जिलों से होकर गुजरेगी?
यात्रा नेमरा गांव (रामगढ़) से शुरू होकर रामगढ़ और हजारीबाग होते हुए झारखंड के सभी 24 जिलों में जाएगी। प्रत्येक जिले में छात्रों को एकजुट करना और भर्ती सुधार के प्रति जागरूक करना इस यात्रा का मुख्य लक्ष्य है।
राष्ट्र प्रेस
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