29 जुलाई 2026
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सावरकर-बोस विवाद: प्रियांक खड़गे की टिप्पणी पर भाजपा-जदयू का पलटवार, 'पहले इतिहास पढ़ें'

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सावरकर-बोस विवाद: प्रियांक खड़गे की टिप्पणी पर भाजपा-जदयू का पलटवार, 'पहले इतिहास पढ़ें'

सारांश

कर्नाटक मंत्री प्रियांक खड़गे की सावरकर और बोस पर टिप्पणी ने राजनीतिक आग भड़का दी। भाजपा ने 'इतिहास पढ़ने' की नसीहत दी, जदयू और निषाद पार्टी ने भी आलोचना की — जबकि TMC और सपा ने खड़गे का बचाव किया। स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत एक बार फिर राजनीतिक अखाड़े में।

मुख्य बातें

प्रियांक खड़गे (कर्नाटक मंत्री, कांग्रेस) की सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर पर टिप्पणी से 29 जुलाई 2026 को राजनीतिक विवाद भड़का।
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा — खड़गे के पास न तथ्य है, न आँकड़ा; इंदिरा गांधी ने भी सावरकर को 'अनमोल रत्न' कहा था।
निषाद पार्टी प्रमुख संजय निषाद और जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी खड़गे की आलोचना की।
TMC सांसद कीर्ति आजाद और सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने खड़गे का समर्थन करते हुए इतिहास को बदलने की कोशिशों का आरोप लगाया।
खड़गे की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे द्वारा सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर पर की गई टिप्पणियों ने 29 जुलाई 2026 को राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। एनडीए के नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए खड़गे की ऐतिहासिक समझ पर सवाल उठाए, जबकि विपक्षी दलों के कुछ नेताओं ने उनका बचाव किया।

भाजपा की तीखी प्रतिक्रिया

भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने प्रियांक खड़गे की ऐतिहासिक समझ पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'बोलने से पहले आपको (प्रियांक खड़गे) अध्ययन करना चाहिए। प्रियांक खड़गे और उनके पिता मल्लिकार्जुन, जिस पार्टी में वे हैं और जिसकी वे दिन-रात तारीफ करते हैं, उन्हें उसका इतिहास पढ़ना चाहिए। इंदिरा गांधी ने वीर सावरकर के बारे में 'वीर' क्यों बोला? क्यों कहा कि वो भारत के अनमोल रत्न हैं?'

गुरु प्रकाश ने आगे कहा कि खड़गे के पास न तो कोई तथ्य है और न ही कोई आँकड़ा — वे केवल कुछ खास समूहों को खुश करने के लिए ऐसी टिप्पणियाँ करते हैं, जो उनके अनुसार 'दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण' है।

सहयोगी दलों की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी निषाद पार्टी के प्रमुख और राज्य सरकार में मंत्री संजय निषाद ने कहा, 'आरोप-प्रत्यारोप लगाने का अब कोई मतलब नहीं है। उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आज असल में क्या हो रहा है। जनता ने हमें चुना है।'

जनता दल (यूनाइटेड) के विधान परिषद सदस्य और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने संयमित लेकिन स्पष्ट लहजे में कहा, 'इतिहास को बेवजह खंगालने की जरूरत नहीं है, बल्कि उसे समझने की जरूरत है। भारत की आजादी की लड़ाई में सुभाष चंद्र बोस के योगदान से कोई इनकार नहीं कर सकता। महात्मा गांधी, भगत सिंह और सुभाष चंद्र बोस के रास्ते और विचारधाराएँ भले ही अलग-अलग रही हों, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य एक ही था — भारत की आजादी।'

विपक्ष का समर्थन

दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने खड़गे का खुलकर बचाव किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इतिहास को फिर से लिखने की कोशिशें हो रही हैं। कीर्ति आजाद ने कहा, 'प्रियांक खड़गे ने ऐतिहासिक तथ्य बताए हैं। जो लोग राष्ट्रवाद का दावा करते हैं, उन्हें अपने पिछले कामों के बारे में सवालों का जवाब देना चाहिए।'

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी खड़गे का समर्थन करते हुए कहा, 'जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडियन नेशनल आर्मी के लिए लोगों को एकजुट कर रहे थे, तब सावरकर और भारतीय जनसंघ से जुड़े नेता एक अलग नजरिए की वकालत कर रहे थे। ये ऐतिहासिक तथ्य अच्छी तरह से दर्ज हैं।'

विवाद की पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और उनकी वैचारिक भूमिका को लेकर राजनीतिक बहसें नई तीव्रता पकड़ रही हैं। गौरतलब है कि सावरकर और बोस को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच यह कोई पहली बार नहीं है जब इस तरह का टकराव सामने आया हो — यह एक पुनरावर्ती राजनीतिक पैटर्न बन चुका है।

आगे क्या

प्रियांक खड़गे की ओर से अभी तक इन प्रतिक्रियाओं पर कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले दिनों में और गहरा सकता है, खासकर तब जब संसद सत्र या राज्यों में चुनावी माहौल बनने लगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल अपने-अपने मतदाता आधार को सक्रिय करने का माध्यम है। भाजपा का इंदिरा गांधी का हवाला देना रणनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन यह मूल विवाद को संबोधित नहीं करता। इतिहास की व्याख्या जब राजनीतिक हथियार बन जाए, तो तथ्यों की जाँच और भी ज़रूरी हो जाती है।
RashtraPress
29 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने सावरकर और बोस के बारे में क्या कहा था?
कर्नाटक मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियांक खड़गे ने सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर के बारे में टिप्पणियाँ कीं, जिनसे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। उनकी टिप्पणियों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, जिन पर एनडीए नेताओं ने कड़ी आपत्ति जताई।
भाजपा ने प्रियांक खड़गे की आलोचना क्यों की?
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कहा कि खड़गे के पास न कोई तथ्य है, न आँकड़ा — वे केवल खास समूहों को खुश करने के लिए ऐसी बातें करते हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने खुद सावरकर को 'भारत के अनमोल रत्न' कहा था।
जदयू का इस विवाद पर क्या रुख रहा?
जदयू एमएलसी और मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि इतिहास को बेवजह विवाद पैदा करने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी, भगत सिंह और बोस के रास्ते अलग थे, लेकिन लक्ष्य एक — भारत की आजादी।
किन विपक्षी नेताओं ने प्रियांक खड़गे का समर्थन किया?
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने खड़गे का समर्थन किया। दोनों ने कहा कि खड़गे ने ऐतिहासिक तथ्य बताए हैं और इतिहास को बदलने की कोशिशों पर चिंता जताई।
क्या यह पहली बार है जब सावरकर-बोस को लेकर राजनीतिक विवाद हुआ है?
नहीं, स्वतंत्रता सेनानियों की विरासत और उनकी वैचारिक भूमिका को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच ऐसे विवाद पहले भी उठते रहे हैं। यह एक पुनरावर्ती राजनीतिक पैटर्न है जो अक्सर चुनावी या संसदीय मौसम में तेज हो जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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