कोलकाता: BJP विधायक रितेश तिवारी ने दुर्गा पूजा समिति पर ताला जिमखाना मैदान में अवैध कब्जे का लगाया आरोप
सारांश
मुख्य बातें
काशीपुर-बेलगछिया के भाजपा विधायक रितेश तिवारी ने 1 जुलाई 2026 को उत्तरी कोलकाता के ताला पुलिस स्टेशन में ताला प्रत्यय दुर्गा उत्सव समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। शिकायत में समिति पर ताला जिमखाना मैदान की लगभग दो बीघा जमीन पर 2018 से अवैध कब्जा जमाने और कोलकाता नगर निगम (KMC) की संपत्ति को क्षति पहुँचाने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
मुख्य आरोप
विधायक तिवारी की शिकायत के अनुसार, समिति के अधिकारी ध्रुबज्योति बसु उर्फ शुभो और उनके सहयोगियों ने KMC के स्वामित्व वाले मैदान की लगभग 200 फीट की चारदीवारी, एक बड़ा लोहे का गेट और ग्रिल तोड़ दी है। इसके अलावा, मैदान से लगे एक छोटे पार्क पर कथित तौर पर क्लब हाउस भी खड़ा कर लिया गया है।
शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि मैदान के एक बड़े हिस्से पर साल भर विभिन्न संरचनाएँ और सामग्रियाँ रखी रहती हैं, जिससे बच्चों और स्थानीय निवासियों को खेलने के लिए जगह नहीं मिल पाती।
बिजली कनेक्शन में धोखाधड़ी का आरोप
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया है कि ताला पार्क एसोसिएशन के नाम पर कलकत्ता विद्युत आपूर्ति निगम (CESC) से धोखाधड़ी से बिजली कनेक्शन लिया गया। उनके अनुसार, जिस पते पर यह कनेक्शन दर्ज है, वह वास्तव में KMC वार्ड नंबर 5 का एक खाली प्लॉट है, जिसे स्वयंसेवी संस्था कलकत्ता रेस्क्यू को आवंटित किया गया था।
संगठित अपराध की धारा का हवाला
विधायक ने दावा किया है कि ये कथित कृत्य भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 के तहत संगठित अपराध या किसी संगठित अपराध गिरोह की गतिविधियों की श्रेणी में आते हैं। यह एक गंभीर कानूनी दाँव है, जो इस मामले को सामान्य भूमि-विवाद से परे ले जाता है।
समिति की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि उत्तरी कोलकाता के ताला प्रत्यय क्लब द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा शहर की सबसे लोकप्रिय सामुदायिक पूजाओं में गिनी जाती है। यह शिकायत ऐसे समय में आई है जब दुर्गा पूजा की तैयारियाँ आमतौर पर महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं और सार्वजनिक स्थानों के उपयोग को लेकर विवाद प्रायः सामने आते रहते हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल ताला पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर की जाँच जारी है। ताला प्रत्यय दुर्गा उत्सव समिति की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला कोलकाता में सार्वजनिक भूमि के उपयोग और सामुदायिक संगठनों की जवाबदेही को लेकर एक व्यापक बहस को फिर से हवा दे सकता है।