11 जुलाई 2026
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जीतू पटवारी के भाई की गिरफ्तारी पर भाजपा का पलटवार: खण्डेलवाल बोले, कानून सबके लिए बराबर

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जीतू पटवारी के भाई की गिरफ्तारी पर भाजपा का पलटवार: खण्डेलवाल बोले, कानून सबके लिए बराबर

सारांश

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कांग्रेस के 'राजनीतिक प्रतिशोध' के दावे को सिरे से खारिज किया। जीतू पटवारी के भाई की हिरासत पर उन्होंने कहा — मध्यप्रदेश में कानून किसी की पहचान नहीं, कृत्य देखता है।

मुख्य बातें

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने 10 जुलाई को कांग्रेस के 'राजनीतिक प्रतिशोध' के आरोप को भ्रामक बताया।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने भाई की पुलिस हिरासत को राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दिया था।
खण्डेलवाल के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति के विरुद्ध पहले से ही कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार प्रदेश में जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है।
भाजपा ने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और विधि सम्मत प्रक्रिया के आधार पर होती है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मध्यप्रदेश अध्यक्ष व विधायक हेमंत खण्डेलवाल ने 10 जुलाई को भोपाल में स्पष्ट किया कि आपराधिक जाँच के दायरे में आए व्यक्तियों को बचाने के लिए 'राजनीतिक प्रतिशोध' का आरोप लगाना कांग्रेस की पुरानी रणनीति है। यह बयान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के उस दावे के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने अपने भाई की पुलिस हिरासत को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया था।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस द्वारा जीतू पटवारी के भाई को हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस ने इसे सत्तारूढ़ दल की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि पटवारी का बयान 'तथ्यों से परे, भ्रामक और राजनीतिक लाभ लेने का असफल प्रयास' है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जिस व्यक्ति के समर्थन में कांग्रेस खड़ी है, उसके विरुद्ध पहले से ही कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं।

भाजपा सरकार का रुख

मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के बारे में खण्डेलवाल ने कहा कि प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम हो रहा है — अपराधी चाहे कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, 'भाजपा सरकार में किसी की पहचान उसके राजनीतिक रिश्तों से नहीं, बल्कि उसके कृत्यों से होती है।' कानून की कार्यप्रणाली पर उन्होंने जोड़ा कि यह न किसी के दबाव में, न किसी के प्रभाव में और न किसी के प्रति द्वेष की भावना से काम करता है।

कांग्रेस पर सीधा हमला

खण्डेलवाल ने कहा कि जब कानून अपना काम कर रहा है, तब जाँच एजेंसियों की निष्पक्षता पर सवाल उठाना न्याय व्यवस्था का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस को सलाह दी कि वह यह भ्रम पूरी तरह त्याग दे कि राजनीतिक पद, पारिवारिक संबंध या रसूख कानून से ऊपर हो सकते हैं। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्षी दल ने किसी परिजन की गिरफ्तारी को 'रिवेंज पॉलिटिक्स' का नाम दिया हो — यह एक परिचित पैटर्न है जो राज्य की राजनीति में बार-बार देखा जाता है।

क्या होगा आगे

मध्यप्रदेश पुलिस के अनुसार, मामले में तथ्यों, साक्ष्यों और विधि सम्मत प्रक्रिया के आधार पर कार्रवाई जारी रहेगी। यह देखना होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को किस तरह राजनीतिक रूप से आगे ले जाती है और क्या न्यायालय में कोई याचिका दायर होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

दोनों पक्षों के दावे राजनीतिक बयानबाजी से अधिक कुछ नहीं हैं। मतदाताओं के लिए यह जरूरी है कि वे 'जीरो टॉलरेंस' की घोषणाओं को वास्तविक दोषसिद्धि दर और न्यायिक परिणामों की कसौटी पर परखें।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेमंत खण्डेलवाल ने जीतू पटवारी पर क्या आरोप लगाए?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि पटवारी का बयान तथ्यों से परे, भ्रामक और राजनीतिक लाभ लेने का असफल प्रयास है। उन्होंने कहा कि आपराधिक जाँच से बचने के लिए 'राजनीतिक प्रतिशोध' का नैरेटिव गढ़ना कांग्रेस की पुरानी आदत है।
जीतू पटवारी के भाई को क्यों हिरासत में लिया गया?
पुलिस ने जीतू पटवारी के भाई को हिरासत में लिया, जिस पर पहले से कई आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जा रहे हैं। खण्डेलवाल के अनुसार यह कार्रवाई तथ्यों, साक्ष्यों और विधि सम्मत प्रक्रिया के आधार पर हुई है।
मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति क्या है?
मुख्यमंत्री मोहन यादव के नेतृत्व में भाजपा सरकार का दावा है कि अपराधी चाहे कोई भी हो — किसी भी राजनीतिक पहचान या पारिवारिक संबंध वाला — उसे बख्शा नहीं जाएगा। सरकार के अनुसार कानून न किसी के दबाव में काम करता है और न किसी के प्रभाव में।
कांग्रेस ने इस मामले को 'राजनीतिक प्रतिशोध' क्यों कहा?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने भाई की हिरासत को भाजपा सरकार की प्रतिशोधात्मक कार्रवाई बताया। उनका तर्क है कि सत्तारूढ़ दल विपक्षी नेताओं के परिजनों को निशाना बनाकर राजनीतिक दबाव बना रहा है।
इस विवाद का मध्यप्रदेश की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह मामला भाजपा और कांग्रेस के बीच पहले से चल रही राजनीतिक तनातनी को और तेज कर सकता है। आगे यह देखना होगा कि न्यायालय में क्या रुख अपनाया जाता है और क्या कांग्रेस इसे जनआंदोलन का रूप देती है।
राष्ट्र प्रेस
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