पहलगाम हमले की ब्रिक्स संसदीय मंच ने कड़ी निंदा की, सीमा पार आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता का आह्वान
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच ने 27 अक्टूबर 2026 को अपनी संयुक्त घोषणा में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। दो दिवसीय इस मंच के समापन पर ब्रिक्स सदस्य देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकवादियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया कराने के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता एक स्वर में दोहराई।
संयुक्त घोषणा के मुख्य बिंदु
घोषणा में स्पष्ट कहा गया, 'हम आतंकवाद के किसी भी कृत्य की कड़ी निंदा करते हैं। ऐसे कृत्य आपराधिक और अनुचित हैं तथा उनकी प्रेरणा चाहे जो भी हो, वे कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा किए गए हों, स्वीकार्य नहीं हैं।' ब्रिक्स देशों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता, सभ्यता या जातीय समूह से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
घोषणा में यह भी कहा गया कि आतंकवादी गतिविधियों में शामिल सभी लोगों और उन्हें समर्थन देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुसार न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। आतंकवाद से निपटने में दोहरे मानदंडों को मंच ने सीधे तौर पर खारिज किया।
आतंकवाद-रोधी तंत्र को मज़बूत करने पर सहमति
ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य समूह (CTWG) और उसके पाँच उपसमूहों की गतिविधियों का स्वागत किया। ये समूह ब्रिक्स की आतंकवाद-रोधी रणनीति, कार्ययोजना और स्थिति पत्र के आधार पर काम करते हैं। प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र के ढाँचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन को शीघ्र अंतिम रूप देकर अपनाने का आह्वान भी किया।
मंच ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित सभी आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई पर भी जोर दिया। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब भारत पाकिस्तान से जुड़े आतंकी नेटवर्क के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में सक्रिय है।
पश्चिम एशिया संकट और वैश्विक स्थिरता पर चिंता
ब्रिक्स संसदीय मंच ने पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। सदस्यों ने सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और आम नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आग्रह किया। घोषणा में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान को भी महत्वपूर्ण बताया गया।
मंच ने वैश्विक व्यापार, आपूर्ति शृंखलाओं और ऊर्जा की निर्बाध आवाजाही बनाए रखने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता रेखांकित की।
एकतरफा प्रतिबंधों की निंदा
संयुक्त घोषणा में अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत एकतरफा दंडात्मक उपायों की भी आलोचना की गई। घोषणा के अनुसार, एकतरफा आर्थिक प्रतिबंध और द्वितीयक प्रतिबंध लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों — जिसमें विकास के अधिकार, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा शामिल हैं — पर दूरगामी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। ब्रिक्स सदस्यों ने ऐसे गैरकानूनी उपायों को समाप्त करने का आह्वान किया।
पहलगाम निंदा: बढ़ता अंतरराष्ट्रीय दबाव
यह उल्लेखनीय है कि पिछले महीने नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भी शीर्ष नेताओं ने पहलगाम हमले की निंदा की थी। उस दौरान अपनाई गई 'नई दिल्ली घोषणा 2026' में भी सीमा पार आतंकवाद और आतंकियों को पनाहगाह देने के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया था। संसदीय मंच की यह घोषणा उसी रुख को और पुख्ता करती है तथा यह संकेत देती है कि ब्रिक्स स्तर पर भारत का यह मुद्दा अब शीर्ष नेतृत्व से नीचे संसदीय स्तर तक अनुमोदित हो चुका है।
आगामी हफ्तों में ब्रिक्स आतंकवाद-रोधी कार्य समूह की बैठकों में इन प्रतिबद्धताओं को क्रियान्वयन के रूप में परखा जाएगा।