बडगाम में 12 साल की बच्ची के रेप-हत्या पर SIT गठित, उमर अब्दुल्ला ने की कड़ी निंदा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में 12 वर्षीय एक बच्ची के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने 25 मई 2026 को पूरे कश्मीर घाटी में गहरा आक्रोश और शोक की लहर फैला दी। बडगाम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मामले की गहन जांच के लिए 5 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है, जबकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर संदिग्धों से पूछताछ शुरू कर दी है।
घटनाक्रम: कैसे हुई यह त्रासदी
23 मई को बच्ची 'दरसगाह' — बच्चों के लिए धार्मिक शिक्षा का एक स्थानीय केंद्र — जाते समय लापता हो गई थी। अगले दिन उसका शव गालवानपोरा इलाके में उसके घर से महज 200 मीटर की दूरी पर बरामद हुआ। यह तथ्य कि बच्ची अपने घर के इतने नज़दीक असुरक्षित थी, इस घटना को और भी अधिक पीड़ादायक बनाता है।
प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मामले पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने एक व्यापक और समय-सीमा के भीतर जांच पूरी करने के सख्त निर्देश दिए और वादा किया कि दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक्स पर लिखा: 'मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में एक कम उम्र की लड़की की दुखद हत्या बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटना है। मैं बिना किसी शर्त या हिचकिचाहट के इस नृशंस हमले की कड़ी निंदा करता हूं और पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मेरी सरकार दोषी पाए जाने वाले लोगों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए जांच एजेंसियों को हर संभव मदद देगी।'
जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इटू ने पीड़ित परिवार से मिलकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और सरकार की ओर से त्वरित सहायता का आश्वासन दिया।
राजनीतिक और धार्मिक नेताओं की आवाज़
पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि इस घटना की खबर सुनकर वे 'पूरी तरह से टूट गई हैं।' उन्होंने कहा कि रेप के आरोपों ने इस घटना को और भी अधिक चौंकाने वाला बना दिया है और यह सोचकर रूह कांप उठती है कि क्या हमारे बच्चे सचमुच सुरक्षित हैं।
जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी के अध्यक्ष सैयद अल्ताफ बुखारी ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि 'ऐसा जघन्य कृत्य केवल कोई जानवर ही कर सकता है' और मांग की कि इसमें शामिल लोगों को बिना किसी देरी के कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
कश्मीर के मुख्य धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने कहा कि इस घटना ने 'हर इंसान की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है।' उन्होंने मांग की कि मामले की गहन, पारदर्शी और समय-सीमा के भीतर जांच हो और जिम्मेदार लोगों को कानून के तहत कड़ी सजा दी जाए। गौरतलब है कि मीरवाइज ने समाज से यह भी पूछा कि जब बच्चे शिक्षा प्राप्त करने जाते समय भी सुरक्षित नहीं हैं, तो हम किस दिशा में जा रहे हैं।
आम जनता पर असर और सामाजिक चिंता
यह घटना ऐसे समय में आई है जब घाटी में बाल सुरक्षा और महिला सुरक्षा को लेकर पहले से ही गंभीर सवाल उठते रहे हैं। एक धार्मिक शिक्षा केंद्र जाने वाली बच्ची के साथ हुई इस त्रासदी ने अभिभावकों में भय और असुरक्षा की भावना को और गहरा किया है। बडगाम और आसपास के इलाकों में लोगों ने दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग को लेकर अपना गुस्सा जाहिर किया।
आगे की जांच और न्याय की राह
5 सदस्यीय एसआईटी अपराध के सभी पहलुओं की जांच करेगी। उपराज्यपाल के निर्देशों के अनुसार जांच एक निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरी की जानी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया है कि सरकार जांच एजेंसियों को हर संभव सहयोग देगी ताकि दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जा सके। यह मामला अब कश्मीर में बाल सुरक्षा नीति और कानून-व्यवस्था की जवाबदेही पर व्यापक बहस को जन्म दे रहा है।