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कलकत्ता हाईकोर्ट का अभिषेक बनर्जी के अमतला पार्टी ऑफिस पर यथास्थिति का आदेश, रेगुलर बेंच करेगी सुनवाई

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कलकत्ता हाईकोर्ट का अभिषेक बनर्जी के अमतला पार्टी ऑफिस पर यथास्थिति का आदेश, रेगुलर बेंच करेगी सुनवाई

सारांश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के अमतला कार्यालय की आगे की तोड़-फोड़ पर रोक लगाई — लेकिन 18 जुलाई को हो चुकी कार्रवाई पर कोई हस्तक्षेप नहीं किया। अब रेगुलर बेंच तय करेगी कि प्रशासन की यह कार्रवाई नियमसम्मत थी या नहीं।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज स्पेशल बेंच ने 19 जुलाई 2026 को अमतला स्थित पार्टी कार्यालय की आगे की तोड़-फोड़ पर रोक लगाई।
जस्टिस राजा बसु चौधरी ने 'यथास्थिति' का आदेश दिया; मामला अब रेगुलर बेंच को भेजा गया।
अदालत ने 18 जुलाई को हो चुकी तोड़-फोड़ में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप — नोटिस 30 जून को भेजा गया, सुनवाई 15 जुलाई तय हुई, पर तोड़-फोड़ 18 जुलाई को बिना पूर्व सूचना के हुई।
राज्य सरकार का कहना है कि इमारत बिना उचित बिल्डिंग मंजूरी के बनाई गई थी।
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर सामान ले जाने का आरोप लगाया, इसे 'वर्दी में चोरी' बताया।

कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज स्पेशल बेंच ने रविवार, 19 जुलाई 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव और डायमंड हार्बर के लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की याचिका पर तत्काल सुनवाई करते हुए दक्षिण 24 परगना जिले के अमतला में उनके पार्टी कार्यालय की आगे की तोड़-फोड़ पर रोक लगा दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब तक रेगुलर बेंच मामले की सुनवाई नहीं कर लेती, तब तक संबंधित इमारत के संदर्भ में कोई भी अग्रिम कार्रवाई नहीं होगी।

अदालत का आदेश और उसकी सीमाएँ

जस्टिस राजा बसु चौधरी की सिंगल-जज स्पेशल बेंच ने 'यथास्थिति' बनाए रखने का निर्देश दिया। हालाँकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश केवल भविष्य की कार्रवाई पर रोक लगाता है — जिला प्रशासन द्वारा 18 जुलाई को पहले से की गई तोड़-फोड़ में कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया। अदालत ने निर्माण से जुड़े दस्तावेज़ और जानकारी रेगुलर बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया।

याचिकाकर्ता पक्ष के तर्क

अभिषेक बनर्जी की ओर से पेश पश्चिम बंगाल के पूर्व एडवोकेट जनरल किशोर दत्ता ने तर्क दिया कि प्रशासन ने इमारत के मालिक को नोटिस भेजने की बजाय उस कॉर्पोरेट संस्था के डायरेक्टर को नोटिस जारी किया जिसकी ज़मीन पर यह इमारत बनी थी। उन्होंने कहा कि पंचायत नियमों के अनुसार नोटिस सर्वप्रथम मालिक को भेजा जाना अनिवार्य था। दत्ता ने जिला प्रशासन पर उचित समय न देने का आरोप लगाते हुए कहा, 'नोटिस 30 जून को भेजा गया था, और 8 जुलाई को हमें बताया गया कि सुनवाई की तारीख 15 जुलाई तय की गई है। इसके बाद, बिना किसी पूर्व सूचना के 18 जुलाई को तोड़-फोड़ शुरू हो गई।'

राज्य सरकार का पक्ष

मौजूदा एडवोकेट जनरल सुरजीत नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि 30 जून को भेजे गए नोटिस में सभी प्रासंगिक प्रावधानों का उल्लेख था और प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की गई। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित इमारत का निर्माण बिना उचित बिल्डिंग मंजूरी योजना के किया गया था, जो नियमों का उल्लंघन है।

अभिषेक बनर्जी का सोशल मीडिया बयान

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक बयान जारी कर दावा किया कि सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा बुलडोजर कार्रवाई को असंवैधानिक करार दिए जाने के बावजूद 18 जुलाई को उनका कार्यालय ध्वस्त किया गया। उन्होंने आरोप लगाया, 'वीडियो में पश्चिम बंगाल पुलिस को भाजपा के गुंडों के साथ लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज, टेबल, कुर्सियाँ और अन्य फर्नीचर से भरे बक्से ले जाते हुए देखा जा सकता है। यह तोड़-फोड़ नहीं थी, यह वर्दी में चोरी थी।' उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

आगे क्या होगा

यह मामला अब कलकत्ता हाईकोर्ट की रेगुलर बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए जाएगा। तब तक अमतला स्थित पार्टी कार्यालय की इमारत पर यथास्थिति बनी रहेगी। यह प्रकरण ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में बुलडोजर कार्रवाइयों की संवैधानिकता को लेकर न्यायिक और राजनीतिक बहस तेज़ हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी 'बिना बिल्डिंग मंजूरी' के आधार पर कार्रवाई की गई — और वह भी तब जब मामला न्यायालय में विचाराधीन था। प्रक्रियागत खामियाँ — गलत व्यक्ति को नोटिस, अपर्याप्त समय — यदि सिद्ध हुईं, तो यह प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करेंगी। रेगुलर बेंच की सुनवाई ही बताएगी कि कानून का पालन हुआ या उसका दुरुपयोग।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अभिषेक बनर्जी के अमतला ऑफिस पर क्या आदेश दिया?
कलकत्ता हाईकोर्ट की सिंगल-जज स्पेशल बेंच ने 19 जुलाई 2026 को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया, यानी इमारत पर आगे कोई तोड़-फोड़ नहीं होगी। यह आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक रेगुलर बेंच मामले की सुनवाई नहीं कर लेती।
अभिषेक बनर्जी का अमतला पार्टी ऑफिस क्यों तोड़ा गया?
राज्य सरकार के अनुसार, इमारत बिना उचित बिल्डिंग मंजूरी योजना के बनाई गई थी और 30 जून को नोटिस जारी किया गया था। हालाँकि, याचिकाकर्ता पक्ष का आरोप है कि नोटिस गलत व्यक्ति को भेजा गया और उचित सुनवाई का समय नहीं दिया गया।
क्या हाईकोर्ट ने 18 जुलाई को हुई तोड़-फोड़ को रोका?
नहीं, अदालत ने केवल भविष्य की कार्रवाई पर रोक लगाई है। 18 जुलाई को जो तोड़-फोड़ हो चुकी है, उसमें अदालत ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। इस पहलू पर रेगुलर बेंच विचार कर सकती है।
अभिषेक बनर्जी ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए?
अभिषेक बनर्जी ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि वीडियो में पश्चिम बंगाल पुलिस को कार्यालय से लैपटॉप, प्रिंटर, दस्तावेज़ और फर्नीचर ले जाते देखा जा सकता है। उन्होंने इसे 'वर्दी में चोरी' बताया और कहा कि यह कार्रवाई तब हुई जब मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन था।
इस मामले की आगे की सुनवाई कहाँ होगी?
जस्टिस राजा बसु चौधरी ने मामले को कलकत्ता हाईकोर्ट की रेगुलर बेंच को भेज दिया है। रेगुलर बेंच की सुनवाई तक इमारत पर यथास्थिति बनी रहेगी और निर्माण से जुड़े दस्तावेज़ भी बेंच के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।
राष्ट्र प्रेस
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