अभिषेक बनर्जी के आमतला पार्टी कार्यालय को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, अंतरिम संरक्षण 18 सितंबर तक बढ़ा
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के आमतला स्थित पार्टी कार्यालय को दिया गया अंतरिम संरक्षण 18 सितंबर तक बढ़ा दिया है। यह मामला सुषांत मंडल की उस शिकायत से जुड़ा है जिसमें TMC पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को दोपहर 3.30 बजे निर्धारित है।
मामले की पृष्ठभूमि
अभिषेक बनर्जी की कंपनी लीप्स एंड बाउंड्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता किशोर दत्ता ने अदालत को बताया कि विवाद प्लॉट नंबर 509, 512 और 507 से संबंधित है। उनके अनुसार, प्लॉट नंबर 509 और 512 के संदर्भ में सुनवाई का नोटिस 16 जुलाई को प्राप्त हुआ था, जबकि प्लॉट नंबर 507 के लिए ध्वस्तीकरण का नोटिस दिया गया है।
किशोर दत्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि पहले महाधिवक्ता की ओर से यह सुनिश्चित किया गया था कि प्लॉट नंबर 509 और 512 के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी — प्रशासनिक कदम केवल प्लॉट नंबर 507 तक सीमित है। उन्होंने 2016 में चांडीग्राम पंचायत से स्वीकृत भवन योजना का भी हवाला दिया।
न्यायालय की जिज्ञासा और टिप्पणियाँ
न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष ने सुनवाई के दौरान यह जानना चाहा कि निर्माण कार्य प्लॉट नंबर 509 और 512 पर हुआ था या नहीं, क्योंकि यही विवाद का केंद्रीय प्रश्न है। अदालत को अवगत कराया गया कि कार्रवाई केवल प्लॉट नंबर 507 पर कथित अवैध निर्माण को लेकर है।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पंचायत अधिनियम में अवैध निर्माण के नियमितीकरण का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि नगर निकाय से संबंधित कानून में ऐसा प्रावधान उपलब्ध है — यह टिप्पणी मामले की कानूनी जटिलता को उजागर करती है।
याचिकाकर्ता के गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता रुद्र नंदी ने आरोप लगाया कि कार्यालय से सामान हटाए जाने के वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि ट्रकों में कार्यालय का सामान ले जाया जा रहा था और यह स्पष्ट नहीं है कि कितना और क्या सामान हटाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिविल वॉलंटियर्स ने कार्यालय में जबरन प्रवेश किया।
गौरतलब है कि ये आरोप अदालत में लगाए गए हैं और अभी तक न्यायिक रूप से सत्यापित नहीं हैं।
आगे क्या होगा
कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अंतरिम राहत को 18 सितंबर तक जारी रखते हुए अगली सुनवाई 8 सितंबर को तय की है। इस मामले का परिणाम न केवल आमतला कार्यालय बल्कि पंचायत क्षेत्रों में TMC की संपत्तियों और उनकी कानूनी स्थिति के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।