17 अगस्त 2026
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ओडिशा सतर्कता विभाग ने कैपिटल अस्पताल के डॉक्टर को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

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ओडिशा सतर्कता विभाग ने कैपिटल अस्पताल के डॉक्टर को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा

सारांश

ओडिशा सतर्कता विभाग ने भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल में सहायक सर्जन को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा — वह भी उन एनजीओ कर्मचारियों के वेतन प्रमाण पत्रों के बदले, जो अस्पताल के सबसे जरूरतमंद मरीजों की सेवा करते हैं। यह कार्रवाई राज्य में सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के भीतर भ्रष्टाचार पर सख्ती के बढ़ते सिलसिले की एक और कड़ी है।

मुख्य बातें

ओडिशा सतर्कता विभाग ने 17 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल के सहायक सर्जन डॉ.
सत्यजीत बेहरा को गिरफ्तार किया।
बेहरा ने एनजीओ कर्मचारियों के कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर के बदले ₹30,000 की रिश्वत माँगी और ली।
रिश्वत राशि उनके पास से बरामद कर जब्त की गई; तीन स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान जारी है।
भुवनेश्वर सतर्कता पुलिस स्टेशन में भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला संख्या 19/26 दर्ज।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी हाल ही में गजपति जिले के एक अन्य डॉक्टर पतितपबन बारिक को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त कर चुके हैं।

ओडिशा सतर्कता विभाग ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल में तैनात सहायक सर्जन डॉ. सत्यजीत बेहरा को ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि डॉ. बेहरा ने अस्पताल में कार्यरत एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के कर्मचारियों के वेतन निकासी हेतु आवश्यक कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने के बदले यह राशि मांगी थी।

मुख्य घटनाक्रम

सतर्कता विभाग के अनुसार, कैपिटल अस्पताल ने संबंधित एनजीओ को आपातकालीन विभाग में आने वाले अज्ञात और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए नियुक्त किया हुआ है। बताया जाता है कि एनजीओ का एक पदाधिकारी जून 2026 से डॉ. बेहरा से अपने कर्मचारियों के जून और जुलाई 2026 के कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर का अनुरोध कर रहा था।

कथित तौर पर डॉ. बेहरा ने इन प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने के बदले एनजीओ पदाधिकारी से ₹30,000 की माँग की। रिश्वत की इस माँग और उत्पीड़न से तंग आकर शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद विभाग ने जाल बिछाया और डॉ. बेहरा को राशि स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। ₹30,000 की रिश्वत राशि उनके पास से बरामद कर जब्त कर ली गई है।

तलाशी अभियान और कानूनी कार्रवाई

गिरफ्तारी के तत्काल बाद सतर्कता विभाग ने डॉ. बेहरा से जुड़े तीन स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया, ताकि उनकी संभावित अनुपातहीन संपत्ति का पता लगाया जा सके। भुवनेश्वर सतर्कता पुलिस स्टेशन में 16 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला संख्या 19/26 दर्ज किया गया है। विभाग ने पुष्टि की है कि आगे की जाँच जारी है।

व्यापक संदर्भ: ओडिशा में भ्रष्टाचार पर सख्ती

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में गजपति जिले के गुरंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डॉक्टर पतितपबन बारिक को भ्रष्टाचार के आरोपों पर बर्खास्त किया था। गौरतलब है कि यह ओडिशा के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल के महीनों में की गई एक और बड़ी कार्रवाई है, जो दर्शाती है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर शून्य-सहिष्णुता की नीति अपना रही है।

आम जनता पर असर

कैपिटल अस्पताल ओडिशा के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहाँ राज्यभर से जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए आते हैं। आरोपित एनजीओ की भूमिका इन्हीं असहाय और अज्ञात मरीजों की सहायता करना है। ऐसे में एक सरकारी डॉक्टर द्वारा एनजीओ कर्मचारियों के वेतन को रोककर रिश्वत माँगना सीधे तौर पर उन वंचित मरीजों की सेवा को प्रभावित करता है जिनके लिए यह तंत्र बनाया गया है।

क्या होगा आगे

सतर्कता विभाग ने संकेत दिया है कि डॉ. बेहरा के खिलाफ जाँच अभी जारी है और तीन स्थानों पर चल रहे तलाशी अभियान के नतीजे सामने आने के बाद मामले में और धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं। अनुपातहीन संपत्ति की जाँच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो निर्धन और अज्ञात मरीजों की सेवा करते हैं, इस भ्रष्टाचार को विशेष रूप से गंभीर बनाता है — यह सीधे सबसे कमजोर तबके को नुकसान पहुँचाता है। ओडिशा में यह दूसरी बड़ी कार्रवाई है जो सरकारी स्वास्थ्य तंत्र को निशाना बनाती है, और यह संकेत देती है कि सतर्कता विभाग स्वास्थ्य क्षेत्र में व्यवस्थागत भ्रष्टाचार पर केंद्रित हो रहा है। असली सवाल यह है कि क्या ये व्यक्तिगत गिरफ्तारियाँ पर्याप्त हैं, या फिर सरकारी अस्पतालों में प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की जरूरत है ताकि ऐसे मध्यस्थ भ्रष्टाचार की गुंजाइश ही न रहे।
RashtraPress
17 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डॉ. सत्यजीत बेहरा को किस आरोप में गिरफ्तार किया गया?
डॉ. सत्यजीत बेहरा को भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल में कार्यरत एक एनजीओ के कर्मचारियों के कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने के बदले ₹30,000 की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। ओडिशा सतर्कता विभाग ने जाल बिछाकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ा और रिश्वत राशि बरामद की।
इस मामले में एनजीओ की क्या भूमिका थी?
कैपिटल अस्पताल ने इस एनजीओ को आपातकालीन विभाग में आने वाले अज्ञात और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए नियुक्त किया हुआ है। एनजीओ पदाधिकारी जून 2026 से अपने कर्मचारियों के वेतन निकासी हेतु प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर का अनुरोध कर रहा था, जिसके बदले में डॉ. बेहरा ने कथित तौर पर रिश्वत माँगी।
डॉ. बेहरा के खिलाफ कौन-सी धाराओं में मामला दर्ज हुआ है?
भुवनेश्वर सतर्कता पुलिस स्टेशन में 16 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला संख्या 19/26 दर्ज किया गया है। जाँच जारी है और तीन स्थानों पर तलाशी के नतीजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
ओडिशा में सरकारी डॉक्टरों पर भ्रष्टाचार की यह पहली कार्रवाई है?
नहीं, हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गजपति जिले के गुरंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर पतितपबन बारिक को भ्रष्टाचार के आरोपों पर बर्खास्त किया था। डॉ. बेहरा की गिरफ्तारी इस सिलसिले की एक और बड़ी कड़ी है।
इस मामले में आगे क्या होगा?
सतर्कता विभाग ने डॉ. बेहरा से जुड़े तीन स्थानों पर तलाशी अभियान शुरू किया है ताकि अनुपातहीन संपत्ति का पता लगाया जा सके। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर मामले में अतिरिक्त धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं और न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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