ओडिशा सतर्कता विभाग ने कैपिटल अस्पताल के डॉक्टर को ₹30,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा सतर्कता विभाग ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर के कैपिटल अस्पताल में तैनात सहायक सर्जन डॉ. सत्यजीत बेहरा को ₹30,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि डॉ. बेहरा ने अस्पताल में कार्यरत एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के कर्मचारियों के वेतन निकासी हेतु आवश्यक कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने के बदले यह राशि मांगी थी।
मुख्य घटनाक्रम
सतर्कता विभाग के अनुसार, कैपिटल अस्पताल ने संबंधित एनजीओ को आपातकालीन विभाग में आने वाले अज्ञात और जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए नियुक्त किया हुआ है। बताया जाता है कि एनजीओ का एक पदाधिकारी जून 2026 से डॉ. बेहरा से अपने कर्मचारियों के जून और जुलाई 2026 के कार्य प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर का अनुरोध कर रहा था।
कथित तौर पर डॉ. बेहरा ने इन प्रमाण पत्रों पर हस्ताक्षर करने के बदले एनजीओ पदाधिकारी से ₹30,000 की माँग की। रिश्वत की इस माँग और उत्पीड़न से तंग आकर शिकायतकर्ता ने सतर्कता अधिकारियों से संपर्क किया, जिसके बाद विभाग ने जाल बिछाया और डॉ. बेहरा को राशि स्वीकार करते हुए पकड़ लिया। ₹30,000 की रिश्वत राशि उनके पास से बरामद कर जब्त कर ली गई है।
तलाशी अभियान और कानूनी कार्रवाई
गिरफ्तारी के तत्काल बाद सतर्कता विभाग ने डॉ. बेहरा से जुड़े तीन स्थानों पर एक साथ तलाशी अभियान शुरू किया, ताकि उनकी संभावित अनुपातहीन संपत्ति का पता लगाया जा सके। भुवनेश्वर सतर्कता पुलिस स्टेशन में 16 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 के तहत मामला संख्या 19/26 दर्ज किया गया है। विभाग ने पुष्टि की है कि आगे की जाँच जारी है।
व्यापक संदर्भ: ओडिशा में भ्रष्टाचार पर सख्ती
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में गजपति जिले के गुरंडी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात डॉक्टर पतितपबन बारिक को भ्रष्टाचार के आरोपों पर बर्खास्त किया था। गौरतलब है कि यह ओडिशा के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल के महीनों में की गई एक और बड़ी कार्रवाई है, जो दर्शाती है कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर शून्य-सहिष्णुता की नीति अपना रही है।
आम जनता पर असर
कैपिटल अस्पताल ओडिशा के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहाँ राज्यभर से जरूरतमंद मरीज इलाज के लिए आते हैं। आरोपित एनजीओ की भूमिका इन्हीं असहाय और अज्ञात मरीजों की सहायता करना है। ऐसे में एक सरकारी डॉक्टर द्वारा एनजीओ कर्मचारियों के वेतन को रोककर रिश्वत माँगना सीधे तौर पर उन वंचित मरीजों की सेवा को प्रभावित करता है जिनके लिए यह तंत्र बनाया गया है।
क्या होगा आगे
सतर्कता विभाग ने संकेत दिया है कि डॉ. बेहरा के खिलाफ जाँच अभी जारी है और तीन स्थानों पर चल रहे तलाशी अभियान के नतीजे सामने आने के बाद मामले में और धाराएँ जोड़ी जा सकती हैं। अनुपातहीन संपत्ति की जाँच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।