क्या सीबीआई ने 58 लाख रुपए के सीमा शुल्क धोखाधड़ी मामले में फरार अपराधी को गिरफ्तार किया?

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क्या सीबीआई ने 58 लाख रुपए के सीमा शुल्क धोखाधड़ी मामले में फरार अपराधी को गिरफ्तार किया?

सारांश

सीबीआई ने 58 लाख रुपए के सीमा शुल्क धोखाधड़ी मामले में फरार सरित विज को गिरफ्तार किया। यह मामला 1999 से चल रहा था। इस गिरफ्तारी ने कई सालों से चल रही जांच को सफल बनाया। जानें इस मामले के पीछे की कहानी और सीबीआई के प्रयास।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 58 लाख रुपए के धोखाधड़ी में सरित विज को गिरफ्तार किया।
सरित विज ने अपनी पहचान बदलकर सरत कुमार विज रख ली थी।
इस मामले में 1999 से जांच चल रही थी।
गिरफ्तारी से पहले सरित विज कई वर्षों तक फरार रहा।
सीबीआई ने कानून की गंभीरता को दर्शाया है।

नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सीमा शुल्क विभाग से संबंधित 58 लाख रुपए के धोखाधड़ी मामले में लंबे समय से फरार घोषित अपराधी सरित विज उर्फ ​​शरत कुमार विज को गिरफ्तार कर लिया है। एजेंसी ने गुरुवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि उसकी गिरफ्तारी में सूचना देने वाले को 10,000 रुपए का इनाम देने की घोषणा की गई थी।

जांच एजेंसी की प्रेस नोट में बताया गया कि सीबीआई ने 1 जून, 1999 को दिल्ली के तुगलकाबाद स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो (आईसीडी) के तत्कालीन अधीक्षक जोसेफ कुओक और अन्य आरोपियों के खिलाफ सीमा शुल्क विभाग को लगभग 58 लाख रुपए की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया था।

जांच के दौरान सरित विज की भूमिका सामने आई। वह मेसर्स पीएस इंटरनेशनल नामक फर्म में भागीदार था, जिसने कथित तौर पर सीमा शुल्क विभाग के साथ फर्जी ड्यूटी ड्रॉबैक दावे दाखिल कर लगभग 19 लाख रुपए की धोखाधड़ी से वापसी की मांग की थी। जांच पूरी होने के बाद विज के खिलाफ अन्य सह-आरोपियों के साथ आरोप पत्र दायर किया गया।

हालांकि, 2003 में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद सरित विज अदालत में पेश नहीं हुआ और मुकदमे की पूरी अवधि के दौरान फरार रहा। जांच एजेंसी के निरंतर प्रयासों के बावजूद कई वर्षों तक उसका पता नहीं चल सका।

सभी निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, अदालत ने 30 जनवरी, 2004 को सरित विज को भगोड़ा घोषित कर दिया। इसके बाद, उसके ठिकाने और गिरफ्तारी की जानकारी देने वाले को 10,000 रुपए का इनाम घोषित किया गया।

आगे की जांच और जमीनी सत्यापन से पता चला कि आरोपी ने अपनी पहचान बदलकर सरत कुमार विज कर ली थी और वह नोएडा में रह रहा था। सीबीआई ने पाया कि उसने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए बदले हुए नाम से पैन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट सहित नए पहचान पत्र बनवा लिए थे।

इन सूचनाओं के आधार पर, सीबीआई ने तकनीकी विश्लेषण की सहायता से एक सुनियोजित अभियान चलाया और बुधवार, 7 जनवरी, 2026 को नोएडा स्थित उसके नए आवास से घोषित अपराधी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया।

सीबीआई धोखाधड़ी के मामलों की सक्रिय रूप से जांच करती है, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों को कारावास और भारी जुर्माने सहित सजाएं मिलती हैं।

--आईएएएस

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भी दिखाती है कि देश में कानून का कोई भी व्यक्ति बच नहीं सकता।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने सरित विज को क्यों गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने सरित विज को 58 लाख रुपए की सीमा शुल्क धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार किया है, जिसमें वह लंबे समय से फरार था।
सरित विज का असली नाम क्या है?
सरित विज का असली नाम शरत कुमार विज है।
सरित विज ने अपनी पहचान क्यों बदली?
सरित विज ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए अपनी पहचान बदली थी।
सीबीआई ने उसकी गिरफ्तारी के लिए इनाम क्यों घोषित किया?
सीबीआई ने सूचनाएं देने वाले को 10,000 रुपए का इनाम इसलिए घोषित किया ताकि अधिक से अधिक लोग जानकारी साझा करें।
क्या इस गिरफ्तारी का असर अन्य मामलों पर पड़ेगा?
यह गिरफ्तारी यह दर्शाती है कि सीबीआई धोखाधड़ी के मामलों को गंभीरता से ले रही है, और इससे अन्य मामलों में भी सख्त कार्रवाई की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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