30 अक्टूबर 2026
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सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको पर कसा शिकंजा, ₹210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में 3 निदेशक निशाने पर

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सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको पर कसा शिकंजा, ₹210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में 3 निदेशक निशाने पर

सारांश

सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों पर ₹210.13 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने छह बैंकों के कंसोर्टियम से ₹541.46 करोड़ का ऋण लेकर गुप्त खाते संचालित किए और धनराशि का गबन किया। प्रयागराज में छापेमारी में अहम दस्तावेज जब्त।

मुख्य बातें

सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड (सीपीएल) और उसके तीन निदेशकों — रणजीत गुप्ता, अनिलेश गुप्ता, अपर्णा गुप्ता — पर ₹210.13 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
कंपनी ने इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम से कुल ₹541.46 करोड़ की ऋण सुविधाएं कथित तौर पर हासिल कीं।
आरोप है कि कंसोर्टियम से बाहर गुप्त खाते संचालित किए और संबद्ध कंपनियों के जरिए धनराशि दूसरी जगह स्थानांतरित की।
सीबीआई ने प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में छापेमारी कर लेजर रिकॉर्ड और अहम दस्तावेज जब्त किए।
मामले में अज्ञात लोक सेवकों की भूमिका की भी जांच जारी है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ₹210.13 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड (सीपीएल) और उसके तीन निदेशकों — रणजीत गुप्ता, अनिलेश गुप्ता और अपर्णा गुप्ता — के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला दर्ज होते ही एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया और अहम दस्तावेज जब्त किए।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला इंडियन बैंक की स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट शाखा, मुंबई की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड और उसके निदेशकों ने आपराधिक साजिश के तहत इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम से ₹541.46 करोड़ की विभिन्न ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं। इन सुविधाओं में नकद ऋण (कैश क्रेडिट), टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट शामिल थे।

किस तरह की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप

सीबीआई के अनुसार, आरोप है कि कंपनी ने कंसोर्टियम से बाहर के बैंकों में गुप्त खाते संचालित किए। इसके अलावा, संबद्ध कंपनियों और समान निदेशकों वाली इकाइयों के माध्यम से लेटर ऑफ क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया। बैंकों से प्राप्त धनराशि को कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य की बजाय संबंधित कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया।

गौरतलब है कि इस कथित गबन से इंडियन बैंक सहित पाँच बैंकों को करीब ₹210.13 करोड़ का नुकसान होने का आरोप है — जबकि कंसोर्टियम को स्वीकृत कुल राशि ₹541.46 करोड़ थी।

प्रयागराज में छापेमारी और बरामदगी

प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद सीबीआई ने प्रयागराज में निदेशकों से जुड़े विभिन्न परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान संबंधित अवधि के लेजर रिकॉर्ड और जांच के लिए उपयोगी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने कहा है कि अज्ञात लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

जांच की दिशा

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी की प्राथमिकता तीन मोर्चों पर है — साजिश की पूरी परतें उजागर करना, इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करना, और यह पता लगाना कि ऋण की राशि का अंतिम उपयोग कहाँ और कैसे किया गया।

यह मामला ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) और कंसोर्टियम ऋण धोखाधड़ी को लेकर नियामकीय सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है। आने वाले हफ्तों में सीबीआई की जांच से स्पष्ट होगा कि इस मामले में और कितने लोगों की संलिप्तता सामने आती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन निगरानी की जिम्मेदारी किसी की नहीं होती। कंसोर्टियम व्यवस्था में लीड बैंक और सहयोगी बैंकों के बीच सूचना-साझाकरण की खामी का फायदा उठाकर गुप्त खाते संचालित करना कोई नई रणनीति नहीं है — विजय माल्या से लेकर नीरव मोदी तक के मामलों में यही पैटर्न देखा गया है। असली सवाल यह है कि इंडियन बैंक की स्ट्रेस्ड एसेट शाखा ने शिकायत कब दर्ज की और इस दौरान कंसोर्टियम के बाकी पाँच बैंक क्या कर रहे थे। अज्ञात लोक सेवकों का उल्लेख संकेत देता है कि जांच का दायरा और बड़ा हो सकता है।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड पर सीबीआई का मामला क्या है?
सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड और उसके निदेशकों पर ₹210.13 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि कंपनी ने इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम से ₹541.46 करोड़ का ऋण लेकर धनराशि का गबन किया।
इस मामले में कितने बैंकों को नुकसान हुआ और कितना?
सीबीआई के अनुसार इंडियन बैंक सहित पाँच बैंकों को कुल ₹210.13 करोड़ का नुकसान हुआ है। कंसोर्टियम में छह बैंक शामिल थे और इंडियन बैंक इसका नेतृत्व करने वाला बैंक था।
सीबीआई ने प्रयागराज में छापेमारी में क्या बरामद किया?
प्रयागराज में चंद्रा प्रोटेको के निदेशकों से जुड़े परिसरों पर छापेमारी के दौरान संबंधित अवधि के लेजर रिकॉर्ड और जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं।
चंद्रा प्रोटेको के कौन-से निदेशक आरोपी हैं?
मामले में कंपनी के तीन निदेशकों — रणजीत गुप्ता, अनिलेश गुप्ता और अपर्णा गुप्ता — के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनके अलावा अज्ञात लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
कंपनी ने धोखाधड़ी कैसे की बताई जा रही है?
आरोप है कि कंपनी ने कंसोर्टियम से बाहर के बैंकों में गुप्त खाते संचालित किए, संबद्ध कंपनियों और समान निदेशकों वाली इकाइयों के माध्यम से लेटर ऑफ क्रेडिट का दुरुपयोग किया और ऋण की राशि को निर्धारित उद्देश्य की बजाय संबंधित कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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