सीबीआई ने चंद्रा प्रोटेको पर कसा शिकंजा, ₹210 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी में 3 निदेशक निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ₹210.13 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी के मामले में चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड (सीपीएल) और उसके तीन निदेशकों — रणजीत गुप्ता, अनिलेश गुप्ता और अपर्णा गुप्ता — के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। मामला दर्ज होते ही एजेंसी ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में कंपनी से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया और अहम दस्तावेज जब्त किए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला इंडियन बैंक की स्ट्रेस्ड एसेट मैनेजमेंट शाखा, मुंबई की शिकायत पर दर्ज किया गया है। शिकायत के अनुसार, चंद्रा प्रोटेको लिमिटेड और उसके निदेशकों ने आपराधिक साजिश के तहत इंडियन बैंक के नेतृत्व वाले छह बैंकों के कंसोर्टियम से ₹541.46 करोड़ की विभिन्न ऋण सुविधाएं प्राप्त कीं। इन सुविधाओं में नकद ऋण (कैश क्रेडिट), टर्म लोन और लेटर ऑफ क्रेडिट शामिल थे।
किस तरह की वित्तीय अनियमितताओं का आरोप
सीबीआई के अनुसार, आरोप है कि कंपनी ने कंसोर्टियम से बाहर के बैंकों में गुप्त खाते संचालित किए। इसके अलावा, संबद्ध कंपनियों और समान निदेशकों वाली इकाइयों के माध्यम से लेटर ऑफ क्रेडिट का दुरुपयोग किया गया। बैंकों से प्राप्त धनराशि को कथित तौर पर निर्धारित उद्देश्य की बजाय संबंधित कंपनियों में स्थानांतरित कर दिया गया।
गौरतलब है कि इस कथित गबन से इंडियन बैंक सहित पाँच बैंकों को करीब ₹210.13 करोड़ का नुकसान होने का आरोप है — जबकि कंसोर्टियम को स्वीकृत कुल राशि ₹541.46 करोड़ थी।
प्रयागराज में छापेमारी और बरामदगी
प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद सीबीआई ने प्रयागराज में निदेशकों से जुड़े विभिन्न परिसरों पर एक साथ छापेमारी की। तलाशी के दौरान संबंधित अवधि के लेजर रिकॉर्ड और जांच के लिए उपयोगी कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद कर जब्त किए गए हैं। एजेंसी ने कहा है कि अज्ञात लोक सेवकों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
जांच की दिशा
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। एजेंसी की प्राथमिकता तीन मोर्चों पर है — साजिश की पूरी परतें उजागर करना, इसमें शामिल सभी व्यक्तियों की भूमिका की पहचान करना, और यह पता लगाना कि ऋण की राशि का अंतिम उपयोग कहाँ और कैसे किया गया।
यह मामला ऐसे समय में आया है जब बैंकिंग क्षेत्र में गैर-निष्पादित आस्तियों (NPA) और कंसोर्टियम ऋण धोखाधड़ी को लेकर नियामकीय सतर्कता पहले से बढ़ी हुई है। आने वाले हफ्तों में सीबीआई की जांच से स्पष्ट होगा कि इस मामले में और कितने लोगों की संलिप्तता सामने आती है।