त्रिपुरा CM माणिक साहा बोले: राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन था अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने 4 मई को अगरतला में कहा कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव केवल चुनावी जीत नहीं, बल्कि भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से एक अपरिहार्य आवश्यकता थी। उन्होंने सीमा पार से बढ़ती घुसपैठ को इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण बताया। साहा ने दावा किया कि निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जीत सुनिश्चित की है।
विजय रैली में नेताओं का जमावड़ा
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने अगरतला में राज्य BJP अध्यक्ष राजीव भट्टाचार्य और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर विजय रैली का नेतृत्व किया। रैली के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने पश्चिम बंगाल की जनता की दशकों पुरानी पीड़ा का उल्लेख किया। उनके अनुसार, पहले वाम मोर्चा के 35 वर्षों के शासनकाल और फिर तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 15 वर्षों के कार्यकाल में जनता को 'वास्तविक लोकतंत्र' से वंचित रखा गया।
घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंता
साहा ने आरोप लगाया कि सीमा पार से बंगाल में हो रही घुसपैठ एक गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चिंता बन चुकी थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन आवश्यक था। उन्होंने यह भी कहा कि BJP की जीत से यह राज्य घुसपैठ का गलियारा बनना बंद होगा और शांति की वापसी होगी।
TMC पर कुशासन और अत्याचार के आरोप
मुख्यमंत्री साहा ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ने बलपूर्वक राज्य में सत्ता हथिया ली और पिछले 15 वर्षों से जनता पर अत्याचार करती रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राज्य की जनता को 'मुक्ति दिलाने' का श्रेय दिया। साहा के अनुसार, 'डबल इंजन' शासन प्रणाली के तहत अब विकास को नई गति मिलेगी।
खान-पान की आज़ादी पर त्रिपुरा का उदाहरण
तृणमूल कांग्रेस के इस दावे का जवाब देते हुए कि BJP लोगों की खान-पान की आदतों में दखल देगी, साहा ने त्रिपुरा का उदाहरण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि पिछले आठ वर्षों से BJP के सत्ता में रहने के बावजूद त्रिपुरा देश में मछली की खपत के सबसे प्रमुख क्षेत्रों में से एक है। उनका कहना था कि त्रिपुरा में BJP सरकार ने कभी भी नागरिकों के खान-पान के विकल्पों में हस्तक्षेप नहीं किया।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि BJP की कथित जीत किस प्रकार राज्य की सुरक्षा नीति और सीमा प्रबंधन को प्रभावित करती है।