5 नवंबर 2026
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चेन्नई में ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोशन फियाज और अम्मार गिरफ्तार, ₹400 करोड़ के नेटवर्क का भंडाफोड़

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चेन्नई में ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोशन फियाज और अम्मार गिरफ्तार, ₹400 करोड़ के नेटवर्क का भंडाफोड़

सारांश

चेन्नई में ईडी ने ₹400 करोड़ के ऑनलाइन धोखाधड़ी-मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का भंडाफोड़ किया। रोशन फियाज और अम्मार की गिरफ्तारी के साथ यह मामला 600 से अधिक साइबर शिकायतों और पाँच राज्यों तक फैले 'म्यूल' खाते व क्रिप्टो नेटवर्क की परतें उघाड़ता है।

मुख्य बातें

ईडी चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने 5 नवंबर 2026 को रोशन फियाज और अम्मार को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया।
इस नेटवर्क के ज़रिए ₹400 करोड़ से अधिक की रकम 'म्यूल' बैंक खातों और यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लॉन्डर की गई।
रोशन फियाज के नाम और नियंत्रण वाले 31 बैंक खातों में ₹300 करोड़ का लेन-देन पाया गया।
छापेमारी में ₹14.50 लाख नकद , ₹3.26 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी जब्त और ₹88.28 लाख बैंक खातों में फ्रीज।
नेटवर्क से जुड़ी 600 से अधिक साइबर अपराध शिकायतें और तेलंगाना, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल में 10 अतिरिक्त एफआईआर सामने आईं।
दोनों आरोपियों को पीएमएलए विशेष अदालत, चेन्नई ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने 5 नवंबर 2026 को ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दो आरोपियों — रोशन फियाज और अम्मार — को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के ज़रिए ₹400 करोड़ से अधिक की अपराध-अर्जित रकम को 'म्यूल' बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लॉन्डर किया गया।

मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर का आधार

ईडी ने यह जांच दो प्रमुख एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। पहली एफआईआर तमिलनाडु पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर द्वारा दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी तेलंगाना के साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। ये मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, आईपीसी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकृत किए गए थे।

आगे की जांच में तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 अतिरिक्त एफआईआर भी इसी नेटवर्क से जुड़ी पाई गईं। इसके अलावा, इस नेटवर्क से संबंधित साइबर अपराध की 600 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं — जो इसके व्यापक दायरे को उजागर करती हैं।

धोखाधड़ी का तरीका: निवेश और नौकरी का लालच

अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया या फोन के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते थे और उन्हें निवेश योजनाओं, नौकरियों, शेयर बाजार में मुनाफे या अन्य ऑनलाइन प्रलोभनों का झांसा देते थे। ठगी की रकम पहले 'म्यूल' बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर उसे छोटे-छोटे हिस्सों में कई खातों में बांट दिया जाता था।

इसके बाद रकम का एक हिस्सा नकद निकाल लिया जाता था, जबकि शेष को क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट नेटवर्क में यूएसडीटी (USDT) के रूप में स्थानांतरित कर दिया जाता था। यह बहुस्तरीय तरीका पारंपरिक वित्तीय निगरानी से बचने के लिए अपनाया जाता था।

रोशन फियाज और अम्मार की भूमिका

जांच के अनुसार, रोशन फियाज इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार था। उसने अपने नाम, अपनी पत्नी के नाम और अपने नियंत्रण वाली कई प्रोप्राइटरशिप तथा अन्य संस्थाओं के नाम पर 'म्यूल' बैंक खातों की एक बड़ी श्रृंखला संचालित कर रखी थी। इन 31 खातों में डेबिट और क्रेडिट लेन-देन के रूप में ₹300 करोड़ की आवाजाही पाई गई।

अम्मार की भूमिका अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खाते उपलब्ध कराने की थी। वह रोशन फियाज को अकाउंट किट, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ईमेल आईडी भी मुहैया कराता था, ताकि क्रिप्टो खरीदारों से भारतीय रुपए प्राप्त किए जा सकें। गौरतलब है कि यह आरोपियों के बीच स्पष्ट श्रम-विभाजन को दर्शाता है।

छापेमारी में बरामदगी और न्यायिक हिरासत

गिरफ्तारी से पहले, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत रोशन फियाज, अम्मार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान ₹14.50 लाख नकद और ₹3.26 करोड़ मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई। इसके अतिरिक्त, कई बैंक खातों में जमा ₹88.28 लाख को फ्रीज कर दिया गया।

दोनों आरोपियों को चेन्नई की पीएमएलए विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संगठित डिजिटल वित्तीय अपराध का हिस्सा है। असली सवाल यह है कि क्रिप्टो ट्रांजेक्शन की ट्रेसिंग और एक्सचेंजों पर नियामकीय पकड़ कितनी मजबूत है — क्योंकि जब तक ऑफ-रैम्प पर निगरानी नहीं होगी, गिरफ्तारियाँ नेटवर्क की जड़ें नहीं काट सकतीं।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चेन्नई में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में किसे गिरफ्तार किया?
ईडी ने 5 नवंबर 2026 को रोशन फियाज और अम्मार को पीएमएलए, 2002 के तहत गिरफ्तार किया। ये दोनों ऑनलाइन धोखाधड़ी से अर्जित ₹400 करोड़ से अधिक की रकम को 'म्यूल' बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के ज़रिए लॉन्डर करने वाले नेटवर्क के प्रमुख सदस्य बताए गए हैं।
इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क में ₹400 करोड़ की रकम कैसे छिपाई गई?
अधिकारियों के अनुसार, पीड़ितों से ठगी गई रकम को पहले 'म्यूल' बैंक खातों में जमा कराया जाता था, फिर उसे छोटे हिस्सों में कई खातों में बांटा जाता था। अंत में रकम का एक भाग नकद निकाला जाता था और शेष को क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट में USDT के रूप में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
रोशन फियाज और अम्मार की इस नेटवर्क में क्या भूमिका थी?
रोशन फियाज इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार था, जिसने अपने और अपनी पत्नी के नाम पर 31 'म्यूल' बैंक खाते संचालित किए, जिनमें ₹300 करोड़ का लेन-देन हुआ। अम्मार बैंक खाते, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, सिम कार्ड और ईमेल आईडी उपलब्ध कराने का काम करता था।
ईडी की छापेमारी में क्या बरामद हुआ और दोनों आरोपियों की अभी क्या स्थिति है?
छापेमारी में ₹14.50 लाख नकद और ₹3.26 करोड़ की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई, जबकि ₹88.28 लाख बैंक खातों में फ्रीज किए गए। दोनों आरोपियों को चेन्नई की पीएमएलए विशेष अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
इस मामले में कितने राज्य और कितनी शिकायतें शामिल हैं?
जांच के दौरान तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 अतिरिक्त एफआईआर इसी नेटवर्क से जुड़ी पाई गईं। इसके अलावा इस नेटवर्क से संबंधित 600 से अधिक साइबर अपराध शिकायतें सामने आई हैं, जो इसके व्यापक और बहु-राज्यीय दायरे को दर्शाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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