चेन्नई में ईडी की बड़ी कार्रवाई: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रोशन फियाज और अम्मार गिरफ्तार, ₹400 करोड़ के नेटवर्क का भंडाफोड़
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के चेन्नई जोनल ऑफिस-II ने 5 नवंबर 2026 को ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत दो आरोपियों — रोशन फियाज और अम्मार — को गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क के ज़रिए ₹400 करोड़ से अधिक की अपराध-अर्जित रकम को 'म्यूल' बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से लॉन्डर किया गया।
मामले की पृष्ठभूमि और एफआईआर का आधार
ईडी ने यह जांच दो प्रमुख एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। पहली एफआईआर तमिलनाडु पुलिस के स्टेट साइबर क्राइम कमांड सेंटर द्वारा दर्ज की गई थी, जबकि दूसरी तेलंगाना के साइबराबाद साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई थी। ये मामले भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023, आईपीसी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत पंजीकृत किए गए थे।
आगे की जांच में तेलंगाना, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में दर्ज 10 अतिरिक्त एफआईआर भी इसी नेटवर्क से जुड़ी पाई गईं। इसके अलावा, इस नेटवर्क से संबंधित साइबर अपराध की 600 से अधिक शिकायतें सामने आई हैं — जो इसके व्यापक दायरे को उजागर करती हैं।
धोखाधड़ी का तरीका: निवेश और नौकरी का लालच
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी सोशल मीडिया या फोन के ज़रिए पीड़ितों से संपर्क करते थे और उन्हें निवेश योजनाओं, नौकरियों, शेयर बाजार में मुनाफे या अन्य ऑनलाइन प्रलोभनों का झांसा देते थे। ठगी की रकम पहले 'म्यूल' बैंक खातों में जमा कराई जाती थी, फिर उसे छोटे-छोटे हिस्सों में कई खातों में बांट दिया जाता था।
इसके बाद रकम का एक हिस्सा नकद निकाल लिया जाता था, जबकि शेष को क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट नेटवर्क में यूएसडीटी (USDT) के रूप में स्थानांतरित कर दिया जाता था। यह बहुस्तरीय तरीका पारंपरिक वित्तीय निगरानी से बचने के लिए अपनाया जाता था।
रोशन फियाज और अम्मार की भूमिका
जांच के अनुसार, रोशन फियाज इस नेटवर्क का मुख्य सूत्रधार था। उसने अपने नाम, अपनी पत्नी के नाम और अपने नियंत्रण वाली कई प्रोप्राइटरशिप तथा अन्य संस्थाओं के नाम पर 'म्यूल' बैंक खातों की एक बड़ी श्रृंखला संचालित कर रखी थी। इन 31 खातों में डेबिट और क्रेडिट लेन-देन के रूप में ₹300 करोड़ की आवाजाही पाई गई।
अम्मार की भूमिका अलग-अलग व्यक्तियों और संस्थाओं के बैंक खाते उपलब्ध कराने की थी। वह रोशन फियाज को अकाउंट किट, नेट-बैंकिंग क्रेडेंशियल्स, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और ईमेल आईडी भी मुहैया कराता था, ताकि क्रिप्टो खरीदारों से भारतीय रुपए प्राप्त किए जा सकें। गौरतलब है कि यह आरोपियों के बीच स्पष्ट श्रम-विभाजन को दर्शाता है।
छापेमारी में बरामदगी और न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी से पहले, ईडी ने पीएमएलए, 2002 की धारा 17 के तहत रोशन फियाज, अम्मार और उनसे जुड़ी संस्थाओं के कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान ₹14.50 लाख नकद और ₹3.26 करोड़ मूल्य की क्रिप्टोकरेंसी जब्त की गई। इसके अतिरिक्त, कई बैंक खातों में जमा ₹88.28 लाख को फ्रीज कर दिया गया।
दोनों आरोपियों को चेन्नई की पीएमएलए विशेष अदालत के सामने पेश किया गया, जिसने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच अभी जारी है और आगे और भी खुलासे होने की संभावना है।