आरक्षण भरपाई है, दान नहीं — चिराग पासवान के बयान पर सांसद अरुण भारती ने जताई सहमति
सारांश
मुख्य बातें
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के सांसद अरुण भारती ने 24 अगस्त को नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के आरक्षण संबंधी बयान का पुरज़ोर समर्थन किया और स्पष्ट किया कि आरक्षण संविधान-प्रदत्त अधिकार है, न कि कोई दान या खैरात। साथ ही उन्होंने बिहार सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए गठित पाँच सदस्यीय समिति का स्वागत किया।
अरुण भारती का आरक्षण पर रुख
सांसद अरुण भारती ने कहा, 'यह पहली बार है जब हम ऐसा आंदोलन देख रहे हैं, जो किसी के अधिकार छीनने की बात करता है। हमारे नेता सही कहते हैं — आरक्षण कोई दान या खैरात नहीं है, भीख नहीं है, बल्कि यह भरपाई है।' उन्होंने जोड़ा कि यह अधिकार बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा दिए गए संविधान में निहित है और इसे किसी भी स्थिति में छीना नहीं जा सकता।
भारती ने यह भी कहा कि युवाओं की समस्याएँ वास्तविक हैं और अवसरों की कमी एक असली चुनौती है, लेकिन इसका समाधान अवसर बढ़ाने में है — न कि किसी के संवैधानिक अधिकार छीनने में।
चिराग पासवान का मूल बयान
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा था कि उन्होंने 10 फरवरी 2020 को संसद में भी स्पष्ट किया था कि 'आरक्षण किसी को दी हुई खैरात नहीं, बल्कि एक संवैधानिक अधिकार है।' उन्होंने लिखा, 'आरक्षण को समाप्त करने की बात तो दूर, आरक्षण की समीक्षा भी हमें कभी स्वीकार्य नहीं है। सामाजिक न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए हमारी प्रतिबद्धता अटूट है।'
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश में आरक्षण सुधार को लेकर छात्र आंदोलन चल रहा है और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएँ तेज़ हो रही हैं।
ब्रजेश पाठक पर निशाना
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक द्वारा आरक्षण सुधार आंदोलन के छात्र प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात और एक्स पर पोस्ट करने पर सांसद भारती ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा, 'संवैधानिक पद पर रहते हुए ब्रजेश पाठक का आरक्षण हटाओ जैसे आंदोलन का समर्थन करना पूरी तरह गलत है।' उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ब्रजेश पाठक पहले बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से सांसद रह चुके हैं और बहुजन समाज का वोट लेकर चुने गए थे।
22 अगस्त को ब्रजेश पाठक ने एक्स पर लिखा था कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण सुधार आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे के साथ लखनऊ में पत्रकार वार्ता की और छात्रों की माँगों को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखने का आश्वासन दिया।
बिहार पेपर लीक समिति पर प्रतिक्रिया
बिहार सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने के लिए गठित पाँच सदस्यीय समिति पर सांसद भारती ने कहा कि यह एक स्वागत योग्य कदम है। उन्होंने कहा, 'हम लोग छात्रों के अधिकारों, माँगों और परीक्षा में सुधारों को लेकर लगातार बात कर रहे हैं। सरकार अगर समिति के माध्यम से इस मुद्दे को सुनती है और कानून बनाती है, तो यह एक अच्छा कदम है।'
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पूरे देश में परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और आरक्षण नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज़ है। आगे देखना होगा कि बिहार की यह समिति कितने समय में ठोस सिफारिशें पेश करती है और केंद्र सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।