23 अक्टूबर 2026
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सीजेपी नेता आशुतोष रांका बोले — सीईसी के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा, संगठन में जरूरी बदलाव होंगे

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सीजेपी नेता आशुतोष रांका बोले — सीईसी के खिलाफ आंदोलन जारी रहेगा, संगठन में जरूरी बदलाव होंगे

सारांश

तिहाड़ जेल से रिहाई के दो दिन बाद सीजेपी नेता आशुतोष रांका ने साफ कर दिया — एसआईआर और सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन न जेल में रुका था, न अब रुकेगा। जमानत सत्यापन हुआ, क्राइम ब्रांच की अगली तारीख नवंबर में है।

मुख्य बातें

सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका ने 23 अक्टूबर 2026 को घोषित किया कि सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग वाला आंदोलन जारी रहेगा।
रांका और सौरव दास को एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया था।
मामला 13 अक्टूबर की जंतर-मंतर घटना से जुड़ा है, जब 14 लोग अनधिकृत स्थल पर विरोध प्रदर्शन करने पहुँचे थे।
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं के मामले इस सप्ताह क्राइम ब्रांच को सौंपे।
जमानत सत्यापन प्रक्रिया पूरी; अगली सुनवाई नवंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित।

सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के सह संयोजक आशुतोष रांका ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग वाला आंदोलन किसी भी परिस्थिति में नहीं रुकेगा। एक सप्ताह की न्यायिक हिरासत के बाद तिहाड़ जेल से रिहा हुए रांका ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संगठन अनुभवों से सीखकर अपने भीतर जरूरी बदलाव करेगा।

मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुँचे सीजेपी नेता

आशुतोष रांका, सौरव दास (सह संयोजक) और अजिंक्य शिंदे (राष्ट्रीय संगठन प्रभारी) शुक्रवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन पहुँचे। उनके साथ सीजेपी की कानूनी मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह भी मौजूद थीं। तीनों नेताओं को गुरुवार दोपहर राजौरी गार्डन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच कार्यालय में उपस्थित होने को कहा गया था, जिसके लिए उन्होंने अतिरिक्त समय माँगा था।

जमानत सत्यापन प्रक्रिया पूरी, अगली तारीख नवंबर में

पुलिस स्टेशन से निकलने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए रांका ने बताया, 'आज हमारी जमानत के लिए सत्यापन प्रक्रिया थी। सब कुछ ठीक रहा। हमें अगली तारीख मिल गई है, जो नवंबर के तीसरे सप्ताह में है।' उन्होंने यह भी कहा कि क्राइम ब्रांच की अगली तारीख की पुष्टि का अभी इंतजार है।

13 अक्टूबर की घटना और गिरफ्तारी का पृष्ठभूमि

यह मामला 13 अक्टूबर की उस घटना से जुड़ा है जब दास, रांका और शिंदे 11 अन्य लोगों के साथ जंतर-मंतर में घुसे थे। गौरतलब है कि जंतर-मंतर को अब विरोध प्रदर्शन के लिए अधिकृत स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया था। शिंदे को जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया, जबकि दास और रांका एक सप्ताह तक न्यायिक हिरासत में रहने के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से बाहर आए।

रांका का बयान — 'हम संरक्षक हैं, नेता नहीं'

रांका ने अपने संगठन की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा, 'हम नेता नहीं हैं। हम इस मंच के संरक्षक हैं, जो हमें इस देश के लोगों ने दिया है।' उन्होंने जोड़ा, 'आंदोलन तब भी जारी रहता है जब हम जेल के अंदर होते हैं या बाहर। हमने अपने बारे में और मौजूदा शासन के काम करने के तरीके के बारे में बहुत कुछ सीखा है और हम निश्चित रूप से खुद में जरूरी बदलाव लाएंगे।'

क्राइम ब्रांच को सौंपे गए मामले

इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं के खिलाफ दर्ज विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामलों को क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित कर दिया। यह कदम मामले की संवेदनशीलता और व्यापक जाँच की आवश्यकता को रेखांकित करता है। आने वाले हफ्तों में क्राइम ब्रांच की कार्रवाई और नवंबर में होने वाली अगली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो चुनाव आयोग की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर बहस अपरिहार्य हो जाती है। रांका का 'हम संरक्षक हैं, नेता नहीं' वाला बयान संगठन की रणनीतिक पुनर्स्थापना का संकेत देता है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह आंदोलन व्यापक जन-समर्थन जुटा पाता है या केवल कानूनी लड़ाई तक सिमटकर रह जाता है।
RashtraPress
23 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीजेपी का सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किस बात को लेकर है?
सीजेपी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा माँग रही है। संगठन का आरोप है कि एसआईआर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है।
आशुतोष रांका और सौरव दास को जेल क्यों जाना पड़ा था?
13 अक्टूबर 2026 को रांका, दास और शिंदे समेत 14 लोग जंतर-मंतर में विरोध प्रदर्शन के लिए पहुँचे थे, जो अब अधिकृत प्रदर्शन स्थल नहीं है। दिल्ली पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया; रांका और दास एक सप्ताह न्यायिक हिरासत में रहे, जबकि शिंदे को जमानत मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
सीजेपी नेताओं के मामले की अगली सुनवाई कब है?
जमानत सत्यापन प्रक्रिया 23 अक्टूबर को पूरी हुई और अगली तारीख नवंबर के तीसरे सप्ताह में निर्धारित की गई है। क्राइम ब्रांच की अलग तारीख की पुष्टि अभी बाकी है।
दिल्ली पुलिस ने मामला क्राइम ब्रांच को क्यों सौंपा?
इस सप्ताह की शुरुआत में दिल्ली पुलिस ने सीजेपी नेताओं के खिलाफ दर्ज विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामलों को क्राइम ब्रांच को हस्तांतरित किया। यह कदम मामले की जाँच को अधिक विशेषज्ञ स्तर पर ले जाने का संकेत है।
क्या सीजेपी का आंदोलन गिरफ्तारी के बाद भी जारी रहेगा?
आशुतोष रांका ने स्पष्ट कहा कि आंदोलन तब भी जारी रहता है जब वे जेल के अंदर होते हैं या बाहर। संगठन ने अपने अनुभवों से सीखकर खुद में जरूरी बदलाव लाने की भी घोषणा की है।
राष्ट्र प्रेस
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