सीजेपी के जश्न पर महेश जेठमलानी ने एक्स पर उठाए फंडिंग के सवाल, सपा सांसद ने माँगे सबूत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पर सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के कार्यकर्ताओं और प्रवक्ताओं का एक जश्न मनाते हुए वीडियो तेज़ी से वायरल हो गया है। इस वीडियो ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें एक तरफ फंडिंग को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्ष सबूत माँग रहा है।
महेश जेठमलानी के सवाल
वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट के ज़रिए इस वायरल वीडियो पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि नई दिल्ली में कई दिनों तक हिंसा और तनाव के बाद सीजेपी की नेतृत्व टीम एक पाँच सितारा होटल में संगीत बजाकर जीत का जश्न क्यों मना रही है। जेठमलानी ने यह भी जानना चाहा कि पूरे आंदोलन के दौरान यात्रा, भोजन, आवास और लॉजिस्टिक्स का खर्च किसने वहन किया, और उन लोगों को धन किसने मुहैया कराया जिन्होंने कथित तौर पर राजधानी में अशांति फैलाई।
सपा सांसद की प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने नई दिल्ली में इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अगर वरिष्ठ अधिवक्ता सवाल उठा रहे हैं तो उन्हें पहले ठोस प्रमाण पेश करने चाहिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि स्वयं सरकारी मंत्रालय के संबंधित विभाग ने स्वीकार किया है कि इस प्रदर्शन में कोई विदेशी संबंध नहीं पाया गया। सरोज के अनुसार, धरना स्थल पर आम नागरिकों ने अपने स्तर पर भोजन पहुँचाया, जबकि सरकार ने बाद में कनॉट प्लेस (सीपी) के रेस्टोरेंट तक बंद करवा दिए।
इस्तीफे और युवा आंदोलन पर टिप्पणी
सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने कहा, 'जश्न का माहौल है तो जश्न ही मनाएंगे। इस सरकार के 12 साल में दावा किया जाता था कि इस्तीफे नहीं होते, लेकिन युवाओं ने सरकार को झुकाया और इस्तीफा भी लिया।' उन्होंने इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत बताया।
अन्य मुद्दों पर विपक्ष की माँग
आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के E-20 ईंधन से जुड़े बयान पर सरोज ने इसे 'बड़ा घोटाला' करार दिया और कहा कि इससे वाहन खराब हो रहे हैं; उन्होंने संसद में इस विषय पर चर्चा की माँग उठाई है। पेपर लीक विरोधी विधेयक पर उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार विपक्षी सांसदों के सवालों का जवाब नहीं देती और देश से माफी नहीं माँगती, तब तक इस पर सार्थक चर्चा संभव नहीं होगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सांसद निशिकांत दुबे के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सरोज ने कहा कि असली सवाल यह है कि छात्रों को अपना अधिकार पाने में दो महीने क्यों लगे। उन्होंने परीक्षा आयोजन का अधिकार राज्यों को सौंपने की माँग भी दोहराई।
आगे क्या
सीजेपी फंडिंग विवाद और पेपर लीक विधेयक दोनों मुद्दे संसद के आगामी सत्र में गर्म बहस का केंद्र बन सकते हैं। विपक्ष सरकार पर जवाबदेही का दबाव बनाए हुए है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।