बंगाल की खाड़ी में बही MOES-NIOT डेटा बॉय को तटरक्षक जहाज रानी गैदिन्लियू ने बचाया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय तटरक्षक बल ने 5 जुलाई 2026 को बंगाल की खाड़ी में अपनी निर्धारित स्थिति से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई एक MOES-NIOT वैज्ञानिक डेटा बॉय को सफलतापूर्वक बरामद किया। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के निकट से बहकर दूर जा चुकी इस बहुमूल्य वैज्ञानिक उपकरण की खोज और वापसी तटरक्षक पोत रानी गैदिन्लियू ने तेज हवाओं और प्रतिकूल समुद्री परिस्थितियों के बीच पूरी की।
अभियान का विवरण
रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह डेटा बॉय नेल्लोर तट के पास अपने निर्धारित स्थान से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई थी। समुद्र में उग्र मौसम और कम दृश्यता के बावजूद तटरक्षक दल ने सटीक खोज अभियान चलाया और इस उपकरण को सुरक्षित अपने नियंत्रण में ले लिया। पोत रानी गैदिन्लियू ने इस पूरे ऑपरेशन में अग्रणी भूमिका निभाई।
डेटा बॉय का वैज्ञानिक महत्व
यह MOES-NIOT (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय — राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान) की वैज्ञानिक डेटा बॉय समुद्री लहरों, जल-तापमान, धाराओं, मौसम और अन्य समुद्री परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण आँकड़े एकत्र करती है। इन आँकड़ों का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अनुसंधान, तटीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और समुद्री गतिविधियों की निगरानी में किया जाता है। ऐसे उपकरणों की क्षति या हानि देश की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता को सीधे प्रभावित करती है।
तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता
भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि वह समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ समुद्र में स्थापित वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अभियान उस व्यापक भूमिका का उदाहरण है जो तटरक्षक बल अब पारंपरिक सुरक्षा से आगे बढ़कर वैज्ञानिक संपत्तियों के संरक्षण में निभा रहा है।
पिछले सप्ताह का बचाव अभियान
गौरतलब है कि बीते सप्ताह 29 जून की शाम कर्नाटक के मंगलूरु तट के निकट सुरथकल से लगभग 33 समुद्री मील दूर मछली पकड़ने वाली नौका 'मंजू माथा' समुद्र की उग्र परिस्थितियों में जलभराव के कारण संकट में फंस गई थी। नौका के ढाँचे को भी क्षति पहुँची और उस पर सवार छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई। संदेश मिलते ही तटरक्षक बल ने 90 मिनट के भीतर बचाव दल को घटनास्थल पर पहुँचाया। ऊँची लहरों, तेज हवाओं और घटती रोशनी के बीच जवानों ने विशेष दूरस्थ-नियंत्रित लाइफबॉय की मदद से एक-एक कर सभी छह मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
आगे की राह
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी समुद्री वैज्ञानिक अवसंरचना को तेज़ी से विस्तार दे रहा है और बंगाल की खाड़ी में अधिक निगरानी उपकरण तैनात किए जा रहे हैं। इस सफल बरामदगी से इन उपकरणों की सुरक्षा के लिए तटरक्षक बल और वैज्ञानिक संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता और स्पष्ट हो गई है।