5 जुलाई 2026
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बंगाल की खाड़ी में बही MOES-NIOT डेटा बॉय को तटरक्षक जहाज रानी गैदिन्लियू ने बचाया

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बंगाल की खाड़ी में बही MOES-NIOT डेटा बॉय को तटरक्षक जहाज रानी गैदिन्लियू ने बचाया

सारांश

बंगाल की खाड़ी में नेल्लोर तट से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई MOES-NIOT की बहुमूल्य वैज्ञानिक डेटा बॉय को तटरक्षक पोत रानी गैदिन्लियू ने प्रतिकूल मौसम के बीच सफलतापूर्वक बरामद किया — यह अभियान दर्शाता है कि तटरक्षक बल अब वैज्ञानिक अवसंरचना के संरक्षक की भूमिका भी निभा रहा है।

मुख्य बातें

भारतीय तटरक्षक पोत रानी गैदिन्लियू ने 5 जुलाई 2026 को बंगाल की खाड़ी से MOES-NIOT वैज्ञानिक डेटा बॉय को सफलतापूर्वक बरामद किया।
यह बॉय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के पास अपनी निर्धारित स्थिति से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई थी।
यह उपकरण समुद्री लहरों, तापमान, धाराओं और मौसम संबंधी आँकड़े एकत्र करता है, जो मौसम पूर्वानुमान और आपदा प्रबंधन में काम आते हैं।
बीते सप्ताह 29 जून को तटरक्षक बल ने मंगलूरु के निकट सुरथकल से 33 समुद्री मील दूर नौका 'मंजू माथा' से छह मछुआरों को 90 मिनट में सुरक्षित बचाया था।
तटरक्षक बल ने कहा कि वह समुद्री वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

भारतीय तटरक्षक बल ने 5 जुलाई 2026 को बंगाल की खाड़ी में अपनी निर्धारित स्थिति से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई एक MOES-NIOT वैज्ञानिक डेटा बॉय को सफलतापूर्वक बरामद किया। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के निकट से बहकर दूर जा चुकी इस बहुमूल्य वैज्ञानिक उपकरण की खोज और वापसी तटरक्षक पोत रानी गैदिन्लियू ने तेज हवाओं और प्रतिकूल समुद्री परिस्थितियों के बीच पूरी की।

अभियान का विवरण

रक्षा सूत्रों के अनुसार, यह डेटा बॉय नेल्लोर तट के पास अपने निर्धारित स्थान से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बह गई थी। समुद्र में उग्र मौसम और कम दृश्यता के बावजूद तटरक्षक दल ने सटीक खोज अभियान चलाया और इस उपकरण को सुरक्षित अपने नियंत्रण में ले लिया। पोत रानी गैदिन्लियू ने इस पूरे ऑपरेशन में अग्रणी भूमिका निभाई।

डेटा बॉय का वैज्ञानिक महत्व

यह MOES-NIOT (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय — राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान) की वैज्ञानिक डेटा बॉय समुद्री लहरों, जल-तापमान, धाराओं, मौसम और अन्य समुद्री परिस्थितियों से संबंधित महत्वपूर्ण आँकड़े एकत्र करती है। इन आँकड़ों का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अनुसंधान, तटीय सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और समुद्री गतिविधियों की निगरानी में किया जाता है। ऐसे उपकरणों की क्षति या हानि देश की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता को सीधे प्रभावित करती है।

तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता

भारतीय तटरक्षक बल ने कहा कि वह समुद्री सुरक्षा, खोज एवं बचाव तथा प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ समुद्र में स्थापित वैज्ञानिक उपकरणों और अनुसंधान परियोजनाओं की सुरक्षा के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह अभियान उस व्यापक भूमिका का उदाहरण है जो तटरक्षक बल अब पारंपरिक सुरक्षा से आगे बढ़कर वैज्ञानिक संपत्तियों के संरक्षण में निभा रहा है।

पिछले सप्ताह का बचाव अभियान

गौरतलब है कि बीते सप्ताह 29 जून की शाम कर्नाटक के मंगलूरु तट के निकट सुरथकल से लगभग 33 समुद्री मील दूर मछली पकड़ने वाली नौका 'मंजू माथा' समुद्र की उग्र परिस्थितियों में जलभराव के कारण संकट में फंस गई थी। नौका के ढाँचे को भी क्षति पहुँची और उस पर सवार छह मछुआरों की जान खतरे में पड़ गई। संदेश मिलते ही तटरक्षक बल ने 90 मिनट के भीतर बचाव दल को घटनास्थल पर पहुँचाया। ऊँची लहरों, तेज हवाओं और घटती रोशनी के बीच जवानों ने विशेष दूरस्थ-नियंत्रित लाइफबॉय की मदद से एक-एक कर सभी छह मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाला।

आगे की राह

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी समुद्री वैज्ञानिक अवसंरचना को तेज़ी से विस्तार दे रहा है और बंगाल की खाड़ी में अधिक निगरानी उपकरण तैनात किए जा रहे हैं। इस सफल बरामदगी से इन उपकरणों की सुरक्षा के लिए तटरक्षक बल और वैज्ञानिक संस्थाओं के बीच समन्वय की आवश्यकता और स्पष्ट हो गई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

इन उपकरणों की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक स्पष्ट प्रोटोकॉल की ज़रूरत उजागर होती है। सवाल यह है कि क्या तटरक्षक बल के पास इस बढ़ती ज़िम्मेदारी के लिए पर्याप्त संसाधन और समन्वय तंत्र है, या यह अभियान अपवाद था, नियम नहीं।
RashtraPress
5 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

MOES-NIOT वैज्ञानिक डेटा बॉय क्या होती है?
MOES-NIOT डेटा बॉय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा समुद्र में तैनात किया गया वैज्ञानिक उपकरण है। यह समुद्री लहरों, जल-तापमान, धाराओं और मौसम संबंधी आँकड़े एकत्र करता है, जो मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और समुद्री अनुसंधान में उपयोग होते हैं।
तटरक्षक बल ने यह डेटा बॉय कहाँ से बरामद की?
यह डेटा बॉय आंध्र प्रदेश के नेल्लोर तट के पास अपनी निर्धारित स्थिति से 150 किलोमीटर से अधिक दूर बंगाल की खाड़ी में बह गई थी। तटरक्षक पोत रानी गैदिन्लियू ने 5 जुलाई 2026 को इसे सफलतापूर्वक खोजकर बरामद किया।
इस अभियान में किस तटरक्षक पोत ने भाग लिया?
भारतीय तटरक्षक बल के जहाज रानी गैदिन्लियू ने इस बरामदगी अभियान को अंजाम दिया। तेज हवाओं और प्रतिकूल समुद्री परिस्थितियों के बावजूद इस पोत के दल ने सटीक खोज अभियान चलाकर बॉय को सुरक्षित नियंत्रण में लिया।
मंजू माथा नौका से छह मछुआरों को कैसे बचाया गया?
29 जून की शाम मंगलूरु के निकट सुरथकल तट से 33 समुद्री मील दूर मछली पकड़ने वाली नौका 'मंजू माथा' में जलभराव हो गया था। संदेश मिलते ही तटरक्षक बल ने 90 मिनट के भीतर बचाव दल को घटनास्थल पर पहुँचाया और विशेष दूरस्थ-नियंत्रित लाइफबॉय की मदद से सभी छह मछुआरों को सुरक्षित बाहर निकाला।
इस बरामदगी का वैज्ञानिक और राष्ट्रीय महत्व क्या है?
इस डेटा बॉय से प्राप्त आँकड़े मौसम पूर्वानुमान, तटीय सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इसकी हानि देश की समुद्री वैज्ञानिक क्षमता को प्रभावित करती, इसलिए यह बरामदगी भारत की समुद्री अनुसंधान अवसंरचना की सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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