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गुजरात में MSP की कानूनी गारंटी और मानसून-पूर्व कार्यों की जांच की मांग, कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना

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गुजरात में MSP की कानूनी गारंटी और मानसून-पूर्व कार्यों की जांच की मांग, कांग्रेस ने BJP पर साधा निशाना

सारांश

गुजरात कांग्रेस ने MSP की कानूनी गारंटी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू न करने पर केंद्र को घेरा। सूरत में बारिश से 9 मौतों के बाद मानसून-पूर्व कार्यों की उच्च-स्तरीय जांच की माँग — BJP सरकार पर वादाखिलाफी और प्रशासनिक विफलता का आरोप।

मुख्य बातें

कांग्रेस के गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक ने 8 जुलाई को केंद्र पर MSP के वादे तोड़ने का आरोप लगाया।
पार्टी ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को कानूनी गारंटी के साथ लागू करने की माँग की।
GPCC अध्यक्ष अमित चावड़ा ने सूरत में बारिश से 9 लोगों की मौत को प्रशासनिक विफलता बताया।
कांग्रेस ने मानसून-पूर्व कार्यों पर खर्च, टेंडर और क्रियान्वयन की उच्च-स्तरीय जांच की माँग की।
प्रभावित व्यापारियों, परिवारों और छोटे उद्योगों के नुकसान का सर्वे कर मुआवजा देने की माँग।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) की गुजरात इकाई ने बुधवार, 8 जुलाई को केंद्र और राज्य सरकारों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों से किए गए वादे बार-बार तोड़े गए हैं और मानसून-पूर्व तैयारियाँ पूरी तरह नाकाफी साबित हुई हैं। पार्टी ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के लिए कानूनी गारंटी और सूरत सहित राज्य के प्रभावित हिस्सों में मानसून-पूर्व कार्यों की उच्च-स्तरीय जांच की माँग की।

किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख

कांग्रेस के महासचिव और गुजरात प्रभारी मुकुल वासनिक ने अहमदाबाद में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने चुनावों के दौरान किसानों को MSP के बड़े-बड़े आश्वासन दिए, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया। उन्होंने कहा, 'मोदी सरकार लगातार किसानों को गुमराह कर रही है। चुनावों के दौरान किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के बारे में बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही उन्हें भुला दिया जाता है।'

वासनिक ने यह भी कहा कि सरकार ने कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को 'भारत रत्न' से सम्मानित तो किया, लेकिन उनके आयोग की उस अहम सिफारिश को लागू नहीं किया जिसमें किसानों को उत्पादन लागत से अधिक — यानी मुनाफे सहित — मूल्य दिलाने की बात कही गई थी। कांग्रेस ने माँग की है कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को कानूनी गारंटी के साथ लागू किया जाए और कृषि उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित किया जाए।

गुजरात के किसानों की चुनौतियाँ

वासनिक ने दावा किया कि गुजरात के किसान कई मोर्चों पर संकट में हैं — लाभकारी मूल्यों का अभाव, खेती की बढ़ती लागत, खाद, बीज और कीटनाशकों की महँगाई, फसल नुकसान पर अपर्याप्त मुआवजा, फसल बीमा योजना में खामियाँ और सिंचाई व बिजली से जुड़ी पुरानी समस्याएँ। उन्होंने केंद्र से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया।

मानसून की पहली बारिश ने खोली तैयारियों की पोल

गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) के अध्यक्ष अमित चावड़ा ने राज्य में मानसून की पहली भारी बारिश के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'पहली भारी बारिश ने विकास, मानसून से पहले की तैयारियों और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के भाजपा सरकार के दावों की पोल खोल दी है।'

सूरत का विशेष उल्लेख करते हुए चावड़ा ने बताया कि पिछले दो दिनों में हुई मूसलाधार बारिश ने सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया — रिहायशी इलाकों में जलभराव हुआ, व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा और वाहन क्षतिग्रस्त हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि बारिश से जुड़ी विभिन्न घटनाओं में नौ लोगों की मौत हुई है, जो प्रशासनिक विफलता और अपर्याप्त योजना की ओर इशारा करती है।

कांग्रेस की प्रमुख माँगें

पार्टी ने सरकार से निम्नलिखित कदम उठाने की माँग की:

प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य निर्बाध जारी रखे जाएँ; मृतकों के परिवारों को मुआवजा और विशेष सहायता दी जाए; प्रभावित परिवारों, व्यापारियों और छोटे उद्योगों के नुकसान का सर्वे कर मुआवजा प्रदान किया जाए। इसके अलावा, मानसून-पूर्व कार्यों पर हुए खर्च, टेंडर और उनके क्रियान्वयन की तय समय-सीमा में उच्च-स्तरीय जांच हो, तथा किसी भी लापरवाही या अनियमितता के लिए जिम्मेदार अधिकारियों, ठेकेदारों और एजेंसियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

आगे की राह

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब गुजरात में मानसून का मौसम अभी शुरू ही हुआ है और राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी है। कांग्रेस के इस हमले के बाद अब नजरें BJP सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और राहत कार्यों की गति पर टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गुजरात जैसे BJP के गढ़ में इसे उठाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। सूरत में बारिश से हुई 9 मौतें और जलभराव की तस्वीरें मानसून-पूर्व कार्यों की गुणवत्ता पर वास्तविक सवाल खड़े करती हैं, जिन्हें महज राजनीतिक आरोप कहकर खारिज नहीं किया जा सकता। डॉ. स्वामीनाथन को 'भारत रत्न' देने और उनकी सिफारिशें लागू न करने का विरोधाभास सरकार के लिए असहज करने वाला है। असली परीक्षा यह है कि क्या विपक्ष की ये माँगें जमीनी राहत में तब्दील होती हैं या चुनावी मौसम तक महज बयानबाजी बनी रहती हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात कांग्रेस ने MSP की कानूनी गारंटी की माँग क्यों की?
कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ने चुनावों के दौरान MSP के बड़े वादे किए, लेकिन चुनाव बाद उन्हें लागू नहीं किया। पार्टी ने स्वामीनाथन आयोग की उस सिफारिश को लागू करने की माँग की है जिसमें किसानों को उत्पादन लागत से अधिक मूल्य — यानी मुनाफे सहित — दिलाने की बात है।
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें क्या हैं और क्यों चर्चा में हैं?
कृषि वैज्ञानिक डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन की अध्यक्षता में बने आयोग ने किसानों को उत्पादन की व्यापक लागत (C2) पर 50% मुनाफे सहित MSP देने की सिफारिश की थी। कांग्रेस ने कहा कि सरकार ने स्वामीनाथन को 'भारत रत्न' तो दिया, लेकिन उनकी सिफारिशें लागू नहीं कीं — यही विरोधाभास विवाद की जड़ है।
सूरत में बारिश से कितना नुकसान हुआ और कांग्रेस ने क्या माँगें रखी हैं?
कांग्रेस के आरोपों के अनुसार, बारिश से जुड़ी घटनाओं में 9 लोगों की मौत हुई, रिहायशी इलाकों में जलभराव हुआ और व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। पार्टी ने मृतकों के परिवारों को मुआवजा, प्रभावित व्यापारियों का सर्वे और मानसून-पूर्व कार्यों की उच्च-स्तरीय जांच की माँग की है।
मानसून-पूर्व कार्यों की जांच की माँग क्यों उठी?
कांग्रेस का आरोप है कि मानसून-पूर्व कार्यों पर हुए खर्च और उनके क्रियान्वयन में अनियमितताएँ हैं, जो पहली भारी बारिश में ही सामने आ गईं। पार्टी ने टेंडर प्रक्रिया और खर्च की तय समय-सीमा में जांच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की है।
गुजरात के किसानों के सामने क्या प्रमुख चुनौतियाँ हैं?
कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक के अनुसार, गुजरात के किसान लाभकारी मूल्यों के अभाव, बढ़ती खेती लागत, खाद-बीज-कीटनाशकों की महँगाई, अपर्याप्त फसल बीमा और सिंचाई-बिजली की समस्याओं से जूझ रहे हैं। ये आरोप हैं — सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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