सुप्रीम कोर्ट ने नटराजन याचिका खारिज की: विश्वास सारंग बोले — क्रॉस-वोटिंग के डर से कांग्रेस ने जानबूझकर भरा गलत फॉर्म
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने 12 जून 2026 को भोपाल में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की याचिका खारिज किया जाना इस बात का प्रमाण है कि पार्टी ने राज्यसभा चुनाव में संभावित हार और क्रॉस-वोटिंग की शर्मिंदगी से बचने के लिए जानबूझकर विवाद खड़ा किया। सारंग के अनुसार कांग्रेस ने स्वयं अपना नामांकन फॉर्म गलत भरा और अब न्यायालय के निर्णय पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
सर्वोच्च न्यायालय ने मीनाक्षी नटराजन की वह याचिका खारिज कर दी जो मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में उनके नामांकन फॉर्म अस्वीकृत होने को चुनौती देती थी। मंत्री विश्वास सारंग ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल सही निर्णय दिया है। हम तो पहले से ही कहते आ रहे थे कि कांग्रेस केवल नाटक और नौटंकी कर रही है।'
सारंग का आरोप — क्यों भरा गलत फॉर्म
सारंग ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता पहले से ही क्रॉस-वोटिंग की आशंका जता रहे थे और पार्टी को भलीभाँति पता था कि तीसरी सीट पर उसे बुरी तरह हार का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने जानबूझकर गलत फॉर्म भरा, फॉर्म को खारिज कराया और अब हंगामा कर रही है।' उनके अनुसार यदि कांग्रेस अपने वरिष्ठ नेताओं और वकीलों से फॉर्म भरवाती तो यह स्थिति उत्पन्न ही नहीं होती।
महिला उत्पीड़न के मामले का संदर्भ
सारंग ने यह भी आरोप लगाया कि मीनाक्षी नटराजन के शपथपत्र में एक महत्त्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई गई, क्योंकि कथित तौर पर वह मामला महिला उत्पीड़न से जुड़ा था। उनके अनुसार कांग्रेस नहीं चाहती थी कि यह विषय सार्वजनिक रूप से उजागर हो, इसलिए फॉर्म खारिज करा दिया गया। हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल
सारंग ने कांग्रेस नेताओं पर सर्वोच्च न्यायालय के लिए 'आपत्तिजनक शब्दावली' के इस्तेमाल का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'एक ओर कांग्रेस संविधान के पालन की बात करती है और दूसरी ओर संविधान की धज्जियाँ उड़ाने का काम करती है।' उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी संवैधानिक व्यवस्था और परंपराओं को कमजोर कर रही है।
आगे क्या होगा
सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय के बाद मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर चुनावी प्रक्रिया पर नज़रें टिकी हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस फैसले को अपनी राजनीतिक जीत के रूप में प्रस्तुत कर रही है, जबकि कांग्रेस की प्रतिक्रिया अभी आधिकारिक रूप से सामने नहीं आई है।