झारखंड राज्यसभा सीट: कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया, पूर्व सांसद फुरकान अंसारी ने खुलकर जताई नाराज़गी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ने 5 जून 2026 को झारखंड से राज्यसभा चुनाव के लिए एआईसीसी सचिव और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के राजनीतिक सलाहकार प्रणव झा को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया। इस घोषणा के तत्काल बाद पार्टी के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई — गोड्डा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता फुरकान अंसारी ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराज़गी दर्ज कराई।
फुरकान अंसारी की नाराज़गी
अंसारी ने सोशल मीडिया पर जारी अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी कांग्रेस संगठन को मज़बूत करने और समाज को जोड़ने में लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें पद न मिलने का दुख नहीं है, परंतु दशकों के समर्पण और संघर्ष की उपेक्षा से उन्हें पीड़ा हुई है। अंसारी ने इस भावना को केवल अपनी नहीं, बल्कि उन हज़ारों कार्यकर्ताओं की आवाज़ बताया जिन्होंने वर्षों तक पार्टी के लिए निःस्वार्थ काम किया है। हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस के सिपाही थे और रहेंगे।
उम्मीदवारी पर मौन — 12 घंटे बाद भी बधाई नहीं
घोषणा गुरुवार देर रात की गई, और उल्लेखनीय यह है कि घोषणा के 12 घंटे बाद तक झारखंड कांग्रेस की प्रदेश इकाई या किसी प्रमुख स्थानीय नेता की ओर से स्वागत, शुभकामना या बधाई संदेश तक नहीं आया। यह मौन पार्टी के भीतर व्याप्त असंतोष का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है। झारखंड कांग्रेस के कई विधायक और नेता कथित तौर पर इस चयन से नाखुश हैं।
प्रणव झा का परिचय और 'स्थानीय बनाम बाहरी' विवाद
प्रणव झा मूल रूप से बिहार के भागलपुर जिले के निवासी हैं, हालाँकि उनकी प्रारंभिक शिक्षा और परवरिश बोकारो (झारखंड) में हुई है। कांग्रेस उन्हें झारखंड से जुड़ा स्थानीय चेहरा बताने की कोशिश कर रही है। इसके बावजूद राजनीतिक गलियारों में उनके चयन को लेकर 'स्थानीय बनाम बाहरी' की बहस छिड़ी हुई है, जो पार्टी के लिए आंतरिक एकजुटता की चुनौती बन सकती है।
उम्मीदवार घोषित होने पर प्रणव झा ने कांग्रेस नेतृत्व के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, झारखंड प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि सामान्य पृष्ठभूमि से आने वाले उन जैसे व्यक्ति पर जो विश्वास व्यक्त किया गया है, उस पर वे खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
चुनावी गणित और गठबंधन की ज़रूरत
झारखंड से राज्यसभा की दो सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होना है। झारखंड विधानसभा में कांग्रेस के पास अपने 16 विधायक हैं, जो अकेले जीत के लिए पर्याप्त नहीं हैं। जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और अन्य इंडिया ब्लॉक सहयोगियों के समर्थन पर निर्भर रहना होगा। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर ही असंतोष की आग सुलग रही है, जो गठबंधन की रणनीति को और जटिल बना सकती है।
आगे क्या
गौरतलब है कि आंतरिक असंतोष को दबाए बिना 18 जून के मतदान तक कांग्रेस नेतृत्व को अपने विधायकों और सहयोगी दलों को एकजुट रखना होगा। फुरकान अंसारी जैसे वरिष्ठ नेताओं की सार्वजनिक नाराज़गी पार्टी की आंतरिक लोकतंत्र की बहस को फिर से हवा दे सकती है।