असम में नेता प्रतिपक्ष पर कांग्रेस का गतिरोध जारी, BJP विधायक बिस्वजीत दैमारी बोले — 'पार्टी में भरोसा खत्म'
सारांश
मुख्य बातें
असम विधानसभा में कांग्रेस अब तक अपने नेता प्रतिपक्ष की घोषणा नहीं कर पाई है, और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ विधायक बिस्वजीत दैमारी ने सोमवार, 25 मई को इसके पीछे कांग्रेस के भीतर गहरे अविश्वास और गुटबाजी को जिम्मेदार ठहराया। दैमारी ने कहा कि रविवार देर रात हुई कांग्रेस विधायक दल (CLP) की बैठक के बाद भी विपक्षी खेमा किसी नाम पर सहमति नहीं बना सका।
दैमारी का आरोप: 'एक-दूसरे पर भरोसा नहीं'
BJP विधायक बिस्वजीत दैमारी ने कहा, 'उनके बीच कोई भरोसा नहीं है। कोई भी किसी दूसरे पर भरोसा नहीं कर पा रहा है और इसी वजह से वे अब तक विपक्ष का नेता चुनने में नाकाम रहे हैं।' उन्होंने आगे कहा कि एक गुट एक नेता का समर्थन करता है जबकि दूसरा गुट किसी और के पक्ष में खड़ा है — यह आंतरिक दरार अब खुलकर सामने आ रही है।
दैमारी ने यह भी कहा कि जब नेताओं के बीच आपसी विश्वास समाप्त हो जाता है, तो नेतृत्व का चुनाव बेहद कठिन हो जाता है। उनके अनुसार, कांग्रेस की गुटबाजी ने असम में पार्टी की संगठनात्मक एकता को कमज़ोर किया है।
कांग्रेस का पक्ष: आलाकमान को सौंपा फैसला
दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुवाहाटी में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि CLP की बैठक सभी विधायकों की उपस्थिति में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि कांग्रेस विधायकों ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर पार्टी आलाकमान को विधायक दल का नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक तय करने का अधिकार दिया है।
बघेल ने कहा, 'विधायक दल की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई और कांग्रेस के सभी विधायक मौजूद थे। एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित कर आलाकमान को यह तय करने का अधिकार दिया गया कि विधायक दल का नेता, उपनेता और मुख्य सचेतक कौन होगा।'
विधानसभा में कांग्रेस की स्थिति
कांग्रेस इस समय 126 सदस्यीय असम विधानसभा में 19 विधायकों के साथ मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है। गौरतलब है कि BJP के नेतृत्व वाले गठबंधन ने इस विधानसभा में 102 सीटें जीतकर विपक्ष को भारी शिकस्त दी थी, जिससे कांग्रेस के लिए अपनी स्थिति मजबूत करना पहले से ही चुनौतीपूर्ण रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष की भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए नेता प्रतिपक्ष का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। नेतृत्व पर आम सहमति के अभाव ने पार्टी की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आगे क्या होगा
उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस आलाकमान विधायकों से सलाह-मशविरा पूरा करने के बाद जल्द ही असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष, उपनेता और मुख्य सचेतक के नामों की औपचारिक घोषणा करेगा। हालांकि, अब तक कोई समयसीमा तय नहीं की गई है और गतिरोध कब समाप्त होगा, यह अनिश्चित बना हुआ है।