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तपन कांडू हत्याकांड 2022: आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत

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तपन कांडू हत्याकांड 2022: आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत

सारांश

तपन कांडू हत्याकांड में आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह की पुरुलिया अस्पताल में मौत हो गई — यह मुकदमे के दौरान मरने वाले दूसरे आरोपी हैं। पाँच में से दो आरोपी अब जा चुके हैं, दो जमानत पर बाहर हैं। 2022 के इस राजनीतिक हत्याकांड में न्याय की राह लंबी होती जा रही है।

मुख्य बातें

कालेबर सिंह (58) , तपन कांडू हत्याकांड के आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर, की पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान मौत हो गई।
वह अप्रैल 2022 से न्यायिक हिरासत में थे और पिछले चार महीनों से अस्पताल में भर्ती थे।
CBI की चार्जशीट में शामिल पाँच आरोपियों में से अब दो की मुकदमे से पहले मौत हो चुकी है — सत्यवान प्रमाणिक (नवंबर 2023) और अब कालेबर सिंह।
13 मार्च 2022 को झालदा में कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या की गई थी।
नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत पर बाहर हैं।
शव का बुधवार को पोस्टमार्टम होगा, इसके बाद परिजनों को सौंपा जाएगा।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की झालदा नगरपालिका के कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की 2022 में हुई हत्या के मामले में आरोपी कॉन्ट्रैक्ट किलर कालेबर सिंह (58) की पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने मंगलवार, 4 अगस्त 2026 को यह जानकारी साझा की। यह इस हाई-प्रोफाइल राजनीतिक हत्याकांड में मुकदमे के दौरान मरने वाले दूसरे आरोपी हैं।

मौत की परिस्थितियाँ

कालेबर सिंह को अप्रैल 2022 में गिरफ्तारी के बाद से पुरुलिया जिला सुधार गृह में न्यायिक हिरासत में रखा गया था। वह लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और पिछले लगभग चार महीनों से पुरुलिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती थे। मंगलवार सुबह मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जाँच रिपोर्ट तैयार की गई। बुधवार को शव का पोस्टमार्टम किए जाने के बाद परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया निर्धारित है।

परिवार की प्रतिक्रिया

कालेबर सिंह की पत्नी प्रतिमा देवी ने कहा, 'मेरे पति लंबे समय से बीमार थे। उन्हें इलाज के लिए कई अस्पतालों में ले जाया गया। हमने अदालत में जमानत के लिए अर्जी दी थी, लेकिन वह मंजूर नहीं हुई। मुझे नहीं पता कि मेरे पति ने हत्या की थी या नहीं, लेकिन मुझे किसी से कोई शिकायत नहीं है।' उनकी यह टिप्पणी मामले की जटिल मानवीय परतों को उजागर करती है।

तपन कांडू हत्याकांड की पृष्ठभूमि

13 मार्च 2022 को झालदा में कांग्रेस पार्षद तपन कांडू की उस समय गोली मारकर हत्या कर दी गई जब वे सुबह की सैर पर दोस्तों के साथ निकले थे। यह हत्या झालदा नगरपालिका चुनावों में त्रिशंकु जनादेश के ठीक बाद हुई थी — 12 सदस्यीय निकाय में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पाँच-पाँच सीटें जीती थीं। एक निर्दलीय पार्षद के कांग्रेस को समर्थन देने से पार्टी के लिए बोर्ड बनाने की संभावना बन गई थी, जिसके बाद यह हत्या हुई और राज्य में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

मामले की शुरुआती जाँच राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी ने की थी। बाद में कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया।

सीबीआई चार्जशीट और आरोपियों की स्थिति

जून 2022 में दायर अपनी चार्जशीट में CBI ने पाँच आरोपियों — दीपक कांडू, कालेबर सिंह, नरेन कांडू, मोहम्मद आशिक और सत्यवान प्रमाणिक — के नाम शामिल किए थे। इनमें से अब दो आरोपियों की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है। सत्यवान प्रमाणिक की नवंबर 2023 में बीमारी से मृत्यु हुई थी, और अब कालेबर सिंह दूसरे आरोपी बने हैं जो फैसले से पहले दुनिया छोड़ गए। नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत पर बाहर हैं।

आगे क्या होगा

पाँच में से दो आरोपियों की मृत्यु और दो के जमानत पर रिहा होने के साथ, इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया की गति पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। CBI की जाँच और शेष आरोपियों के विरुद्ध मुकदमे की दिशा अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है, खासकर तब जब पीड़ित परिवार और कांग्रेस पार्टी न्याय की प्रतीक्षा में हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन तीन साल से अधिक समय बाद भी फैसला नहीं आया। पीड़ित परिवार और राजनीतिक दल न्याय की प्रतीक्षा में हैं, जबकि मामले की साक्ष्य-शृंखला हर गुजरते दिन के साथ कमजोर होती जा रही है।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तपन कांडू कौन थे और उनकी हत्या कैसे हुई?
तपन कांडू पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले की झालदा नगरपालिका के कांग्रेस पार्षद थे। 13 मार्च 2022 को सुबह की सैर के दौरान उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई, जो झालदा नगरपालिका चुनावों में त्रिशंकु जनादेश के तुरंत बाद हुई थी।
कालेबर सिंह कौन थे और उनकी मौत कैसे हुई?
कालेबर सिंह (58) तपन कांडू हत्याकांड में CBI द्वारा नामित पाँच आरोपियों में से एक थे, जिन पर कॉन्ट्रैक्ट किलर होने का आरोप था। अप्रैल 2022 से न्यायिक हिरासत में रहते हुए वह लंबे समय से बीमार थे और पुरुलिया सरकारी मेडिकल कॉलेज में लगभग चार महीने से भर्ती थे, जहाँ उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले की जाँच CBI को क्यों सौंपी गई?
शुरुआत में जाँच राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी कर रही थी, लेकिन कलकत्ता उच्च न्यायालय के निर्देश पर इसे CBI को सौंपा गया। जून 2022 में CBI ने पाँच आरोपियों के नाम वाली चार्जशीट दायर की।
इस हत्याकांड के शेष आरोपियों की क्या स्थिति है?
CBI चार्जशीट के पाँच आरोपियों में से दो — सत्यवान प्रमाणिक (नवंबर 2023) और कालेबर सिंह — की मुकदमे से पहले मौत हो चुकी है। नरेन कांडू और दीपक कांडू फिलहाल कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा दी गई जमानत पर बाहर हैं।
तपन कांडू की हत्या का राजनीतिक महत्व क्या था?
यह हत्या झालदा नगरपालिका चुनावों में त्रिशंकु परिणाम के बाद हुई, जहाँ 12 सदस्यीय निकाय में कांग्रेस और TMC ने पाँच-पाँच सीटें जीती थीं। एक निर्दलीय पार्षद के कांग्रेस को समर्थन देने से बोर्ड बनाने की संभावना बनी थी, जिसके तुरंत बाद कांडू की हत्या ने पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया।
राष्ट्र प्रेस
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