10 अगस्त 2026
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डीएमके-एआईएडीएमके 'विलय' पर सीपीआई(एम) नेता शनमुगम की टिप्पणी, तमिलनाडु की सियासत में हलचल

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डीएमके-एआईएडीएमके 'विलय' पर सीपीआई(एम) नेता शनमुगम की टिप्पणी, तमिलनाडु की सियासत में हलचल

सारांश

सीपीआई(एम) नेता पी. शनमुगम ने कह दिया जो कोई नहीं कहता — कि डीएमके और एआईएडीएमके का एकजुट होना अचंभे की बात नहीं होगी। दशकों की प्रतिद्वंद्विता के बाद यह बयान तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति की बदलती जमीन का संकेत है, और डीएमके की तीखी प्रतिक्रिया बताती है कि नस कहाँ दबी है।

मुख्य बातें

शनमुगम ने 21 जून को कहा कि डीएमके और एआईएडीएमके का भविष्य में एकजुट होना आश्चर्यजनक नहीं होगा।
शनमुगम ने सीपीआई(एम) के दोनों द्रविड़ पार्टियों के साथ पूर्व गठबंधनों का बचाव किया, इसे विचारधारा से समझौता नहीं बल्कि राजनीतिक परिस्थितियों की ज़रूरत बताया।
उन्होंने डीएमके नेतृत्व की आलोचना की कि वे गठबंधन छोड़ने वाली पार्टियों पर हमले होने देते हैं।
डीएमके नेताओं ने शनमुगम की टिप्पणी की कड़ी निंदा की और किसी भी विलय की संभावना को नकारा।
यह बयान हालिया विधानसभा चुनाव के बाद उभरी उन चर्चाओं के बीच आया है जिनमें दोनों पार्टियों के बीच शुरुआती बातचीत की रिपोर्टें थीं।

तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है, जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के वरिष्ठ नेता पी. शनमुगम ने 21 जून को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि यदि द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) भविष्य में एकजुट होकर काम करने लगें, तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होगा। उनकी इस टिप्पणी ने चेन्नई की राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है, जहाँ डीएमके नेताओं ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है।

शनमुगम ने क्या कहा

शनमुगम ने अपने बयान में कहा, 'चुनावी गठबंधन राजनीतिक हकीकत के आधार पर बनते हैं। सीटों के बंटवारे से दोनों पक्षों को फायदा होता है और ऐसे राजनीतिक फैसलों में 'धोखा' शब्द की कोई जगह नहीं है।' उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में सीपीआई(एम) द्वारा डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के साथ किए गए चुनावी गठबंधनों का बचाव करते हुए स्पष्ट किया कि ये निर्णय विचारधारा से समझौते के नहीं, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों की उपज थे।

शनमुगम ने यह भी तर्क दिया कि डीएमके ने स्वयं महत्वपूर्ण अवसरों पर डीएमडीके जैसी छोटी पार्टियों का सहारा लिया था, क्योंकि उसके पास अकेले जीत सुनिश्चित करने की पर्याप्त शक्ति नहीं थी। उनके अनुसार, तमिलनाडु में बदलते राजनीतिक समीकरणों और जनता की बदलती अपेक्षाओं ने मार्क्सवादी पार्टी के वर्तमान राजनीतिक रुख को प्रभावित किया है।

डीएमके नेतृत्व पर निशाना

शनमुगम ने डीएमके नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा, 'गठबंधन छोड़ने वालों को निशाना बनाने की आदत गलत है। डीएमके नेतृत्व को उन लोगों को रोकना चाहिए जो भावुक और दुश्मनी भरी बातें करते हैं।' उनका आरोप था कि जो पार्टियाँ गठबंधन छोड़ती हैं, उन पर हमले होने दिए जाते हैं — जो एक स्वस्थ राजनीतिक संस्कृति के विपरीत है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों प्रमुख द्रविड़ पार्टियाँ धीरे-धीरे अपने कई मूल सिद्धांतों से दूर होती जा रही हैं। उनके शब्दों में, 'आज के राजनीतिक माहौल में अगर डीएमके और एआईएडीएमके आखिरकार एक पार्टी के तौर पर काम करने लगें, तो हैरानी की बात नहीं होगी।'

राजनीतिक पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि शनमुगम के ये बयान हालिया विधानसभा चुनाव के बाद उभरी राजनीतिक चर्चाओं के बीच आए हैं। उस दौरान ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं कि डीएमके और एआईएडीएमके के बीच संभावित सरकार गठन को लेकर शुरुआती स्तर पर बातचीत हुई थी — हालाँकि किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।

यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु की द्रविड़ राजनीति पहले से ही पुनर्गठन के दौर से गुजर रही है। डीएमके और एआईएडीएमके दशकों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, और दोनों के बीच किसी भी प्रकार के विलय की कल्पना तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े भूकंप जैसी होगी।

डीएमके की तीखी प्रतिक्रिया

डीएमके नेताओं ने शनमुगम की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। पार्टी के प्रवक्ताओं ने दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों के बीच किसी भी भविष्य के विलय की संभावना को पूरी तरह नकार दिया है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान राजनीतिक भ्रम पैदा करते हैं और गठबंधन की राजनीति में अनावश्यक तनाव उत्पन्न करते हैं।

आगे क्या

शनमुगम के बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दिया है — क्या द्रविड़ राजनीति की वैचारिक सीमाएँ धुंधली पड़ रही हैं? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद आने वाले महीनों में गठबंधन की रणनीति और पार्टी की स्थिति को लेकर और गहरी चर्चाओं को प्रेरित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी ही उनके बीच की वैचारिक खाई भी पाटती गई है। असली सवाल यह नहीं कि विलय होगा या नहीं — बल्कि यह है कि अगर दोनों पार्टियाँ नीतिगत स्तर पर एक जैसी दिखने लगी हैं, तो तमिलनाडु के मतदाताओं के पास वास्तविक विकल्प बचा क्या है? डीएमके की तीखी प्रतिक्रिया इस असुविधाजनक सच्चाई से ध्यान हटाने की कोशिश भी हो सकती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीपीआई(एम) नेता शनमुगम ने डीएमके-एआईएडीएमके विलय पर क्या कहा?
शनमुगम ने कहा कि आज के राजनीतिक माहौल में यदि डीएमके और एआईएडीएमके आखिरकार एक पार्टी के तौर पर काम करने लगें, तो यह हैरानी की बात नहीं होगी। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों द्रविड़ पार्टियाँ धीरे-धीरे अपने मूल सिद्धांतों से दूर होती जा रही हैं।
डीएमके ने शनमुगम के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
डीएमके नेताओं ने शनमुगम की टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है और दोनों द्रविड़ प्रतिद्वंद्वियों के बीच किसी भी भविष्य के विलय की संभावना को पूरी तरह नकार दिया है। पार्टी ने इसे राजनीतिक भ्रम फैलाने वाला बयान बताया।
शनमुगम ने सीपीआई(एम) के पूर्व गठबंधनों का बचाव कैसे किया?
उन्होंने कहा कि डीएमके और एआईएडीएमके दोनों के साथ किए गए गठबंधन विचारधारा से समझौता नहीं थे, बल्कि तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों की माँग थे। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि डीएमके ने खुद भी ज़रूरत पड़ने पर छोटी पार्टियों का सहारा लिया था।
यह विवाद तमिलनाडु की राजनीति में क्यों अहम है?
डीएमके और एआईएडीएमके दशकों से एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी रहे हैं और तमिलनाडु की राजनीति इन्हीं दो ध्रुवों के इर्द-गिर्द घूमती है। किसी भी संभावित विलय या नजदीकी की चर्चा राज्य के राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल सकती है।
क्या डीएमके और एआईएडीएमके के बीच वास्तव में विलय की बातचीत हुई थी?
हालिया विधानसभा चुनाव के बाद ऐसी रिपोर्टें आई थीं कि दोनों पार्टियों के बीच शुरुआती स्तर पर बातचीत हुई थी, लेकिन किसी भी पक्ष ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की। शनमुगम का बयान इन्हीं अपुष्ट रिपोर्टों की पृष्ठभूमि में आया है।
राष्ट्र प्रेस
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