2 अगस्त 2026
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कावेरी विवाद पर नेताओं की चुप्पी को डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने बताया 'विश्वासघात'

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कावेरी विवाद पर नेताओं की चुप्पी को डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने बताया 'विश्वासघात'

सारांश

DMK सांसद दयानिधि मारन ने एक्स पर पोस्ट कर उन नेताओं पर 'विश्वासघात' का आरोप लगाया जो कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध, नीट उन्मूलन और कथित खरीद-फरोख्त पर चयनात्मक चुप्पी साधते हैं — यह बयान 2026 चुनावों से पहले तमिलनाडु की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।

मुख्य बातें

DMK सांसद दयानिधि मारन ने 2 अगस्त को एक्स पर पोस्ट कर कावेरी विवाद पर चुप नेताओं को 'विश्वासघाती' बताया।
मारन ने कर्नाटक की मेकेदातु जलाशय परियोजना का विरोध न करने वालों को तमिलनाडु के हितों का दुश्मन करार दिया।
नीट पर केवल अनियमितताओं की आलोचना को अपर्याप्त बताते हुए मारन ने पूरी नीट प्रणाली समाप्त करने की मांग को अनिवार्य बताया।
BJP पर खरीद-फरोख्त की आलोचना करने वाले और TVK के आरोपों पर मौन रहने वालों को 'राजनीतिक पाखंडी' कहा।
नीट-विरोधी प्रदर्शनकारियों पर दिल्ली पुलिस व तमिलनाडु पुलिस की कार्रवाई की निंदा न करने को नेताओं की असंगति बताया।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सांसद दयानिधि मारन ने 2 अगस्त 2026 को कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध परियोजना, नीट परीक्षा प्रणाली और तमिलनाडु की राजनीति में कथित खरीद-फरोख्त के मुद्दों पर मुखर होकर उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो इन विषयों पर सुविधाजनक चुप्पी साधे हुए हैं। मारन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि ऐसे नेता तमिलनाडु के हितों के साथ 'विश्वासघात' कर रहे हैं।

कावेरी और मेकेदातु पर कड़ा रुख

मारन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो राजनीतिक नेता तमिलनाडु का दौरा करते हैं लेकिन कावेरी जल अधिकारों पर एक शब्द नहीं बोलते, उनकी राज्य के प्रति प्रतिबद्धता संदिग्ध है। उन्होंने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना का विरोध न करने वालों को भी निशाने पर लिया और तर्क दिया कि यह परियोजना तमिलनाडु के कावेरी जल हिस्से को सीधे प्रभावित करती है।

गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच राजनीतिक तनाव का स्थायी केंद्र बना हुआ है। मेकेदातु परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएँ लंबित हैं।

नीट पर अधूरे विरोध को बताया अपर्याप्त

नीट के मुद्दे पर मारन ने कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की आलोचना करना पर्याप्त नहीं है — जो दल तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, उन्हें नीट व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस और तमिलनाडु पुलिस द्वारा नीट-विरोधी प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा न करने को नेताओं की असंगति का प्रमाण बताया।

चयनात्मक आक्रोश पर तीखा प्रहार

मारन ने तमिलनाडु की राजनीति में कथित खरीद-फरोख्त के संदर्भ में कहा कि कुछ राजनीतिक आवाजें भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त की आलोचना तो करती हैं, लेकिन तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विरुद्ध लगे ऐसे ही आरोपों पर मौन रहती हैं। उन्होंने इसे 'राजनीतिक पाखंड' करार दिया।

यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गठजोड़ और दलबदल की चर्चाएँ तेज हैं।

एक्स पर पोस्ट से उठा राजनीतिक तूफान

मारन ने एक्स पर लिखा कि जो नेता पद और सत्ता के बदले अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं, वे 'जहरीले सांप' हैं जो पदों के लिए अपनी वफादारी बेच देते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या गजब का विश्वासघात!' — यह पंक्ति तमिलनाडु की समकालीन राजनीति में मौजूद विरोधाभासों और चयनात्मक आक्रोश को रेखांकित करती है।

आगे क्या

मारन के इस बयान से तमिलनाडु में कावेरी, नीट और राजनीतिक नैतिकता पर बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है, लेकिन DMK के भीतर से इस तरह का मुखर स्वर राज्य की राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन गहराई में यह DMK की उस रणनीतिक चिंता को उजागर करता है जो 2026 विधानसभा चुनावों से पहले TVK के उभार और संभावित गठबंधन समीकरणों को लेकर है। कावेरी और नीट — दोनों मुद्दे तमिलनाडु में भावनात्मक रूप से अत्यंत संवेदनशील हैं, और इन पर 'चयनात्मक चुप्पी' का आरोप प्रतिद्वंद्वियों को कमज़ोर करने का सुचिंतित प्रयास है। विडंबना यह है कि DMK स्वयं केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की सहयोगी है, जिससे कावेरी पर उसकी अपनी मोलभाव की स्थिति सीमित रहती है — एक तथ्य जो मारन के आक्रामक स्वर के बावजूद अनुत्तरित रहता है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दयानिधि मारन ने कावेरी विवाद पर क्या कहा?
मारन ने कहा कि जो नेता तमिलनाडु आते हैं लेकिन कावेरी जल अधिकारों पर कुछ नहीं बोलते, उनकी राज्य के प्रति प्रतिबद्धता पर सवाल उठाया जाना चाहिए। उन्होंने इसे राज्य के हितों के साथ 'विश्वासघात' बताया।
मेकेदातु बांध परियोजना तमिलनाडु के लिए विवादास्पद क्यों है?
मेकेदातु कर्नाटक की प्रस्तावित जलाशय परियोजना है जिसे तमिलनाडु कावेरी नदी के अपने जल हिस्से के लिए खतरा मानता है। मारन ने कहा कि इस परियोजना का विरोध न करना तमिलनाडु के जल अधिकारों को कमज़ोर करना है।
मारन ने नीट पर क्या माँग रखी?
मारन ने कहा कि केवल नीट में कथित अनियमितताओं की आलोचना पर्याप्त नहीं है — तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने का दावा करने वाले दलों को नीट व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की स्पष्ट माँग करनी चाहिए।
मारन ने किस 'चयनात्मक आक्रोश' की बात की?
मारन ने कहा कि कुछ राजनीतिक आवाजें BJP पर विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त की आलोचना करती हैं, लेकिन TVK (तमिलगा वेत्री कझगम) पर लगे ऐसे ही आरोपों पर चुप रहती हैं। उन्होंने इसे 'राजनीतिक पाखंड' बताया।
दयानिधि मारन कौन हैं और DMK में उनकी भूमिका क्या है?
दयानिधि मारन DMK के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद हैं। वे द्रविड़ मुनेत्र कषगम के संस्थापक एम. करुणानिधि के परिवार से नज़दीकी रखते हैं और पार्टी के मुखर प्रवक्ताओं में गिने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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