कावेरी विवाद पर नेताओं की चुप्पी को डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने बताया 'विश्वासघात'
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के सांसद दयानिधि मारन ने 2 अगस्त 2026 को कावेरी जल विवाद, मेकेदातु बांध परियोजना, नीट परीक्षा प्रणाली और तमिलनाडु की राजनीति में कथित खरीद-फरोख्त के मुद्दों पर मुखर होकर उन नेताओं को आड़े हाथों लिया जो इन विषयों पर सुविधाजनक चुप्पी साधे हुए हैं। मारन ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि ऐसे नेता तमिलनाडु के हितों के साथ 'विश्वासघात' कर रहे हैं।
कावेरी और मेकेदातु पर कड़ा रुख
मारन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जो राजनीतिक नेता तमिलनाडु का दौरा करते हैं लेकिन कावेरी जल अधिकारों पर एक शब्द नहीं बोलते, उनकी राज्य के प्रति प्रतिबद्धता संदिग्ध है। उन्होंने कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु जलाशय परियोजना का विरोध न करने वालों को भी निशाने पर लिया और तर्क दिया कि यह परियोजना तमिलनाडु के कावेरी जल हिस्से को सीधे प्रभावित करती है।
गौरतलब है कि कावेरी जल विवाद दशकों पुराना है और तमिलनाडु व कर्नाटक के बीच राजनीतिक तनाव का स्थायी केंद्र बना हुआ है। मेकेदातु परियोजना पर सर्वोच्च न्यायालय में भी याचिकाएँ लंबित हैं।
नीट पर अधूरे विरोध को बताया अपर्याप्त
नीट के मुद्दे पर मारन ने कहा कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की आलोचना करना पर्याप्त नहीं है — जो दल तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हैं, उन्हें नीट व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की मांग करनी चाहिए। उन्होंने दिल्ली पुलिस और तमिलनाडु पुलिस द्वारा नीट-विरोधी प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ किए गए व्यवहार की निंदा न करने को नेताओं की असंगति का प्रमाण बताया।
चयनात्मक आक्रोश पर तीखा प्रहार
मारन ने तमिलनाडु की राजनीति में कथित खरीद-फरोख्त के संदर्भ में कहा कि कुछ राजनीतिक आवाजें भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त की आलोचना तो करती हैं, लेकिन तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विरुद्ध लगे ऐसे ही आरोपों पर मौन रहती हैं। उन्होंने इसे 'राजनीतिक पाखंड' करार दिया।
यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गठजोड़ और दलबदल की चर्चाएँ तेज हैं।
एक्स पर पोस्ट से उठा राजनीतिक तूफान
मारन ने एक्स पर लिखा कि जो नेता पद और सत्ता के बदले अपने सिद्धांतों से समझौता कर लेते हैं, वे 'जहरीले सांप' हैं जो पदों के लिए अपनी वफादारी बेच देते हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा, 'क्या गजब का विश्वासघात!' — यह पंक्ति तमिलनाडु की समकालीन राजनीति में मौजूद विरोधाभासों और चयनात्मक आक्रोश को रेखांकित करती है।
आगे क्या
मारन के इस बयान से तमिलनाडु में कावेरी, नीट और राजनीतिक नैतिकता पर बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है, लेकिन DMK के भीतर से इस तरह का मुखर स्वर राज्य की राजनीतिक गतिशीलता को प्रभावित कर सकता है।