दिल्ली पुलिस का 'ऑपरेशन साइ हॉक': ई-कॉमर्स धोखाधड़ी गिरोह गिरफ्तार, ₹6.5 लाख की ज्वेलरी बरामद
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने 11 जून 2026 को 'ऑपरेशन साइ हॉक' के तहत एक संगठित ई-कॉमर्स धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ किया, जो ऑनलाइन डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स प्रणाली में हेरफेर कर विक्रेताओं को ठग रहा था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से ₹6.5 लाख की कृत्रिम चाँदी की ज्वेलरी बरामद की।
मामला कैसे सामने आया
यह मामला तब उजागर हुआ जब फ्लिपकार्ट की लॉजिस्टिक्स भागीदार कंपनी वेरकैटलिस्ट प्राइवेट लिमिटेड ने शिकायत दर्ज कराई। कंपनी के ओखला फेज-2 स्थित संजय कॉलोनी के गोदाम में आंतरिक ऑडिट के दौरान पाया गया कि महंगे आभूषणों के कई पार्सल या तो छेड़छाड़ किए हुए थे या खाली अवस्था में पहुँच रहे थे। शिकायत के आधार पर ओखला इंडस्ट्रियल एरिया थाने में एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की गई।
गिरोह का तरीकावार
पुलिस के अनुसार, आरोपी अर्पित कश्यप और आकाश राठौर — जो पिकअप स्टाफ के रूप में कार्यरत थे — ने टेंपो चालक मोहित कुमार के साथ मिलकर साजिश रची। तीनों ने वेंडर पोर्टल और पार्सल मूवमेंट सिस्टम तक अपनी आधिकारिक पहुँच का दुरुपयोग किया।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी पहले महंगे आभूषणों के पिकअप ऑर्डर तैयार करते, विक्रेताओं से असली पार्सल ले लेते, फिर गोदाम में जमा करने से पहले ऑर्डर रद्द कर देते। इसके बाद पार्सल खोलकर कीमती आभूषण निकाल लिए जाते और डिब्बों को दोबारा पैक कर गोदाम में जमा कर दिया जाता, ताकि डिलीवरी सामान्य दिखे।
चोरी का माल कहाँ जाता था
चुराए गए आभूषण बाद में अनमोल उर्फ अनमोल पोद्दार को कम कीमत पर बेचे जाते थे। पुलिस का आरोप है कि पोद्दार बिना बिल और सामान के स्रोत की जाँच किए इन्हें खरीदता था। उसे भी इस मामले में गिरफ्तार किया गया है।
जाँच में क्या मिला
जाँच टीम ने तकनीकी निगरानी, डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से मामले का खुलासा किया। वेंडर पोर्टल की गतिविधियाँ, ऑर्डर आईडी, पार्सल मूवमेंट लॉग, रूट शीट और मोबाइल फोन रिकॉर्ड सहित अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जाँच की गई। पुलिस के अनुसार, महंगे ऑर्डर बनाने, उन्हें रद्द करने और छेड़छाड़ किए गए पार्सल जमा करने का एक तय पैटर्न सामने आया, जिससे साजिश की पुष्टि हुई।
आरोपियों की निशानदेही पर बरामद ₹6.5 लाख की कृत्रिम चाँदी की ज्वेलरी का मिलान विक्रेताओं के बिल और शिपमेंट रिकॉर्ड से किया जा रहा है।
आगे की जाँच
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की जाँच जारी है। आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य संभावित बरामदगी की भी पड़ताल की जा रही है। यह घटना ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स श्रृंखला में आंतरिक सुरक्षा खामियों को उजागर करती है, जो आने वाले समय में कंपनियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है।