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त्रिलोकपुरी ईआरओ का स्पष्टीकरण: मृत व स्थानांतरित मतदाताओं पर सोशल मीडिया के दावे गलत पाए गए

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त्रिलोकपुरी ईआरओ का स्पष्टीकरण: मृत व स्थानांतरित मतदाताओं पर सोशल मीडिया के दावे गलत पाए गए

सारांश

त्रिलोकपुरी ईआरओ ने सोशल मीडिया पर फैले उन दावों को खारिज किया जिनमें मतदाता सूची में मृत व स्थानांतरित मतदाताओं की गलत प्रविष्टियों का आरोप था। विजेंद्र प्रकरण में पत्नी की गलत जानकारी से हुई चूक को सुधारा गया और दोबारा सर्वेक्षण में 10 नए फॉर्म-6 प्राप्त हुए।

मुख्य बातें

त्रिलोकपुरी ईआरओ ने 31 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर फैले मतदाता सूची संबंधी दावों को जाँच में गलत पाया।
मतदाता विजेंद्र (ईपीआईसी: केएनडी0902452) को पत्नी की जानकारी के आधार पर 'मृत' दर्ज किया गया था; जीवित पाए जाने पर फॉर्म-6 भरकर नाम पुनः शामिल किया गया।
चिल्ला खादर क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़ी शिकायतें पटपड़गंज विधानसभा के अधिकारियों को अग्रेषित की गईं।
कांग्रेस और BJP के बूथ लेवल एजेंटों ने एएसडीडी सूची का पूर्व में सत्यापन किया था और कोई आपत्ति नहीं जताई थी।
दोबारा सर्वेक्षण में मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए कुल 10 फॉर्म-6 प्राप्त हुए।

दिल्ली की त्रिलोकपुरी विधानसभा सीट के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) कार्यालय ने 31 अक्टूबर को एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि मतदाता सूची में अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और मृत (एएसडीडी) श्रेणी के मतदाताओं के बारे में सोशल मीडिया पर किए गए कई दावे जाँच में गलत पाए गए हैं। यह स्पष्टीकरण उन आरोपों के जवाब में आया है जो जन सुनवाई शिविर के दौरान कुछ स्वैच्छिक संगठनों द्वारा सार्वजनिक रूप से उठाए गए थे।

मुख्य घटनाक्रम

जन सरोकार मजदूर किसान शक्ति संगठन, नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडिपेंडेंट वुमेन और वोटर अधिकार मंच जैसे संगठनों ने जन सुनवाई शिविर के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सोशल मीडिया पर आरोप लगाए थे। ईआरओ कार्यालय ने इन दावों की जाँच की और पाया कि अधिकांश आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं थे।

गौरतलब है कि मतदाता सूचियों की शुद्धता को लेकर दिल्ली में समय-समय पर विवाद उठते रहे हैं, और यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में निर्वाचन संबंधी प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक निगरानी बढ़ी हुई है।

विजेंद्र प्रकरण: क्या हुआ

ईआरओ ने एक विशेष उदाहरण का उल्लेख किया जिसमें ईपीआईसी नंबर केएनडी0902452 धारक मतदाता विजेंद्र को मृत श्रेणी में दर्ज किए जाने पर एक वीडियो के माध्यम से सवाल उठाए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, मतदाता सत्यापन अभियान के दौरान संबंधित बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) ने विजेंद्र के घर का दौरा किया था, जहाँ उनकी पत्नी ने बताया था कि उनके पति का निधन हो चुका है। इसी जानकारी के आधार पर विजेंद्र का नाम एएसडीडी सूची में 'मृत' श्रेणी में शामिल किया गया।

बाद में जब यह पता चला कि विजेंद्र जीवित हैं, तो बीएलओ ने दोबारा उनके घर जाकर फॉर्म-6 भरवाया और उनका नाम मतदाता सूची में पुनः शामिल कर लिया गया। ईआरओ ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से भी दर्ज की गई है।

अधिकार क्षेत्र की सीमाएँ

ईआरओ ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ संगठनों द्वारा जिन 'लापता मतदाताओं' का उल्लेख किया गया, उनमें से कुछ चिल्ला खादर क्षेत्र के निवासी हैं, जो त्रिलोकपुरी विधानसभा क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इस कारण उन मामलों पर त्रिलोकपुरी ईआरओ कार्यालय कोई टिप्पणी करने की स्थिति में नहीं है।

चिल्ला खादर की निवासी माया देवी और पितौली देवी से संबंधित शिकायतें संबंधित पटपड़गंज विधानसभा क्षेत्र के अधिकारियों को अग्रेषित कर दी गई हैं।

राजनीतिक दलों की भूमिका

ईआरओ के अनुसार, त्रिलोकपुरी विधानसभा की एएसडीडी सूची मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) के साथ पहले ही साझा की जा चुकी थी। इस संबंध में बैठक की कार्यवाही भी तैयार कर सभी दलों के बीएलए को उपलब्ध कराई गई थी।

कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बूथ लेवल एजेंटों ने इस सूची का सत्यापन किया था और उस समय किसी प्रकार की आपत्ति नहीं जताई थी, यह ईआरओ कार्यालय का कहना है।

आगे की कार्रवाई

यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे, संबंधित क्षेत्र का दोबारा सर्वेक्षण कराया गया, जिसके दौरान नाम जोड़ने के लिए कुल 10 फॉर्म-6 प्राप्त किए गए। ईआरओ ने कहा कि निर्वाचन विभाग का उद्देश्य सभी पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित करना और शिकायतों का समयबद्ध समाधान करना है। आगे भी ऐसे किसी दावे की जाँच पारदर्शी तरीके से की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो त्रुटियाँ अपरिहार्य हो जाती हैं। विजेंद्र प्रकरण यह दर्शाता है कि प्रक्रिया में सुधार की गुंजाइश है — सुधार हुआ, लेकिन तभी जब सार्वजनिक दबाव बना। यह भी उल्लेखनीय है कि कांग्रेस और BJP दोनों के बीएलए ने सूची पर पहले कोई आपत्ति नहीं उठाई, जो यह सुझाता है कि राजनीतिक दलों की निगरानी भी उतनी सक्रिय नहीं रही जितनी होनी चाहिए।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

त्रिलोकपुरी ईआरओ ने किन दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया?
त्रिलोकपुरी ईआरओ ने उन सोशल मीडिया दावों पर स्पष्टीकरण जारी किया जिनमें मतदाता सूची में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट (एएसडीडी) मतदाताओं की गलत प्रविष्टियों का आरोप लगाया गया था। जाँच में ये दावे गलत पाए गए।
विजेंद्र का नाम मतदाता सूची से क्यों हटाया गया था?
मतदाता सत्यापन अभियान के दौरान बीएलओ के घर दौरे पर विजेंद्र की पत्नी ने उन्हें मृत बताया था, जिसके आधार पर उनका नाम एएसडीडी सूची में 'मृत' श्रेणी में दर्ज हुआ। बाद में जीवित पाए जाने पर फॉर्म-6 भरकर उनका नाम पुनः शामिल किया गया।
चिल्ला खादर के मतदाताओं की शिकायतें क्यों त्रिलोकपुरी ईआरओ ने नहीं सुनीं?
चिल्ला खादर क्षेत्र त्रिलोकपुरी विधानसभा के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए त्रिलोकपुरी ईआरओ उन मामलों पर टिप्पणी नहीं कर सकता। माया देवी और पितौली देवी की शिकायतें पटपड़गंज विधानसभा के अधिकारियों को भेज दी गई हैं।
क्या राजनीतिक दलों ने एएसडीडी सूची पर कोई आपत्ति जताई थी?
नहीं। कांग्रेस और BJP दोनों के बूथ लेवल एजेंटों ने त्रिलोकपुरी की एएसडीडी सूची का सत्यापन किया था और उस समय किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी।
दोबारा सर्वेक्षण में क्या सामने आया?
यह सुनिश्चित करने के लिए कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से न छूटे, संबंधित क्षेत्र का पुनः सर्वेक्षण कराया गया। इस अभियान के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए कुल 10 फॉर्म-6 प्राप्त किए गए।
राष्ट्र प्रेस
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