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जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर अमित शाह का बड़ा फैसला: हाई लेवल कमेटी गठित, जस्टिस नावलेकर बने अध्यक्ष

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जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर अमित शाह का बड़ा फैसला: हाई लेवल कमेटी गठित, जस्टिस नावलेकर बने अध्यक्ष

सारांश

केंद्र सरकार ने अवैध घुसपैठ और असामान्य जनसंख्या बदलाव की जाँच के लिए हाई लेवल कमेटी का गठन कर दिया है — वह वादा जो PM मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले से किया था। सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति नावलेकर की अध्यक्षता में बनी यह समिति राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संरचना पर असर डालने वाले डेमोग्राफिक पैटर्न का विश्लेषण करेगी।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 26 मई 2026 को जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर हाई लेवल कमेटी के गठन की घोषणा की।
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे; सदस्यों में दुर्गा शंकर मिश्रा , बालाजी श्रीवास्तव और डॉ.
शमिका रवि शामिल हैं।
PM नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को इस कमेटी के गठन का वादा किया था, जो अब पूरा हुआ।
समिति अवैध प्रवास, धार्मिक व सामाजिक समुदायों में असामान्य जनसंख्या परिवर्तन के पैटर्न का विश्लेषण कर समयबद्ध समाधान सुझाएगी।
पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा ने इसी मुद्दे पर TMC को हराकर पूर्ण बहुमत हासिल किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार, 26 मई 2026 को घोषणा की कि केंद्र सरकार ने अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन (डेमोग्राफिक चेंज) की जाँच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (हाई लेवल कमेटी) का औपचारिक गठन कर दिया है। यह कमेटी सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में काम करेगी और पूरे भारत में हो रहे असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों का व्यापक मूल्यांकन प्रस्तुत करेगी।

घोषणा की पृष्ठभूमि

गृह मंत्री अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से इस हाई लेवल कमेटी के गठन की घोषणा की थी। शाह ने लिखा, 'घुसपैठ और अन्य कारणों से अस्वाभाविक जनसांख्यिकीय परिवर्तन किसी भी राष्ट्र के वर्तमान व भविष्य के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है।' उन्होंने यह भी कहा कि 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि सरकार ने इस कमेटी का गठन कर लिया है।'

समिति की संरचना और सदस्य

कमेटी की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे। सदस्यों में जनगणना आयुक्त के साथ-साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में कार्य करेंगे।

समिति का दायरा और उद्देश्य

अमित शाह के अनुसार, यह कमेटी अवैध प्रवास और असामान्य कारणों से पूरे भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तन का व्यापक मूल्यांकन करेगी। इसके साथ ही समिति धार्मिक एवं सामाजिक समुदायों के स्तर पर असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण करेगी। शाह ने कहा कि यह मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था, सामाजिक संरचना और जनजातीय समाज के संरक्षण से सीधे जुड़ा हुआ है। समिति अपने निष्कर्षों के आधार पर सुनियोजित और समयबद्ध समाधान भी प्रस्तुत करेगी।

राजनीतिक संदर्भ

यह गठन ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ का मुद्दा केंद्र में रहा था। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसी मुद्दे को आधार बनाकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) की तत्कालीन सरकार का घेराव किया था और चुनाव में पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की। गौरतलब है कि यह पहला मौका है जब केंद्र सरकार ने डेमोग्राफिक चेंज के मुद्दे पर इस स्तर की संस्थागत जाँच संरचना खड़ी की है।

आगे क्या होगा

समिति को अपनी जाँच के बाद एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, जिसमें जनसंख्या परिवर्तन के कारणों, पैटर्न और समाधान सुझाए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, समिति की सिफारिशें भविष्य की नीतियों और कानूनों की दिशा तय कर सकती हैं। इस कदम पर विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया अभी सामने आनी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली इम्तिहान इसकी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और समयसीमा से तय होगा। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद यह मुद्दा राजनीतिक रूप से सक्रिय है — इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह नीतिगत पहल है या चुनावी वैधता का विस्तार। समिति के निष्कर्ष तब ही विश्वसनीय माने जाएंगे जब उसकी कार्यप्रणाली, डेटा स्रोत और सिफारिशें सार्वजनिक जाँच के लिए खुली रखी जाएं। बिना स्वतंत्र समीक्षा तंत्र के, इसके निष्कर्ष राजनीतिक विवाद का नया केंद्र बन सकते हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डेमोग्राफिक चेंज पर बनी हाई लेवल कमेटी क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा गठित एक उच्च स्तरीय समिति है जो अवैध प्रवास और अन्य असामान्य कारणों से भारत में हो रहे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का व्यापक मूल्यांकन करेगी। इसकी घोषणा गृह मंत्री अमित शाह ने 26 मई 2026 को की।
इस समिति के अध्यक्ष और सदस्य कौन हैं?
समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर करेंगे। सदस्यों में जनगणना आयुक्त, सेवानिवृत्त आईएएस दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव और अर्थशास्त्री डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) सदस्य सचिव होंगे।
यह कमेटी क्यों बनाई गई और इसका उद्देश्य क्या है?
गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार, अवैध घुसपैठ से होने वाला असामान्य जनसांख्यिकीय परिवर्तन राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून व्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए गंभीर चुनौती है। कमेटी धार्मिक व सामाजिक समुदायों में असामान्य जनसंख्या परिवर्तनों के पैटर्न का विश्लेषण कर समयबद्ध समाधान सुझाएगी।
PM मोदी ने इस कमेटी की घोषणा कब की थी?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को लाल किले की प्राचीर से इस हाई लेवल कमेटी के गठन की घोषणा की थी। अब करीब नौ महीने बाद 26 मई 2026 को इसका औपचारिक गठन हुआ है।
पश्चिम बंगाल चुनाव से इस मुद्दे का क्या संबंध है?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में डेमोग्राफिक चेंज और घुसपैठ प्रमुख मुद्दे रहे थे। भाजपा ने इन्हीं मुद्दों को आधार बनाकर तृणमूल कांग्रेस को हराया और पूर्ण बहुमत से सत्ता हासिल की, जिसके बाद इस कमेटी का गठन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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