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जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति अवैध घुसपैठियों के निर्वासन कानूनों पर देगी सिफारिशें: न्यायमूर्ति नावलेकर

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जनसांख्यिकीय परिवर्तन समिति अवैध घुसपैठियों के निर्वासन कानूनों पर देगी सिफारिशें: न्यायमूर्ति नावलेकर

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा गठित 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति' के अध्यक्ष न्यायमूर्ति नावलेकर ने साफ किया — समिति अवैध घुसपैठियों के निर्वासन के लिए कानूनी ढाँचे की सिफारिश करेगी। सात सदस्यीय यह पैनल एक वर्ष में रिपोर्ट देगा।

मुख्य बातें

न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) को 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति' का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
समिति अवैध घुसपैठियों की हिरासत और निर्वासन के लिए उपयुक्त कानूनी व्यवस्था पर सरकार को सिफारिशें देगी।
समिति सीमावर्ती जिलों, शहरों और आदिवासी क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का राष्ट्रव्यापी अध्ययन करेगी।
समिति में फिलहाल 7 सदस्य हैं और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा।
अंतिम रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर देनी होगी; आवश्यकता पड़ने पर 6 महीने का विस्तार संभव।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 मई को इस समिति के गठन की घोषणा की थी।

नई दिल्ली में 27 मई को सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर (सेवानिवृत्त) ने स्पष्ट किया कि 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति' अवैध घुसपैठियों की हिरासत और निर्वासन के लिए उपयुक्त कानूनी ढाँचे पर सरकार को सिफारिशें देगी। न्यायमूर्ति नावलेकर को इस सात सदस्यीय समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा।

समिति का कार्यक्षेत्र

न्यायमूर्ति नावलेकर ने बताया कि समिति पूरे देश की जनसंख्या जनसांख्यिकी — विशेष रूप से सीमावर्ती जिलों, शहरों और आदिवासी क्षेत्रों — में हो रहे परिवर्तनों का गहन अध्ययन करेगी। उन्होंने कहा, 'यही हमारा कार्यक्षेत्र होगा।' समिति केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि राष्ट्रव्यापी जनसांख्यिकीय रुझानों का समग्र मूल्यांकन करेगी।

उन्होंने आगे स्पष्ट किया, 'इसके बाद हम जनसांख्यिकीय परिवर्तन के कारणों की पहचान करेंगे।' समिति किसी भी केंद्रीय मंत्रालय, राज्य सरकार या सरकारी एजेंसी से आवश्यक जानकारी और डेटा माँगने का अधिकार रखती है।

निर्वासन कानूनों पर सिफारिशें

न्यायमूर्ति नावलेकर ने कहा, 'हम अवैध आप्रवासन, अवैध घुसपैठियों की हिरासत और निर्वासन के लिए एक उचित प्रणाली का सुझाव देंगे। हम इस बात पर विचार करेंगे कि ऐसे घुसपैठियों के निर्वासन के लिए किस प्रकार और कौन से कानून बनाए जाएं।' उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि समिति की भूमिका केवल सलाहकारी है — अंतिम निर्णय सरकार और संसद का होगा।

उन्होंने कहा, 'समिति सिफारिशों पर फैसला करेगी। समिति की रिपोर्ट सरकार को भेजी जाएगी। सरकार समिति की रिपोर्ट का कितना हिस्सा लागू करती है, यह सरकार पर निर्भर करेगा।' साथ ही उन्होंने जोड़ा, 'संसद द्वारा पारित होने के बाद सरकार कानून बनाएगी।'

समिति का गठन और समयसीमा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार, 27 मई को इस उच्च स्तरीय समिति के गठन की घोषणा की थी। समिति का उद्देश्य देश में अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन उत्पन्न करने वाली घुसपैठ जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत रोडमैप तैयार करना है।

न्यायमूर्ति नावलेकर ने बताया कि समिति को एक वर्ष के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि रिपोर्ट छह महीने में नहीं आती, तो समयसीमा अतिरिक्त छह महीने के लिए बढ़ाई जा सकती है। फिलहाल समिति में सात सदस्य हैं।

व्यापक संदर्भ

यह समिति ऐसे समय में गठित की गई है जब सीमावर्ती राज्यों में अवैध प्रवासन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज़ हो रही है। गौरतलब है कि अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया भारत में दशकों से कानूनी और प्रशासनिक जटिलताओं से घिरी रही है। समिति की सिफारिशें इस दिशा में एक ठोस नीतिगत आधार प्रदान कर सकती हैं।

आगे की राह

समिति अपनी रिपोर्ट तैयार करने के बाद केंद्र सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर संसद में नए कानून या संशोधन लाए जा सकते हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि समिति की सिफारिशें किस हद तक मौजूदा संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा इसके कार्यान्वयन में है। भारत में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया असम के NRC जैसे अनुभवों से गुज़री है, जो न्यायिक, प्रशासनिक और मानवाधिकार संबंधी जटिलताओं से भरी रही। समिति की सिफारिशें तब तक अधूरी रहेंगी जब तक वे संवैधानिक कसौटी और अंतरराष्ट्रीय दायित्वों की कड़ी समीक्षा से न गुज़रें। यह भी देखना होगा कि 'जनसांख्यिकीय परिवर्तन' की परिभाषा समिति कितनी वस्तुनिष्ठ और डेटा-आधारित रखती है — क्योंकि इस शब्द का राजनीतिक उपयोग और वास्तविक नीतिगत ज़रूरत, दोनों के बीच की रेखा बहुत महीन है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर उच्च स्तरीय समिति क्या है?
यह केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 27 मई को गठित सात सदस्यीय सलाहकार समिति है, जिसका नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नावलेकर कर रहे हैं। इसका उद्देश्य देश में अप्राकृतिक जनसांख्यिकीय परिवर्तन और अवैध प्रवासन का आकलन कर सरकार को नीतिगत सिफारिशें देना है।
यह समिति अवैध घुसपैठियों के निर्वासन पर क्या करेगी?
समिति अवैध घुसपैठियों की हिरासत और निर्वासन के लिए उचित कानूनी ढाँचे पर सिफारिशें तैयार करेगी। न्यायमूर्ति नावलेकर के अनुसार, समिति यह विचार करेगी कि किस प्रकार और कौन से कानून बनाए जाएं, जिन्हें बाद में संसद से पारित कराना होगा।
समिति अपनी रिपोर्ट कब तक देगी?
समिति को एक वर्ष के भीतर अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। यदि रिपोर्ट छह महीने में नहीं आती, तो समयसीमा अतिरिक्त छह महीने के लिए बढ़ाई जा सकती है।
समिति किन क्षेत्रों का अध्ययन करेगी?
समिति सीमावर्ती जिलों, शहरों और आदिवासी क्षेत्रों सहित पूरे देश की जनसंख्या जनसांख्यिकी का अध्ययन करेगी। यह किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होगी, बल्कि राष्ट्रव्यापी जनसांख्यिकीय रुझानों का समग्र मूल्यांकन करेगी।
क्या समिति की सिफारिशें सरकार के लिए बाध्यकारी होंगी?
नहीं, समिति की भूमिका केवल सलाहकारी है। न्यायमूर्ति नावलेकर ने स्पष्ट किया कि सरकार तय करेगी कि रिपोर्ट का कितना हिस्सा लागू किया जाए, और कानून बनाने का अधिकार संसद के पास है।
राष्ट्र प्रेस
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