रिश्वत मांगने के आरोप में डिप्टी सीएमओ डॉ. सचिंद्र कुमार मिश्रा निलंबित, मेरठ मंडल से जांच के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश शासन ने गौतमबुद्ध नगर के स्वास्थ्य विभाग में तैनात डिप्टी मुख्य चिकित्सा अधिकारी (डिप्टी सीएमओ) डॉ. सचिंद्र कुमार मिश्रा को 22 अक्टूबर 2026 से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर बिसरख क्षेत्र में एक अपंजीकृत क्लीनिक संचालक से फोन पर कथित तौर पर रिश्वत मांगने का गंभीर आरोप है। निलंबन का आधिकारिक आदेश चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव वी. हेकाली झिमोमी द्वारा जारी किया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
आरोपों के अनुसार, डॉ. मिश्रा ने बिसरख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में प्रभारी और लेवल-3 चिकित्सा अधिकारी के रूप में अपनी तैनाती के दौरान बिसरख क्षेत्र में कथित तौर पर बिना पंजीकरण के क्लीनिक संचालित करने वाले पवन चौधरी को फोन कर अवैध रूप से धनराशि यानी रिश्वत की मांग की। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद संबंधित शिकायत शासन स्तर तक पहुंची, जिसे गंभीरता से लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई।
गौरतलब है कि गौतमबुद्ध नगर के स्वास्थ्य विभाग कार्यालय को निलंबन आदेश की डिजिटल प्रति मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को प्राप्त हुई, जबकि कार्रवाई 22 अक्टूबर 2026 को ही प्रभावी हो चुकी थी। आदेश मिलते ही जिले के स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई।
निलंबन की शर्तें और कार्यालय संलग्नता
शासन ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक नियमावली के तहत दंडात्मक कार्रवाई करते हुए डॉ. मिश्रा को निलंबन अवधि के दौरान अपर निदेशक, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, मेरठ मंडल के कार्यालय से संबद्ध किया है। अर्थात् निलंबन काल में उनका मुख्यालय मेरठ मंडल के अपर निदेशक कार्यालय रहेगा। पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की जिम्मेदारी भी मेरठ मंडल के स्वास्थ्य विभाग को सौंपी गई है।
जांच टीम का गठन होगा
मेरठ मंडल के अपर निदेशक डॉ. मनोज सेन ने डॉ. मिश्रा के निलंबन की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि शासन की ओर से लेवल-3 के अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई से संबंधित पत्र उनके कार्यालय को प्राप्त हो चुका है। शासन के उच्च अधिकारियों के निर्देशों के अनुसार जल्द ही एक विशेष जांच टीम का गठन किया जाएगा। यह टीम आरोपों से जुड़े तथ्यों, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले की पड़ताल करेगी।
स्वास्थ्य विभाग पर असर और आगे की राह
इस कार्रवाई के बाद गौतमबुद्ध नगर के स्वास्थ्य विभाग में चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेष रूप से जिले में बिना पंजीकरण के संचालित होने वाले क्लीनिक संचालकों के बीच भी यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। शासन की इस कार्रवाई को स्वास्थ्य विभाग में कथित भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख के तौर पर देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर आम जनता की अपेक्षाएं ऊंची हैं। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की विभागीय या न्यायिक कार्रवाई तय होगी।